New York Mayor Zohran Mamdani pens letter to Umar Khalid: न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने सामाजिक कार्यकर्ता उमर खालिद को एक पत्र लिखकर उनके प्रति समर्थन और एकजुटता जताई है. जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के पूर्व छात्र उमर खालिद इस समय दिल्ली दंगों से जुड़े एक मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत तिहाड़ जेल में लगभग 5 साल से बंद हैं. यह हाथ से लिखा नोट दिसंबर 2025 में उस समय लिखा गया था, जब उमर खालिद के माता-पिता अमेरिका यात्रा पर थे और उनकी मुलाकात ममदानी से हुई थी. गुरुवार को यह पत्र ममदानी के मेयर पद की शपथ लेने के दिन, उमर की मित्र बानो ज्योत्सना लाहिड़ी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर साझा किया.
खालिद को संबोधित एक पत्र में ममदानी ने लिखा, “प्रिय उमर, कड़वाहट को लेकर तुम्हारी बातों के बारे में मैं अक्सर सोचता हूं और इस बात के महत्व को भी कि उसे अपने भीतर हावी नहीं होने देना चाहिए. तुम्हारे माता-पिता से मिलकर अच्छा लगा. हम सभी तुम्हारे बारे में सोच रहे हैं.” उन्होंने उमर के माता-पिता साहिबा खानम और सैयद कासिम रसूल इलियास से मुलाकात को याद करते हुए लिखा कि वे सभी उमर के बारे में सोच रहे हैं और उनके साथ खड़े हैं. यह नोट उस समय सौंपा गया था, जब उमर के माता-पिता अपनी छोटी बेटी की शादी से पहले अमेरिका गए थे और वहां अपनी बड़ी बेटी से मिलने के साथ-साथ कई लोगों से मिले, जिनमें ममदानी भी शामिल थे.
5 साल से दिल्ली दंगों से जुड़ी साजिश में बंद हैं खालिद
जेएनयू के पूर्व शोधार्थी उमर खालिद को सितंबर 2020 में उसी वर्ष हुए दिल्ली दंगों से जुड़ी एक बड़ी साजिश में कथित भूमिका के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. हालांकि दिल्ली हाईकोर्ट ने एक एफआईआर में उन्हें आरोपमुक्त कर दिया है, लेकिन UAPA के तहत दर्ज एक अन्य मामले में वह अब भी न्यायिक हिरासत में हैं. पिछले पांच वर्षों में उनकी जमानत याचिकाएं कई बार खारिज की जा चुकी हैं. दिसंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. उमर खालिद सितंबर 2020 से जेल में हैं. 16 से 29 दिसंबर 2025 तक उन्हें अपनी बहन की शादी में शामिल होने के लिए अंतरिम जमानत मिली थी, लेकिन सख्त शर्तों के कारण वे कहीं बाहर नहीं जा सके. इस दौरान उन्होंने परिवार के साथ सीमित समय बिताया, जिसके बाद उन्हें फिर से जेल लौटना पड़ा.
पहले भी चिंता जता चुके हैं ममदानी
34 वर्षीय जोहरान ममदानी पिछले साल 5 नवंबर को न्यूयॉर्क शहर के पहले एशियाई-अमेरिकी और मुस्लिम मेयर बने थे. 1 जनवरी 2026 को उन्होंने न्यूयॉर्क के सबसे पुराने बंद पड़े सबवे में शपथ ली. ममदानी पहले भी सार्वजनिक मंचों पर उमर खालिद के समर्थन में बोल चुके हैं. जून 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा से पहले न्यूयॉर्क में आयोजित ‘Howdy, Democracy?!’ कार्यक्रम के दौरान ममदानी ने उमर खालिद की जेल से लिखी रचनाओं के अंश पढ़कर सुनाए थे. उस समय उन्होंने कहा था कि उमर लगातार खुद को यह समझाने की कोशिश करते हैं कि वे अपनी परिस्थितियों को व्यापक नजरिए से देखें और मन में कड़वाहट न पनपने दें.
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क्या लिखा था पत्र में?
उस समय न्यूयॉर्क स्टेट असेंबली के सदस्य रहे ममदानी ने दर्शकों से कहा था, “मैं उमर खालिद का लिखा एक पत्र पढ़ने जा रहा हूं. वे दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के शोधार्थी और पूर्व छात्र कार्यकर्ता रहे हैं… जिन्होंने लिंचिंग और नफरत के खिलाफ अभियान चलाया. वे गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत 1,000 दिनों से ज्यादा समय से जेल में हैं और अब तक उनका मुकदमा शुरू भी नहीं हुआ है, जबकि उनकी जमानत याचिका बार-बार खारिज की जा चुकी है. उन पर हत्या का एक प्रयास भी हुआ था.”
डेमोक्रेट सोशलिस्ट जोहरान ममदानी राजनीति में तेजी से उभरे
जोहरान ममदानी जमीनी आंदोलनों के जरिए राजनीति में उभरे हैं. न्यूयॉर्क स्टेट असेंबली के सदस्य रहने के बाद उन्होंने इतिहास रचते हुए अमेरिका के सबसे बड़े शहर के पहले मुस्लिम और भारतीय मूल के मेयर के रूप में पद संभाला है. खुद को सोशलिस्ट कहने वाले डेमोक्रेट नेता लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़े अभियानों के जरिए चर्चा में आए थे. मेयर बनने से पहले वे न्यूयॉर्क स्टेट असेंबली के सदस्य के रूप में भी कार्य कर चुके हैं.
अमेरिकी सांसद ने भी जताई चिंता
इस बीच, अमेरिका के कांग्रेस सदस्य जेम्स पी. मैकगवर्न ने 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े मामलों में लंबी विचाराधीन हिरासत पर चिंता जताते हुए भारत के अमेरिका स्थित राजदूत विनय मोहन क्ववात्रा को पत्र लिखा है. उन्होंने कहा कि उमर खालिद और अन्य मुस्लिम अधिकार कार्यकर्ताओं पर हिंसा भड़काने के आरोप लगाए गए, लेकिन कई मानवाधिकार संगठनों और स्वतंत्र जांचों में उन्हें किसी आतंकी गतिविधि से जोड़ने वाला ठोस सबूत नहीं मिला. मैकगवर्न ने यह भी रेखांकित किया कि अंतरराष्ट्रीय नागरिक और राजनीतिक अधिकारों पर संधि (ICCPR) के तहत भारत की जिम्मेदारी है कि किसी भी व्यक्ति को उचित समय के भीतर मुकदमे का अधिकार मिले या उसे रिहा किया जाए, और दोष सिद्ध होने तक उसे निर्दोष माना जाए.
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