काबुल में रूसी दूतावास के बाहर फिदायीन हमले की IS ने ली जिम्मेदारी, दो राजनयिक समेत 20 लोगों ने गंवाई जान
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 06 Sep 2022 9:45 AM
इस्लामिक स्टेट की ओर से टेलीग्राम पर जारी किए गए मैसेज में कहा गया है कि इस धमाके में कुल 25 लोग घायल हुए या मारे जा चुके हैं. मैसेज में यह भी कहा गया है कि धमाके में मरने वालों में कम से कम दो रूसी कर्मचारी भी शामिल थे.
काबुल : अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में रूसी दूतावास के बाहर सोमवार को हुए फिदायीन हमले की इस्लामिक स्टेट ने जिम्मेदारी ली है. इस फिदायीन हमले में रूस के दो राजनयिक समेत करीब 20 लोगों की मौत हो गई है. बीबीसी हिंदी की एक रिपोर्ट के अनुसार, चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट खुरासान ने मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम के जरिए काबुल में रूसी दूतावास के बाहर हुए फिदायीन हमले की जिम्मेदारी ली है. यह हमला उस समय किया गया था, जब रूसी दूतावास के बाहर लोग वीजा बनाने के लिए खड़े थे. इसी वक्त इस्लामिक स्टेट खुरासान के एक लड़ाके ने खुद को बम से उड़ा दिया.
इस्लामिक स्टेट की ओर से टेलीग्राम पर जारी किए गए मैसेज में कहा गया है कि इस धमाके में कुल 25 लोग घायल हुए या मारे जा चुके हैं. मैसेज में यह भी कहा गया है कि धमाके में मरने वालों में कम से कम दो रूसी कर्मचारी भी शामिल थे. हालांकि, इस घटना में हताहतों में कुछ तालिबानी सदस्य भी शामिल हैं, जो रूसी दूतावास के बाहर सुरक्षा के लिए तैनात किए गए थे. बीबीसी की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चरमपंथी संगठन ने फिदायीन हमलावर का नाम वकास अल-मुहाजिर बताया है. इस्लामिक स्टेट खुरासान ने उसकी नकाब पहने तस्वीर भी जारी की है.
बता दें कि सोमवार को अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में रूसी दूतावास के बाहर हुए एक आत्मघाती हमले में दूतावास के दो कर्मचारियों और अफगानिस्तान में एक विदेशी राजनयिक मिशन पर हमले में कम से कम एक अफगान नागरिक की मौत हो गई. रूस की सरकारी समाचार एजेंसी आरआईए नोवोस्ती और विदेश मंत्रालय के अनुसार, विस्फोट दूतावास के कांसुलर सेक्शन के प्रवेश द्वार पर उस समय हुआ, जब एक रूसी राजनयिक वीजा के लिए बाहर कतार में खड़े लोगों के नाम पुकारने के लिए निकल कर आए.
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आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट समूह ने सोमवार की देर रात इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि एक फिदायीन हमलावर ने दूतावास के प्रवेश द्वार पर खुद को विस्फोट कर उड़ा दिया. हालांकि, सोमवार का हमला, तालिबान के सत्ता हथियाने के बाद काबुल में किसी विदेशी राजनयिक मिशन को निशाना बनाने वाली पहली घटना है. इन हमलों में लगातार तालिबान की स्थिति या अल्पसंख्यक समूहों, विशेष रूप से शियाओं की मस्जिदों को निशाना बनाया है. आम तौर पर उन्हें अफगानिस्तान में इस्लामिक स्टेट समूह के सहयोगी पर दोषी ठहराया गया है, जो तालिबान का विरोध करता है और शियाओं से नफरत करता है. हालांकि, यह तुरंत स्पष्ट नहीं हो पाया कि आतंकवादियों ने विशेष रूप से रूसी दूतावास को क्यों निशाना बनाया.
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