Pakistan Violence deaths in 2025: पाकिस्तान में सुरक्षा हालात वर्ष 2025 में गंभीर मोड़ पर पहुंच गए. उग्रवाद, सीमा पार तनाव और आतंकवाद-रोधी अभियानों की तेजी ने देश को पिछले 10 सालों में से भी अधिक समय का सबसे हिंसक साल झेलने पर मजबूर कर दिया. एक स्वतंत्र शोध संस्था की ताजा रिपोर्ट ने इस बढ़ती हिंसा की भयावह तस्वीर सामने रखी है. पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर कॉन्फ्लिक्ट एंड सिक्योरिटी स्टडीज (PICSS) की गुरुवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 पाकिस्तान के लिए पिछले दस वर्षों से भी अधिक समय में सबसे घातक साबित हुआ. इस दौरान संघर्ष से जुड़ी मौतों में 74 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई. रिपोर्ट बताती है कि बीते साल कुल 3,413 लोगों की जान गई, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 1,950 था. इनमें से आधे से अधिक मौतों के लिए उग्रवादी घटनाएं जिम्मेदार रहीं.
रिपोर्ट में कहा गया है कि उग्रवादियों की मौतों में 124 प्रतिशत की तेज़ वृद्धि दर्ज हुई, जिसकी मुख्य वजह तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के खिलाफ तेज किए गए आतंकवाद-रोधी अभियान रहे. टीटीपी अफगान तालिबान से अलग संगठन है, लेकिन हाल के वर्षों में उसने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर हमले तेज कर दिए हैं. अक्टूबर के बाद से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के रिश्तों में भी तनाव बढ़ा है, जब सीमा पर झड़पों में दर्जनों लोगों की मौत हुई और सैकड़ों घायल हुए. इस्लामाबाद का आरोप है कि काबुल पाकिस्तानी उग्रवादियों की सीमा-पार गतिविधियों को अनदेखा कर रहा है, जबकि अफगान तालिबान सरकार इन आरोपों से इनकार करती रही है.
सुरक्षाकर्मियों की मौत में भी हुई बढ़ोतरी
PICSS के प्रबंध निदेशक अब्दुल्ला खान के मुताबिक, मौतों की बढ़ती संख्या के पीछे आत्मघाती हमलों में इजाफा और 2021 में अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी के बाद छोड़े गए सैन्य उपकरणों का उग्रवादी संगठनों के हाथ लगना भी एक बड़ा कारण है. इन हथियारों से टीटीपी और अन्य समूहों की कार्रवाई करने की क्षमता बढ़ी. रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में मारे गए लोगों में 667 सुरक्षा कर्मी शामिल थे, जो पिछले वर्ष की तुलना में 26 प्रतिशत अधिक है. इसे 2011 के बाद का सबसे ऊंचा वार्षिक आंकड़ा बताया गया. वहीं, 580 नागरिकों की मौत दर्ज की गई, जो 2015 के बाद सबसे अधिक है. इसके अलावा, सरकार समर्थक शांति समितियों के 28 सदस्यों की जान भी गई.
इस्लामाबाद स्थित थिंक टैंक ने 2025 में कम से कम 1,066 उग्रवादी हमलों का दस्तावेजीकरण किया. इनमें आत्मघाती हमलों की संख्या 53 प्रतिशत बढ़कर 26 तक पहुंच गई. अधिकांश हमलों की जिम्मेदारी टीटीपी समेत अन्य उग्रवादी संगठनों ने ली. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि सुरक्षा बलों ने वर्ष 2025 में लगभग 500 उग्रवादियों को गिरफ्तार किया, जबकि 2024 में यह संख्या 272 थी.
अफगानों के खिलाफ ऐक्शन के बाद बढ़े हमले
यह रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है, जब कुछ सप्ताह पहले पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने बताया था कि सुरक्षा बलों ने 2025 में 67,023 खुफिया-आधारित अभियान चलाए, जिनमें 1,873 उग्रवादी मारे गए. इनमें 136 अफगान नागरिक भी शामिल थे.
पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर हिंसा में यह बढ़ोतरी 9 अक्टूबर को काबुल में हुए विस्फोटों के बाद और तेज़ हो गई, जिनके लिए अफगान तालिबान ने पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया था. इसी बीच, गुरुवार को बलूचिस्तान के सिबी जिले में सड़क किनारे लगाए गए बम विस्फोट में एक व्यक्ति की मौत हो गई और पांच अन्य घायल हो गए. किसी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली, लेकिन अधिकारियों को संदेह है कि इसके पीछे अलगाववादी उग्रवादी हो सकते हैं.
बॉर्डर हमले के बाद रुका व्यापार
कतर की मध्यस्थता से हुआ युद्धविराम अब तक काफी हद तक कायम है, लेकिन नवंबर में इस्तांबुल में हुई तीन दौर की बातचीत के बावजूद दोनों पक्ष किसी ठोस समझौते पर नहीं पहुंच सके. अक्टूबर से सभी सीमा चौकियां बंद हैं, जिससे व्यापार और आम लोगों की आवाजाही पर गंभीर असर पड़ा है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा कि सीमा चौकियों को दोबारा खोलना इस बात पर निर्भर करेगा कि काबुल लिखित आश्वासन दे कि अफगान जमीन का इस्तेमाल पाकिस्तान में हमलों के लिए नहीं होगा. उन्होंने यह भी बताया कि अफगानिस्तान के लिए मानवीय सहायता लेकर जा रहे संयुक्त राष्ट्र के ट्रक सीमा पर फंसे हुए हैं.
मुनीर ने दी धमकी तो मौलाना ने दी थपकी
दिसंबर में पाकिस्तान के नव नियुक्त सशस्त्र बल प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने अफगान तालिबान सरकार से साफ कहा था कि उसे इस्लामाबाद के साथ संबंध बनाए रखने और पाकिस्तानी तालिबान का समर्थन करने के बीच किसी एक का चयन करना होगा. हालांकि इसके बाद दोनों देशों के प्रभावशाली उलेमाओं (पाकिस्तान से मौलान फजलुर रहमान और अफगानिस्तान से सिराजुद्दीन हक्कानी) के बीच नरमी भरे बयान सामने आए, जिससे हालात कुछ शांत जरूर दिख रहे हैं, लेकिन क्षेत्र में तनाव की चिंगारी अब भी बनी हुई है.
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