Saudi Arabia airstrike Yemen on UAE backed STC: शुक्रवार को सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने दक्षिणी यमन में हवाई हमले किए, जिनमें कम से कम 20 अलगाववादी लड़ाके मारे गए. हमले का निशाना यूएई समर्थित साउदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) था, जो तेल-समृद्ध हदरमौत प्रांत में सक्रिय है. ये हमले ऐसे समय हुए जब कुछ घंटे पहले ही STC ने दक्षिण यमन को अलग देश बनाने के लिए दो साल की संक्रमणकालीन योजना की घोषणा की थी. वादी हदरमौत में STC प्रमुख मोहम्मद अब्दुलमलिक ने बताया कि अल-खाशा सैन्य शिविर पर कम से कम सात मिसाइलें दागी गईं. इसके अलावा सेयून हवाई अड्डा और रेगिस्तान में अन्य सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया गया.
यह अब तक का सबसे सीधा और गंभीर टकराव माना जा रहा है. पिछले महीने ही STC ने हदरमौत और महरा प्रांतों पर कब्जा कर लिया था. चूंकि इन इलाकों की सीमा सऊदी अरब से लगती है, इसलिए रियाद ने इसे अपनी सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा माना. वहीं शुक्रवार को टीवी पर संबोधन में STC अध्यक्ष ऐदरूस अल-जुबैदी ने दक्षिण अरब राज्य को बहाल करने के लिए संवैधानिक संक्रमण की घोषणा की. उन्होंने कहा कि संगठन 2028 तक शांतिपूर्ण जनमत संग्रह करना चाहता है, लेकिन अगर उनके इलाकों या बलों पर हमला हुआ, तो स्वतंत्रता की घोषणा तुरंत कर दी जाएगी.
वहीं, सऊदी समर्थित हदरमौत के गवर्नर सालेम अल-खानबाशी ने इसे “शांतिपूर्ण अभियान” बताया. उनका कहना था कि इसका उद्देश्य सैन्य ठिकानों पर नियंत्रण फिर से हासिल करना और हथियारों को निष्क्रिय करना है. उन्होंने कहा, “यह कोई युद्ध की शुरुआत नहीं है. यह कदम अराजकता रोकने और सुरक्षा बनाए रखने के लिए उठाया गया है.” हालांकि, इन हमलों के कारण यातायात और लॉजिस्टिक पर असर पड़ा. जेद्दा में सुरक्षा जांच अनिवार्य किए जाने के बाद अदन हवाई अड्डे से 24 घंटे से ज्यादा समय तक कोई उड़ान नहीं जा पाई और न ही कोई विमान उतर सका. STC से जुड़े परिवहन मंत्रालय ने इसे नाकेबंदी बताया.
पिछले महीने एसटीसी ने तेल समृद्ध इलाकों पर किया था कब्जा
यह पहली बार है जब इन इलाकों पर कब्जे के बाद सऊदी गठबंधन ने सीधे हवाई हमला किया है. इससे साफ हो गया है कि हूती विद्रोहियों के खिलाफ बना सऊदी अरब और यूएई का गठबंधन अब आपस में ही टकराव की स्थिति में पहुंच गया है. हालिया हमलों ने दिखा दिया है कि दोनों सहयोगी देशों के बीच मतभेद अब खुले संघर्ष में बदल रहे हैं. पिछले महीने एसटीसी ने हदरमौत और महरा जैसे तेल-समृद्ध इलाकों में घुसकर वहां कब्जा कर लिया था, जिससे सऊदी अरब और यूएई के बीच तनाव और बढ़ गया. एसटीसी के उप-प्रमुख अहमद बिन बराइक ने कहा कि सऊदी समर्थित नेशनल शील्ड फोर्सेज ने उनके शिविरों की ओर बढ़ने की कोशिश की, लेकिन उनके लड़ाकों ने पीछे हटने से इनकार कर दिया. इसके बाद हवाई हमले किए गए.
कैसे बढ़ा तनाव?
