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अमेरिकी एक्सपर्ट ने खोली ट्रंप की पोल! ईरान में 150+ लड़कियों की मौत US मिसाइल से ही हुई

Updated at : 09 Mar 2026 4:05 PM (IST)
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Iran War School Was Attacked By Tomahawk Missile Fact Checker refutes Donald Trump.

ईरान में 160 लड़कियां एक साथ दफन की गई थीं. फोटो- एक्स (@@araghchi).

Iran School Tomahawk Missile: ईरान के ऊपर 28 फरवरी को इजरायल-US द्वारा किए गए हमले में 150 से ज्यादा लड़कियां मारी गई थीं. इस मुद्दे पर डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को ही जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की थी, लेकिन अब एक्सपर्ट ने खुलासा किया है कि यह हमला अमेरिका के टॉमहॉक मिसाइल से ही हुआ था.

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Iran School Tomahawk Missile: ईरान के ऊपर 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर हमला किया. शुरुआती कुछ घंटों (लगभग 100) में ही दोनों ने मिलकर 2000 से ज्यादा मिसाइलें बरसाईं, जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई समेत कई शीर्ष नेता मारे गए. इसी हमले के दौरान दक्षिणी ईरान के मिनाब में एक नौसैनिक अड्डे पर भी हमला हुआ था. लेकिन इस अटैक में शजरह तैय्येबेह एलिमेंट्री स्कूल के पास स्थित एक स्कूल भी चपेट में आ गया, जहां कुल 175 लोगों की मौत हुई, जिनमें 150 से अधिक स्कूली लड़कियाँ शामिल थीं. अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस हमले से पल्ला झाड़ने की कोशिश की, लेकिन अब एक वीडियो सामने आया है, जिसमें दिख रहा है कि यह अटैक यूएस टॉमहॉक मिसाइल से किया गया था. 

यह फुटेज ईरान की अर्ध-सरकारी मेहर न्यूज़ एजेंसी द्वारा जारी की गई थी और अखबार द्वारा सत्यापित की गई. रिपोर्ट के अनुसार, वीडियो में 28 फरवरी को मिनाब शहर में एक नौसैनिक सुविधा पर टॉमहॉक मिसाइल गिरते हुए दिखाई देती है. रविवार रात X (ट्विटर) पर एक लंबे चौड़े थ्रेड में पूर्व अमेरिकी सेना के एक्सप्लोसिव ऑर्डनेंस डिस्पोजल तकनीशियन ट्रेवर बेल ने वह फुटेज साझा की. उनके अनुसार पहले कभी सामने नहीं आई थी. 

इसमें मिसाइल को रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े परिसर की एक इमारत पर गिरते हुए दिखाया गया है. बेल के अनुसार, इससे ‘पहली बार यह संकेत मिलता है कि उस क्षेत्र पर अमेरिका ने हमला किया था.’ बेल ने यह भी कहा, ‘इस युद्ध में टॉमहॉक मिसाइल रखने वाला एकमात्र देश अमेरिका है. इजरायल के पास टॉमहॉक मिसाइल होने की जानकारी नहीं है.’ 

वीडियो और सैटेलाइट सबूत मिसाइल की पहचान टॉमहॉक के रूप में

रिपोर्ट के अनुसार, यह वीडियो नौसैनिक अड्डे के सामने स्थित एक निर्माण स्थल से फिल्माया गया था. इसमें एक मिसाइल को उस इमारत पर गिरते हुए दिखाया गया है जिसे IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) की सुविधा के भीतर स्थित एक मेडिकल क्लिनिक बताया गया है. मिसाइल के टकराने के बाद इमारत से धुआँ और मलबा उठता हुआ दिखाई देता है.

