इजरायल ने पहली बार विदेशी धरती पर तैनात किया आयरन डोम, ईरान से जंग के बीच ऐसे की UAE की मदद

इजरायली 'आयरन डोम' सिस्टम.
Iron Dome: ईरान के साथ जारी भीषण युद्ध के बीच इजरायल ने यूएई को बचाने के लिए अपनी सबसे बड़ी ताकत 'आयरन डोम' सौंप दी है. रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों के बीच यह खुफिया सैन्य समझौता खाड़ी में बढ़ते मिसाइल हमलों को रोकने के लिए हुआ है. वहीं, डोनाल्ड ट्रंप ने भी अब ईरान को बातचीत का खुला ऑफर दिया है.
Iron Dome: एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल ने इतिहास में पहली बार अपने सबसे भरोसेमंद एयर डिफेंस सिस्टम ‘आयरन डोम’ को विदेशी जमीन पर तैनात किया है. ईरान के साथ जारी युद्ध के दौरान इजरायल ने यूएई (UAE) की मदद के लिए एक आयरन डोम बैटरी और अपने सैन्य जवानों को भेजा. यह कदम तब उठाया गया जब ईरान ने खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और यूएई की खास जगहों पर मिसाइलों और ड्रोन्स से लगातार हमले शुरू कर दिए थे.
PM नेतन्याहू और राष्ट्रपति जायद के बीच हुई बातचीत
यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने जब अपनी जरूरी इमारतों और सैन्य ठिकानों पर खतरा देखा, तो उन्होंने सहयोगियों से तुरंत मदद मांगी. एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने यूएई राष्ट्रपति से फोन पर बात करने के बाद तुरंत अपनी सेना (IDF) को आदेश दिया कि आयरन डोम को इंटरसेप्टर मिसाइलों और कई दर्जन एक्सपर्ट जवानों के साथ यूएई रवाना किया जाए.
क्यों खास है यह तैनाती?
एक सीनियर इजरायली अधिकारी ने बताया कि इजरायल ने पहली बार अपनी आयरन डोम बैटरी को किसी दूसरे देश के लिए इस्तेमाल किया है. अमेरिका और इजरायल के बाद यूएई इस सिस्टम का इस्तेमाल करने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है.
राफेल और इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज द्वारा बनाया गया यह सिस्टम 70 किलोमीटर दूर से आने वाले रॉकेट्स को हवा में ही खत्म कर देता है. इसका सक्सेस रेट 90% से भी ज्यादा है. आयरन डोम एक स्मार्ट डिफेंस सिस्टम है जो दुश्मन की ओर से आने वाली मिसाइलों और रॉकेटों को हवा में ही पहचान कर उन्हें वहीं नष्ट कर देता है.
जंग में इजरायल और यूएई का साथ
28 फरवरी से शुरू हुई इस जंग में इजरायल और यूएई के बीच गहरा तालमेल देखने को मिला है. इजरायल ने न सिर्फ आयरन डोम भेजा, बल्कि दक्षिण ईरान में उन जगहों पर हवाई हमले भी किए जहां से छोटी दूरी की मिसाइलें यूएई और अन्य खाड़ी देशों पर दागी जा सकती थीं. 2020 में हुए अब्राहम समझौते के बाद से दोनों देशों के रिश्ते रक्षा और इंटेलिजेंस के मामले में काफी मजबूत हो गए हैं.
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ईरान को ट्रंप का ऑफर
इसी बीच डोनाल्ड ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा कि अगर ईरान जंग खत्म करना चाहता है, तो वह फोन कॉल के जरिए अमेरिका से बात कर सकता है. हालांकि, ट्रंप ने अपने दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर का पाकिस्तान दौरा यह कहकर रद्द कर दिया कि बिना किसी ठोस प्लान के इतनी दूर जाना सही नहीं है.
दूसरी ओर, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराक्छी पाकिस्तान में बातचीत कर वापस लौट आए हैं. तस्नीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक, ईरान का कहना है कि उनकी बातचीत परमाणु मुद्दे पर नहीं, बल्कि होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) के नए नियमों, मुआवजे और नौसैनिक घेराबंदी हटाने जैसे मुद्दों पर है. वहीं एक तरफ शांति की कोशिशें हो रही हैं, तो दूसरी तरफ लेबनान में भी हालात बिगड़ रहे हैं. तीन हफ्ते के सीजफायर समझौते के बावजूद इजरायल ने दक्षिण लेबनान के कई शहरों को खाली करने का आदेश दिया है. हिजबुल्लाह और इजरायल दोनों ही एक-दूसरे पर समझौते की शर्तों को तोड़ने का आरोप लगा रहे हैं.
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लेखक के बारे में
By Govind Jee
गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.
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