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तालिबान ने दी ‘आम माफी’, कहा- सरकार में शामिल हों महिलाएं, काम पर लौटें सरकारी कर्मचारी

Afghanistan Taliban Crisis: अफगानिस्तान पर कब्जा करने वाला और कई शहरों को बिना लड़ाई जीतने वाला तालिबान वर्ष 1990 के क्रूर शासन के उलट खुद को अधिक लचीला दिखाने की कोशिश कर रहा है.

Afghanistan Taliban Crisis: तालिबान ने मंगलवार को पूरे अफगानिस्तान में ‘आम माफी’ की घोषणा की. महिलाओं से उसकी सरकार में शामिल होने का आह्वान किया. सरकारी कर्मचारियों से अपील की है कि वे काम पर लौट आयें. इसके साथ ही तालिबान ने लोगों की आशंका दूर करने की कोशिश है, जो एक दिन पहले उसके शासन से बचने के लिए काबुल छोड़कर भागने की कोशिश करते दिखे थे. इसकी वजह से काबुल एयरपोर्ट पर अफरा-तफरी का माहौल पैदा होने के बाद कई लोग मारे गये थे.

अफगानिस्तान पर कब्जा करने वाला और कई शहरों को बिना लड़ाई जीतने वाला तालिबान वर्ष 1990 के क्रूर शासन के उलट खुद को अधिक लचीला दिखाने की कोशिश कर रहा है. लेकिन, कई अफगानी अब भी आशंकित हैं. पुरानी पीढ़ी तालिबान की अति रूढ़िवादी सोच को याद कर रही है, जब 11 सितंबर 2001 को न्यूयॉर्क पर हमले के बाद अमेरिका के अफगानिस्तान पर हमले से पहले सजा के तौर पर पत्थर से मारने और सार्वजनिक तौर पर फांसी की सजा दी जाती थी.

काबुल में उत्पीड़न या लड़ाई की बड़ी घटना अब तक दर्ज नहीं हुई है. तालिबान द्वारा जेलों पर कब्जा कर कैदियों को छुड़ाने एवं हथियारों को लूटने की घटना के बाद कई शहरी घरों में मौजूद हैं, लेकिन भयभीत हैं. कई महिलाओं ने आशंका जतायी है कि अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण के दौरान महिलाओं को और अधिकार देने का पश्चिमी प्रयोग तालिबान के शासन में कायम नहीं रहेगा.

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तालिबान के सांस्कृतिक आयोग के सदस्य इनामुल्ला समानगनी ने आम माफी का वादा किया है. यह पहली बार है, जब तालिबान की ओर से संघीय स्तर पर शासन को लेकर टिप्पणी की गयी है. समानगनी की टिप्पणी अस्पष्ट है. हालांकि, अब भी तालिबान पदच्युत की गयी सरकार के नेताओं से बातचीत कर रहा है और अब तक किसी समझौते की घोषणा नहीं की गयी है.

अफगानिस्तान अब इस्लामी अमीरात

समानगनी ने कहा, ‘इस्लामी अमीरात (तालिबान द्वारा घोषित अफगानिस्तान का नाम) नहीं चाहता कि महिलाएं पीड़ित हों. उन्हें शरीया कानून के तहत सरकार में शामिल होना चाहिए.’ यह बयान तालिबान की पिछली सरकार की नीति से हटने का संकेत हो सकता है, जिसमें महिलाओं को घरों में सीमित कर दिया गया था. समानगनी ने हालांकि, यह नहीं बताया कि उनके लिए शरीया या इस्लामी कानून का क्या मतलब है.

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Posted By: Mithilesh Jha

Prabhat Khabar Digital Desk
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