PMO से जेल तक: क्या जुल्फिकार और नवाज की तरह होगा इमरान खान का हाल? पाकिस्तान का रहा है ऐसा इतिहास
Published by : ArbindKumar Mishra Updated At : 10 May 2023 6:24 PM
इमरान खान (70) को इस्लामाबाद हाईकोर्ट परिसर में मंगलवार को अर्द्धसैनिक बल ने गिरफ्तार कर लिया था. बाद में उन्हें कोर्ट ने 8 दिन की रिमांड पर भेज दिया. खान, प्रधानमंत्री रहने के दौरान तोशाखाना से एक महंगी घड़ी सहित अन्य तोहफे खरीदने और लाभ हासिल करने के लिए उन्हें बेचने के आरोपों का सामना कर रहे हैं.
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को तोशाखाना भ्रष्टाचार मामले में गिरफ्तार कर लिया गया है. कोर्ट ने सुनवाई के बाद इस मामले में इमरान के खिलाफ आरोप तय कर लिया है. इमरान खान को भ्रष्टाचार रोधी कोर्ट ने 8 दिनों के लिए राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो(एनएबी) की रिमांड पर भेज दिया है. इमरान खान की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं. उन्होंने जेल में हत्या की आशंका जतायी है. पाकिस्तान के इतिहास को अगर देखें, तो यह पहली बार नहीं है, जब किसी पूर्व प्रधानमंत्री को जेल की सलाखों के पीछे जाना पड़ा हो. इससे पहले भी कई पूर्व पीएम पर कार्रवाई हो चुकी है.
जुल्फिकार अली भुट्टो
जुल्फिकार अली भुट्टो अगस्त 1973 से जुलाई 1977 तक पाकिस्तान प्रधान मंत्री रहे. उन्हें सितंबर 1977 में 1974 में एक राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी की हत्या की साजिश के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. बाद में लाहौर हाईकोर्ट ने उन्हें रिहा कर दिया. हालांकि मार्शल लॉ रेगुलेशन 12 के तहत उन्हें तीन दिन बाद दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया. बाद में 4 अप्रैल 1979 को उन्हें फांसी की सजा दे दी गई.
बेनजीर भुट्टो
बेनजीर भुट्टो दिसंबर 1988 से अगस्त 1990 तक और अक्टूबर 1993 से नवंबर 1996 तक दो बार पाकिस्तान की प्रधानमंत्री रहीं. अगस्त 1985 में अपने भाई की मृत्यु के बाद, वह पाकिस्तान लौट आईं और उन्हें 90 दिनों की अवधि के लिए नजरबंद कर दिया गया. उन्हें 1986 में स्वतंत्रता दिवस, 1998, 1999 और फिर 2007 में कराची में एक रैली में सरकार की निंदा करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. 1999 में भ्रष्टाचार के आरोप में पांच साल की सजा हुई थी. 2007 में एक आत्मघाती हमले में उनकी हत्या कर दी गयी.
नवाज शरीफ
नवाज शरीफ तीन बार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रहे. हालांकि 1999 कारगिल युद्ध के बाद उन्हें सत्ता गंवानी पड़ी थी. 1999 में जनरल परवेज मुशर्रफ द्वारा निर्वासित किए जाने के बाद, वह पाकिस्तान लौट आए. हालांकि इस्लामाबाद हवाई अड्डे पर पहुंचने पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और निर्वासन के शेष तीन वर्षों को पूरा करने के लिए जेद्दा, सऊदी अरब भेज दिया गया. बाद में नवाज को भ्रष्टाचार के आरोप में 10 साल की जेल की सजा सुनाई गई. दो महीने के कारावास के बाद अदालत द्वारा उनकी सजा को निलंबित कर दिया गया था. 2018 में, सऊदी अरब में स्टील मिलों के स्वामित्व के लिए शरीफ को सात साल की सजा दी गई थी और उन्हें फिर से जेल में डाल दिया गया था. उन्हें नवंबर 2019 में उपचार के लिए देश छोड़ने की अनुमति दी गई थी और तब से वह पाकिस्तान नहीं लौटे.
शाहिद खाकान अब्बासी
शाहिद खाकान अब्बासी, जनवरी 2017 से मई 2018 तक पाकिस्तान के प्रधान मंत्री थे. उन्हें 2013 में भ्रष्टाचार के आरोपों में 19 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था. राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (एनएबी) ने उन्हें 12 सदस्यीय टीम के साथ हिरासत में लिया था. हालांकि, बाद में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया और 27 फरवरी, 2020 को अदियाला जेल से रिहा कर दिया गया.
शहबाज शरीफ
शहबाज शरीफ को भी जेल की हवा खानी पड़ी थी. शहबाज वर्तमान में पाकिस्तान के प्रधान मंत्री हैं. उन्हें 28 सितंबर, 2020 को एनएबी मनी लॉन्ड्रिंग मामले हिरासत में लिया था. उन्हें लगभग सात महीने तक हिरासत में रखा गया था.
इस्लामाबाद कोर्ट के बाहर से इमरान खान गिरफ्तार
इमरान खान (70) को इस्लामाबाद हाईकोर्ट परिसर में मंगलवार को अर्द्धसैनिक बल ने गिरफ्तार कर लिया था. बाद में उन्हें कोर्ट ने 8 दिन की रिमांड पर भेज दिया. खान, प्रधानमंत्री रहने के दौरान तोशाखाना से एक महंगी घड़ी सहित अन्य तोहफे खरीदने और लाभ हासिल करने के लिए उन्हें बेचने के आरोपों का सामना कर रहे हैं. उनके खिलाफ मामला पिछले साल पाकिस्तान निर्वाचन आयोग ने दायर किया था.
क्या है तोशाखाना
दरअसल तोशाखाना की स्थापना 1974 में की गई थी. यह विभाग कैबिनेट डिवीजन के प्रशासनिक नियंत्रण में आता है. शासकों,सांसदों, नौकरशाहों और अधिकारियों को अन्य देशों के शासनाध्यक्षों तथा विदेशी गणमान्य लोगों से मिले महंगे तोहफे तोशाखाना में रखे जाते हैं.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By ArbindKumar Mishra
अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










