इजरायल ने ईरान के कैस्पियन सागर पोर्ट पर किया हमला, रूस को होने वाली ड्रोन सप्लाई टूटी

एआई से बनाई गई पोर्ट पर हमले की तस्वीर
Israel Attack Iran Caspian Sea Port: इजरायल ने ईरान के कैस्पियन सागर में मौजूद एक बड़े नेवल बेस पर हमला कर दिया है. 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' की रिपोर्ट के मुताबिक, यह हमला उस सप्लाई रूट को निशाना बनाने के लिए किया गया है जिसका इस्तेमाल रूस और ईरान ड्रोन, गोला-बारूद और सैन्य सामान भेजने के लिए करते हैं.
Israel Attack Iran Caspian Sea Port: यह हमला पिछले हफ्ते हुआ और कैस्पियन सागर में इजरायल का यह पहला बड़ा एक्शन माना जा रहा है. कैस्पियन सागर दुनिया की सबसे बड़ी झील है जो रूस और ईरान के बंदरगाहों को जोड़ती है. इनके बीच की दूरी करीब 600 मील (लगभग 965 किलोमीटर) है. यह रास्ता युद्ध के समय में हथियारों के साथ-साथ गेहूं और तेल भेजने का भी बड़ा जरिया बन गया है.
बंदर अंजलि पोर्ट पर भारी तबाही
इजरायली सेना ने बताया कि इस हमले में बंदर अंजलि पोर्ट पर मौजूद कई चीजों को निशाना बनाया गया है. इसमें जंगी जहाज, पोर्ट का ढांचा, कमांड सेंटर और जहाजों को ठीक करने वाला शिपयार्ड शामिल है. रिपोर्ट और ‘स्टोरीफुल’ द्वारा चेक की गई तस्वीरों में पोर्ट पर ईरान के नेवल हेडक्वार्टर और तबाह हुए जहाजों को देखा जा सकता है. हालांकि, पोर्ट को कुल कितना नुकसान हुआ है, यह अभी पूरी तरह साफ नहीं है. इजरायल की नौसेना के पूर्व कमांडर एलीएजर मारुम ने कहा कि इस हमले का सबसे बड़ा मकसद रूस की स्मगलिंग को रोकना और ईरान को यह दिखाना है कि कैस्पियन सागर में उनका डिफेंस सिस्टम काम नहीं कर रहा.
ड्रोन और गोला-बारूद का बड़ा रास्ता
रिपोर्ट के अनुसार, 2022 में यूक्रेन पर हमले के बाद से रूस के लिए कैस्पियन सागर का यह रास्ता बहुत जरूरी हो गया है. 2023 के आंकड़ों के मुताबिक, इस रास्ते से ईरान ने रूस को 3 लाख से ज्यादा आर्टिलरी शेल्स और लगभग 10 लाख राउंड गोला-बारूद भेजा है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि पकड़ में आने से बचने के लिए जहाज अक्सर अपना ट्रैकिंग सिस्टम बंद कर देते हैं. सीएसआईएस की एनालिस्ट मारिया स्नेगोवाया ने बताया कि पिछले साल बंदर अंजलि से होने वाली सप्लाई काफी बढ़ गई है. वहीं, एक्सपर्ट निकोल ग्रेजेवस्की ने बताया कि यह पोर्ट ईरानी ड्रोन के लिए एक मुख्य हब बन चुका है.
खाने-पीने और बिजली की सप्लाई पर असर
इस हमले का असर ईरान की आम जरूरतों पर भी पड़ सकता है क्योंकि इसी रास्ते से गेहूं जैसा जरूरी सामान भी आता है. इसी दौरान इजरायल ने ईरान के ‘साउथ पार्स’ नेचुरल गैस फील्ड पर भी हमला किया था. यह गैस फील्ड बिजली बनाने और खाद उत्पादन के लिए बहुत जरूरी है. पूर्व अमेरिकी अधिकारी एरिक रुडेनशियोल्ड का कहना है कि ड्रोन और अनाज की सप्लाई रुकने से ईरान की हालत पर बुरा असर पड़ सकता है. उधर, रूस के विदेश मंत्रालय ने इस हमले का विरोध करते हुए कहा है कि बंदर अंजलि सिविलियन व्यापार के लिए एक जरूरी जगह है.
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इजरायल और रूस के बीच का समीकरण
इजरायल के लिए रूस को सीधे तौर पर चुनौती देना थोड़ा मुश्किल है क्योंकि सीरिया जैसे इलाकों में दोनों के अपने हित जुड़े हैं. ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल ने इस हमले की जानकारी देते समय रूस का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया ताकि तनाव ज्यादा न बढ़े. एक्सपर्ट्स का मानना है कि रूस और ईरान इस नुकसान के बाद अपना रास्ता या पोर्ट बदल सकते हैं, जिससे सप्लाई कुछ समय के लिए रुक सकती है लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं होगी. 23 मार्च को रूस और ईरान के बीच इस मुद्दे पर लंबी बातचीत भी हुई है.
बुशहर न्यूक्लियर प्लांट पर मंडराता खतरा
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने ईरान के बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट के पास हो रहे हमलों पर गहरी चिंता जताई है. रूस का कहना है कि अगर न्यूक्लियर प्लांट को नुकसान पहुंचा तो यह पूरे इलाके के लिए पर्यावरण की बड़ी तबाही होगी. रूस ने इस पर अपील की है कि मामला बातचीत से सुलझाया जाए. फिलहाल पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीद बहुत कम नजर आ रही है. इस बीच, अमेरिका ने ईरान को 15 पॉइंट्स वाला शांति प्लान तैयार किया है. ट्रंप ने हाल ही में संकेत दिया था कि वह न्यूक्लियर और एनर्जी ठिकानों पर पर हमले रोक सकते हैं, और उन्होंने पांच दिनों के विराम की घोषणा भी की थी.
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लेखक के बारे में
By Govind Jee
गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.
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