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India Afghanistan Shahtoot Dam: अफगानिस्तान से पानी रोकेगा भारत? पाकिस्तान की नस काटने की तैयारी

Updated at : 16 May 2025 7:56 PM (IST)
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AI Image of India Afghanistan Shahtoot Dam

सांकेतिक फोटो

India Afghanistan Shahtoot Dam: भारत और अफगानिस्तान के बीच शहतूत बांध परियोजना पर बनी सहमति ने पाकिस्तान की चिंताएं बढ़ा दी हैं. काबुल और कुनार नदियों पर बांध निर्माण से पाकिस्तान की जल सुरक्षा प्रभावित हो सकती है, जबकि भारत की रणनीति उसे कूटनीतिक बढ़त देती है.

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India Afghanistan Shahtoot Dam: 15 मई की शाम भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी के बीच हुई टेलीफोन बातचीत ने पाकिस्तान में हलचल मचा दी है. यह संवाद ठीक वैसा ही असर डालता दिख रहा है जैसा कुछ समय पहले भारतीय सैन्य कार्रवाई ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने डाला था. दरअसल, भारत और अफगानिस्तान के बीच दोबारा शुरू हुआ राजनयिक संवाद उस समय सामने आया है जब भारत ने हाल ही में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल समझौते को अस्थायी रूप से निलंबित करने का संकेत दिया है. इससे पहले से ही परेशान पाकिस्तान की चिंता और बढ़ गई है, क्योंकि अब भारत अफगानिस्तान में पानी से जुड़ी परियोजनाओं में सक्रिय रूप से सहयोग बढ़ा रहा है.

सूत्रों के अनुसार, जयशंकर और मुत्ताकी के बीच बातचीत में कई विकास परियोजनाओं को पुनः प्रारंभ करने पर सहमति बनी, जिनमें लालंदर का बहुप्रतीक्षित शहतूत बांध भी शामिल है. यह बांध काबुल नदी पर बनना प्रस्तावित है और अफगानिस्तान की राजधानी समेत लगभग 20 लाख लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराएगा. इस परियोजना के तहत भारत 236 मिलियन डॉलर की आर्थिक और तकनीकी सहायता देगा. इसके अलावा, यह बांध करीब 4,000 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई में भी सहायक होगा. वर्ष 2021 में भारत और अफगानिस्तान के बीच इस परियोजना को लेकर समझौता हुआ था, लेकिन काबुल में तालिबान के सत्ता में आने के बाद इसे रोक दिया गया था. अब भारत द्वारा काबुल में भेजी गई राजनयिक टीम के दौरे से इस परियोजना को गति मिलने की उम्मीद जगी है.

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पाकिस्तान की चिंता की एक बड़ी वजह यह है कि काबुल नदी सिंधु बेसिन का हिस्सा है और हिंदूकुश पर्वतों से निकलकर खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में प्रवेश करती है. इस नदी पर यदि बांध बनता है, तो पाकिस्तान की जल आपूर्ति पर असर पड़ सकता है, खासकर तब जब अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच किसी जल संधि का अस्तित्व ही नहीं है. ऐसे में अफगानिस्तान को भारत समर्थित इस परियोजना के लिए पाकिस्तान की अनुमति की आवश्यकता नहीं है.

पाकिस्तान को यह डर और बढ़ गया है जब तालिबान सरकार ने कुनार नदी पर एक और जलविद्युत परियोजना शुरू करने की घोषणा की. यह नदी भी पाकिस्तान में प्रवेश करने से पहले काबुल नदी में मिलती है और सिंधु बेसिन का हिस्सा है. अफगानिस्तान और पाकिस्तान कुल 9 साझा नदी बेसिन में बंधे हुए हैं, जिनमें से अधिकांश पाकिस्तान की जल सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं.

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भारत की यह रणनीति सिंधु जल समझौते को स्थगित करना, अफगानिस्तान की परियोजनाओं में सहयोग देना और तालिबान सरकार के साथ संवाद बनाना जानकारों के अनुसार पाकिस्तान के लिए एक भू-राजनीतिक मास्टरस्ट्रोक साबित हो सकती है. पाकिस्तान पहले से ही अफगानिस्तान के साथ सीमा, शरणार्थियों और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) को लेकर तनाव झेल रहा है. भारत की यह पहल पाकिस्तान को कूटनीतिक रूप से अलग-थलग करने और उसके जल संसाधनों पर दबाव बनाने की एक बड़ी चाल मानी जा रही है. इस पूरे घटनाक्रम ने दक्षिण एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति को एक नया मोड़ दे दिया है, जिसमें भारत की भूमिका निर्णायक और रणनीतिक रूप से अत्यंत प्रभावशाली बनती जा रही है.

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Aman Kumar Pandey

लेखक के बारे में

By Aman Kumar Pandey

अमन कुमार पाण्डेय डिजिटल पत्रकार हैं। राजनीति, समाज, धर्म पर सुनना, पढ़ना, लिखना पसंद है। क्रिकेट से बहुत लगाव है। इससे पहले राजस्थान पत्रिका के यूपी डेस्क पर बतौर ट्रेनी कंटेंट राइटर के पद अपनी सेवा दे चुके हैं। वर्तमान में प्रभात खबर के नेशनल डेस्क पर कंटेंट राइटर पद पर कार्यरत।

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