जब कैमरा आसपास के क्षेत्र की ओर घूमता है, तो प्राथमिक स्कूल के पास पहले से ही धूल और धुएँ के बड़े बादल दिखाई देते हैं. इससे संकेत मिलता है कि नौसैनिक अड्डे पर मिसाइल गिरने से कुछ समय पहले ही स्कूल पर हमला हो चुका था. अखबार ने बताया कि फुटेज की पुष्टि दृश्य संकेतों की तुलना करके की गई, जैसे कि मिट्टी का रास्ता, घास वाला इलाका और मलबे के ढेर, जिन्हें हमले के बाद ली गई सैटेलाइट तस्वीरों से मिलाया गया.

मेहर न्यूज द्वारा सैटेलाइट तस्वीरों, सोशल मीडिया पोस्ट और अन्य सत्यापित वीडियो का व्यापक विश्लेषण करने के बाद संकेत मिलता है कि इस हमले में नौसैनिक अड्डे के भीतर कई इमारतों को निशाना बनाया गया था.

टॉमहॉक अपनी स्पीड और वारहेड की वजह से खतरनाक

टॉमहॉक क्रूज मिसाइल एक लंबी दूरी का सटीक हथियार है, जिसका इस्तेमाल अमेरिकी सेना करती है. अमेरिकी नौसेना के अनुसार, टॉमहॉक मिसाइल लगभग 1,000 मील (करीब 1,600 किलोमीटर) तक मार कर सकती है और इसमें लगभग 300 पाउंड TNT के बराबर विस्फोटक शक्ति वाला वारहेड होता है.

ट्रंप ने दावे पर जताया था संदेह

ये निष्कर्ष डोनाल्ड ट्रंप की उन टिप्पणियों से मेल नहीं खाते, जिनमें उन्होंने पहले सुझाव दिया था कि स्कूल को नुकसान पहुँचाने वाले हमले के लिए ईरान जिम्मेदार हो सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि ईरानी हथियार बहुत ही कम सटीक होते हैं.  ट्रेवर बॉल और सुरक्षा विश्लेषक क्रिस कॉब-स्मिथ सहित विशेषज्ञों ने ईरान के स्कूल में हुए हमले के वीडियो में दिखाई देने वाले हथियार को टॉमहॉक मिसाइल के रूप में पहचाना.

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ट्रेवर बॉल ने दिया प्रूफ

इस बात को स्पष्ट करने के लिए मेहर न्यूज द्वारा जारी वीडियो में उस मिसाइल की तुलना भी दिखाई गई, जिसने IRGC परिसर को निशाना बनाया था. एक अन्य टॉमहॉक मिसाइल के क्लोज-अप से उसका मिलान किया गया. बेल ने बताया कि वीडियो की जियोलोकेशन की जा चुकी है, यानी डिजिटल जानकारी के आधार पर उसकी सटीक लोकेशन की पुष्टि हो चुकी है. 

अपने थ्रेड में बेल ने IRGC परिसर की सैटेलाइट तस्वीरें और मिसाइल के प्रभाव क्षेत्र का एक ग्राफिक भी साझा किया. उन्होंने लिखा, ‘तस्वीरों से पता चलता है कि इस लाल शंकु (इम्पैक्ट जोन) के भीतर केवल दो इमारतों को नुकसान हुआ, जिनमें एक क्लिनिक शामिल है. दूसरी संरचना संभवतः मिट्टी से ढका हुआ बंकर है.’

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स्कूल पर हमले को लेकर ईरान की प्रतिक्रिया

ईरान ने इस विस्फोट के लिए अमेरिका और इज़राइल दोनों को जिम्मेदार ठहराया. यह स्कूल एक घिरे हुए परिसर के बिल्कुल पास स्थित है, जिसे नक्शों में गार्ड के ‘सैय्यद अल-शोहदा सांस्कृतिक परिसर’ के रूप में दर्शाया गया है. इस परिसर में एक फार्मेसी, जिम और खेल का मैदान भी शामिल है. वॉशिंगटन स्थित थिंक टैंक अटलांटिक काउंसिल की वरिष्ठ वकील एलिस बेकर ने कहा कि स्कूलों को निशाना बनाना सशस्त्र संघर्ष से संबंधित अंतरराष्ट्रीय कानूनों का स्पष्ट उल्लंघन है.

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Anant Narayan Shukla

लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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