तनाव तब और बढ़ गया, जब एसटीसी ने सऊदी समर्थित नेशनल शील्ड फोर्सेज को हदरमौत और महरा से बाहर कर दिया. ये बल पहले हूती विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी गठबंधन के साथ मिलकर लड़ रहे थे. इसी बीच यमन में सऊदी अरब के राजदूत ने आरोप लगाया कि एसटीसी प्रमुख ने अदन में सऊदी मध्यस्थों के विमान को उतरने से रोक दिया. इन हमलों के बाद एसटीसी ने सख्त रुख अपनाया है. हालांकि, संगठन के सैन्य प्रवक्ता ने कहा कि वे सऊदी समर्थित बलों के खिलाफ “अस्तित्व की लड़ाई” लड़ रहे हैं. उनका दावा है कि यह लड़ाई कट्टरपंथी इस्लामवाद के खिलाफ है, जिसे यूएई लंबे समय से अपनी प्राथमिकता बताता रहा है. एसटीसी प्रवक्ता मोहम्मद अल-नकीब के मुताबिक हालात अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुके हैं.
सऊदी की मांग: हथियार छोड़े एसटीसी
हालांकि, हदरमौत के मौजूदा गवर्नर सालेम अल-खानबाशी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह कार्रवाई तनाव बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि सुरक्षा बनाए रखने और अवैध हथियार हटाने के लिए की जा रही है. सऊदी अरब अब भी एसटीसी से मांग कर रहा है कि वह हदरमौत और महरा से अपने लड़ाके और हथियार वापस ले, लेकिन अलगाववादी संगठन इसके लिए तैयार नहीं है. हालात को देखते हुए सऊदी अरब ने अरब सागर में अपनी नौसेना तैनात कर दी है, ताकि हथियारों की तस्करी रोकी जा सके. हवाई अड्डों और उड़ानों को लेकर भी दोनों पक्षों में तनातनी बनी हुई है.
सऊदी अरब और UAE के रिश्तों में भी तनाव बढ़ा
इन घटनाओं ने सऊदी अरब और UAE के रिश्तों में भी तनाव बढ़ा दिया है. दोनों देश 2015 से हूती विद्रोहियों के खिलाफ गठबंधन में शामिल थे, लेकिन अब वे अलग-अलग दक्षिणी गुटों का समर्थन करने लगे हैं. सऊदी अरब और यमन के बीच राजनीतिक तनाव बीते एक दशक से बना हुआ है, लेकिन यूएई समर्थित एसटीसी की हालिया कार्रवाइयों ने रियाद की नाराजगी और बढ़ा दी है. इससे सऊदी अरब और यूएई के रिश्तों में भी खटास आ गई है. मौजूदा हालात में एसटीसी के सामने यमनी सेना है, जिसे हदरमौत ट्राइबल अलायंस का समर्थन हासिल है. दिलचस्प बात यह है कि यमन में चल रहे इस संघर्ष में सऊदी अरब और यूएई अलग-अलग विरोधी गुटों का समर्थन कर रहे हैं.
धमकी के बाद यूएई ने सेना बुलाई वापस
यूएई ने मंगलवार को यमन से अपनी सेनाएं वापस बुला ली थीं, जब सऊदी अरब ने मुकल्ला बंदरगाह पर बमबारी की थी. उस हमले में यूएई से आए एक शिपमेंट को निशाना बनाया गया, जिसमें कथित तौर पर हथियार थे. हालांकि, UAE ने इन आरोपों को खारिज किया और कहा कि उसमें सिर्फ वाहन थे. सऊदी ने यूएई को जगह खाली करने के लिए 24 घंटे का समय दिया था. शुक्रवार को एक अमीराती अधिकारी ने कहा कि UAE अब भी “तनाव कम करने और बातचीत” को ही शांति का रास्ता मानता है.
11 साल से युद्ध की आग में है यमन
यमन 2014 से गृहयुद्ध में है, जब हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था. अब दक्षिणी यमन में इस तरह के आपसी संघर्ष से एक नया मोर्चा खुल सकता है, जिससे हूती विद्रोहियों को उत्तर यमन में अपनी पकड़ और मजबूत करने का मौका मिल सकता है. कुल मिलाकर, एक दशक से गृहयुद्ध झेल रहे यमन की स्थिति और ज्यादा जटिल हो गई है. उत्तर में हूती विद्रोही मजबूत हैं, जबकि दक्षिण में सऊदी और यूएई समर्थित गुट आपस में ही लड़ते नजर आ रहे हैं. यूएई समर्थित अलगाववादी अब खुलकर दक्षिण यमन को अलग देश बनाने की मांग कर रहे हैं, जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है.
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