आर्मी चीफ मुनीर का इशारा- अब पूरा होगा पाकिस्तान के बनने का असली मकसद; सऊदी के लिए परमाणु हथियार और ट्रंप से मुलाकात को बताया बड़ी कामयाबी

पाक आर्मी चीफ का दावा: 'नेक मकसद' पूरा करने की राह पर पाकिस्तान.
पाकिस्तानी फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के बयान ने देश की सेना और राजनीति की दिशा को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं. मुनीर का पाकिस्तान के बनने के मकसद से क्या मतलब है और सेना को धार्मिक रंग कैसे दिया जा रहा है?
पाकिस्तान के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने सेना को खुलकर धार्मिक रंग देना शुरू कर दिया है. हाल ही में उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अब उस मकसद को पूरा करने के करीब है, जिसके लिए बनाया गया था. यह बयान उन्होंने द न्यूज इंटरनेशनल से बातचीत में दिया. मौका था लाहौर में एक हाई-प्रोफाइल शादी समारोह का. यह रिसेप्शन नवाज शरीफ के पोते और पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज के बेटे जुनैद सफदर का था. इसमें प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, नवाज शरीफ, मरियम नवाज, कई मंत्री, नेता और सेना के बड़े अधिकारी मौजूद थे.
मुनीर ऐसा क्यों कह रहे हैं?
आसिम मुनीर ने कहा कि अल्लाह ने पाकिस्तान को एक ऐतिहासिक मौका दिया है, ताकि वह उस पवित्र मकसद को हासिल कर सके, जिसके लिए देश बना था. उन्होंने साफ कहा कि पाकिस्तान इस्लाम के नाम पर बना और आज इस्लामी देशों में उसकी एक खास पहचान है.
मुनीर के मुताबिक, पाकिस्तान की इंटरनेशनल हैसियत और इकोनॉमिक कंडीशन पहले से बेहतर हुई है और आने वाले समय में उसकी अहमियत और बढ़ेगी. उन्होंने यह भी कहा कि अगर दुनिया में पाकिस्तान को पहचान मिल रही है, तो यह किसी व्यक्ति की नहीं बल्कि पूरे देश की पहचान है और यह सब अल्लाह की मेहरबानी से है.
इस्लामी दुनिया से नजदीकी बढ़ाने की कोशिश
पाकिस्तान लंबे समय से इस्लामी देशों के साथ डिफेंस और इकोनॉमिक रिलेशंस मजबूत करने की कोशिश कर रहा है. हाल में सऊदी अरब के साथ एक डिफेंस डील हुआ है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसमें पाकिस्तान की न्यूक्लियर ताकत को सऊदी सुरक्षा से जोड़ने की बात भी है. तुर्की के साथ भी सऊदी-पाकिस्तान मिलकर एक साझा डिफेंस डील पर बातचीत कर रहे हैं.
मुनीर की बातों को अमेरिका से उनके संपर्कों से भी जोड़ा जा रहा है. हाल ही में उनकी और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात हुई थी. इसी दौरान पाकिस्तान पर गाजा के लिए इंटरनेशनल बल में सैनिक भेजने का दबाव भी बना. वहीं, पाकिस्तान ने अमेरिका को दुर्लभ खनिज (रेअर अर्थ) और तेल भंडार का सपना भी दिखाया, जिनकी पुष्टि अब तक नहीं हुई है.
भारत से टकराव के बाद पाकिस्तान खूब पब्लिसिटी किया
मुनीर लगातार यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि मई 2025 में भारत के साथ हुई चार दिन की झड़प में पाकिस्तान सफल रहा. लेकिन, सच्चाई यह थी कि पाकिस्तानी एयरबेस को भारी नुकसान हुआ और भारत ने उसकी मिलिट्री क्षमताओं की कमजोरियों को एक्सपोज कर दिया. इसके बावजूद, मुनीर देश के अंदर सेना की ताकत और जीत की तस्वीर पेश कर रहे हैं, ताकि घरेलू सपोर्ट बना रहे.
पाकिस्तान का असली मकसद क्या है?
आसिम मुनीर अपने पूर्व सेना प्रमुखों से अलग हैं. पहले के आर्मी चीफ खुद को प्रोफेशनल सैनिक के रूप में दिखाते थे और धर्म व राजनीति से दूरी बनाए रखते थे. मुनीर खुद हाफिज-ए-कुरान हैं और धर्म (Religion)उनकी पहचान का बड़ा हिस्सा है. वह पाकिस्तान के ऐसे पहले अधिकारी हैं, जो मिलिट्री इंटेलिजेंस और ISI दोनों के प्रमुख रह चुके हैं.
उनके लीडिरशिप में सेना खुद को सिर्फ देश की रक्षा करने वाली ताकत नहीं, बल्कि इस्लाम की रक्षा करने वाली ताकत के तौर पर पेश कर रही है. बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में लड़ने वाले समूहों को ‘फितना-ए-ख्वारिज’ और ‘फितना-ए-हिंदुस्तान’ कहा जा रहा है, यानी उन्हें धर्म के दुश्मन और भारत के समर्थक बताया जा रहा है.
टू-नेशन थ्योरी पर जोर
अप्रैल 2025 में इस्लामाबाद में ओवरसीज पाकिस्तानियों को संबोधित करते हुए मुनीर ने कहा था कि पाकिस्तान की बुनियाद टू-नेशन थ्योरी है. उनके मुताबिक, मुसलमान और हिंदू हर पहलू में अलग हैं और एक साथ एक राष्ट्र नहीं हो सकते. उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान की पहचान कलमा से जुड़ी है और इस सोच को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना जरूरी है.
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लेखक के बारे में
By Govind Jee
गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.
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