‘क्यूबा को छीन लूंगा’: ट्रंप की धमकी के बाद मेक्सिको, ब्राजील और स्पेन ने मिलकर दिया करारा जवाब

Author Govind jee
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तस्वीर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप. क्रेडिट-एक्स/@WhiteHouse.

Trump Cuba Threat: ट्रंप की क्यूबा को कब्जे में लेने वाली चेतावनी के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल बढ़ गई है. बार्सिलोना समिट में जुटे तीन देशों ने मानवीय संकट को लेकर दुनिया से दखल की मांग की है. जानिए कैसे फ्यूल की किल्लत और ब्लैकआउट ने वहां आम जनता का जीना मुहाल कर दिया है.

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Trump Cuba Threat: क्यूबा में मचे कोहराम और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों के बीच दुनिया के तीन बड़े देशों ने हाथ मिला लिया है. शनिवार और रविवार को मेक्सिको, स्पेन और ब्राजील ने एक साझा बयान जारी कर क्यूबा की ‘गंभीर स्थिति’ पर चिंता जताई है. इन देशों ने कहा है कि क्यूबा के लोग बहुत बड़ी मानवीय त्रासदी से गुजर रहे हैं और इसे सुधारने के लिए तुरंत कदम उठाने की जरूरत है.

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ट्रंप की ‘क्यूबा’ वाली धमकी  

यह पूरा मामला तब गरमाया जब राष्ट्रपति ट्रंप ने खुलेआम कहा कि वे क्यूबा को ‘ले’ सकते हैं. पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि मुझे लगता है कि मुझे क्यूबा को अपने कब्जे में लेने का सम्मान मिलेगा. मैं उसे आजाद कराऊं या जीत लूं, सच तो यह है कि मैं उसके साथ कुछ भी कर सकता हूं. यह बयान काफी हैरान करने वाला है क्योंकि फिदेल कास्त्रो के दौर के बाद से अब तक किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने क्यूबा पर कब्जा करने की बात सार्वजनिक तौर पर नहीं की थी. ट्रंप ने संकेत दिया कि वेनेजुएला के निकोलस मादुरो को हटाने और ईरान के खिलाफ कार्रवाई के बाद अब क्यूबा का नंबर है.

बार्सिलोना समिट में जुटे दिग्गज नेता

स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज की अगुवाई में बार्सिलोना में वामपंथी नेताओं का एक सम्मेलन हुआ. इसमें मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शिनबाम और ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा भी शामिल हुए. इन तीनों देशों ने बिना अमेरिका का नाम लिए कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत आपस में बातचीत होनी चाहिए. उनका कहना है कि क्यूबा का भविष्य वहां के लोग ही तय करें और इसमें बाहरी दखल नहीं होना चाहिए.

बिजली-फ्यूल के लिए तरस रहा है क्यूबा

अमेरिका ने इस साल जनवरी से क्यूबा पर आर्थिक दबाव काफी बढ़ा दिया है. वाशिंगटन ने दूसरे देशों को फ्यूल सप्लाई न करने की चेतावनी दी है, जिससे क्यूबा में तेल की भारी कमी हो गई है. हाल ही में अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने एक तेल टैंकर को भी रोका था. रिपोर्ट्स के मुताबिक, जनवरी की शुरुआत से क्यूबा को तेल की कोई बड़ी खेप नहीं मिली है. इसका नतीजा यह हुआ कि पूरे देश में 29 घंटे तक बिजली गुल रही और राजधानी हवाना के कई हिस्सों में अब भी अंधेरा है.

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रूस से मदद की उम्मीद

इस संकट का असर अब क्यूबा के आम लोगों पर दिखने लगा है. अस्पतालों में सर्जरी टाली जा रही है, दवाइयां खत्म हो रही हैं और खाने-पीने की चीजों की भारी कमी हो गई है. दबाव बढ़ता देख क्यूबा सरकार ने अमेरिका से बातचीत शुरू की है और विदेश में रहने वाले क्यूबा के लोगों को देश में निवेश करने की अनुमति देने जैसे आर्थिक बदलावों के संकेत दिए हैं. इसी बीच रूस ने कहा है कि वह क्यूबा के संपर्क में है और जरूरत पड़ने पर उसकी मदद कर सकता है.

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