भारत या चीन नहीं... पहले विदेश दौरे पर इस इस्लामिक कंट्री में जाएंगे बांग्लादेशी PM तारिक रहमान, जानें क्या है रणनीति?

Published by : Anant Narayan Shukla Updated At : 04 Jun 2026 11:26 AM

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तारिक रहमान. फोटो- एक्स.

Bangladesh PM Tarique Rahman: बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान फरवरी 2026 में सत्ता संभालने के बाद अपनी पहली विदेश यात्रा पर जा रहे हैं. दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने भारत और चीन की बजाय पहले मलेशिया को चुना है. इसके पीछे की रणनीति और चीन दौरे का महत्व क्या है और भारत पर इसका क्या असर पड़ सकता है.

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Bangladesh PM Tarique Rahman: बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान अपनी पहली विदेश यात्रा को लेकर चर्चा में हैं. फरवरी 2026 में सत्ता संभालने के बाद वह पहली बार किसी विदेशी दौरे पर जा रहे हैं, लेकिन उनकी पहली मंजिल न तो भारत है और न ही चीन. इसके बजाय उन्होंने पहले मलेशिया जाने का फैसला किया है. इसके बाद वह चीन का दौरा करेंगे. दक्षिण एशिया की बदलती कूटनीति के बीच इस फैसले को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

मई 2026 में बांग्लादेशी मीडिया में खबरें आई थीं कि तारिक रहमान अपनी पहली विदेश यात्रा के तहत सीधे चीन जा सकते हैं. लेकिन बाद में ढाका ने रणनीति बदलते हुए 21-22 जून को मलेशिया और उसके बाद 23 जून से चीन यात्रा का कार्यक्रम तय किया.

बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सरकार ने पहली विदेश यात्रा के डेस्टिनेशन को लेकर काफी सावधानी बरती. भारत और चीन के बीच बांग्लादेश सरकार किसी एक पक्ष के ज्यादा करीब दिखना नहीं चाहती थी. तारिक रहमान की सरकार के इस फैसले को उसकी नई विदेश नीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बीएनपी सरकार ‘बांग्लादेश फर्स्ट’ नीति को आगे बढ़ाना चाहती है. इसी वजह से नई दिल्ली या बीजिंग के बजाय किसी तीसरे देश को प्राथमिकता दी गई. 

क्यों चुना गया मलेशिया?

मलेशिया को पहली मंजिल बनाना एक सोची-समझी कूटनीतिक रणनीति का मानी जा रही है. इससे बांग्लादेश बिना किसी बड़े जियो-पॉलिटिकल संदेश के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को सक्रिय कर सकता है. मलेशिया एक मुस्लिम बहुल देश है और बांग्लादेश के साथ उसके मजबूत सामाजिक और आर्थिक संबंध हैं. ऐसे में यह दौरा अपेक्षाकृत कम विवादास्पद माना जा रहा है. प्रथम आलो की रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआती चर्चाओं में भूटान और सऊदी अरब के नाम भी शामिल थे, लेकिन अंततः मलेशिया को प्राथमिकता दी गई.

भारत ने सत्ता संभालते ही बढ़ाया था दोस्ती का हाथ

फरवरी 2026 में जब तारिक रहमान ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी, तब भारत ने नई सरकार के साथ संबंध मजबूत करने का संकेत दिया था. उनके शपथ ग्रहण समारोह में भारत की ओर से लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला शामिल हुए थे. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पत्र भी सौंपा था, जिसमें तारिक रहमान और उनके परिवार को भारत आने का निमंत्रण दिया गया था.

इसे नई दिल्ली की ओर से बांग्लादेश के साथ रिश्तों को नए सिरे से मजबूत करने की कोशिश माना गया था. विशेष रूप से उस दौर के बाद, जब मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान दोनों देशों के संबंधों में भारी तनाव देखने को मिला था.

मलेशिया दौरे में किन मुद्दों पर होगी चर्चा?

मलेशिया में इस समय आठ लाख से अधिक बांग्लादेशी प्रवासी काम कर रहे हैं. वहीं 11 हजार से ज्यादा बांग्लादेशी छात्र वहां पढ़ाई कर रहे हैं. चीनी छात्रों के बाद यह दूसरा सबसे बड़ा विदेशी छात्र समूह माना जाता है. मलेशिया यात्रा के दौरान कई जनहित और आर्थिक मुद्दे एजेंडे में रहने की संभावना है. इनमें शामिल हैं:

  • बांग्लादेशी प्रवासी श्रमिकों का कल्याण
  • शिक्षा क्षेत्र में सहयोग
  • व्यापार और निवेश बढ़ाना
  • रोजगार और कौशल विकास

चीन दौरा क्यों है ज्यादा महत्वपूर्ण?

मलेशिया के बाद तारिक रहमान का चीन दौरा कहीं अधिक रणनीतिक महत्व रखता है. चीन बांग्लादेश का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदारों में से एक है. बांग्लादेश हर साल करीब 25 अरब डॉलर का सामान चीन से आयात करता है.

हालांकि, अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन और उसके बाद पैदा हुई राजनीतिक अस्थिरता के चलते चीन की कई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निवेश की रफ्तार धीमी पड़ गई थी. अब माना जा रहा है कि तारिक रहमान की यात्रा से लंबित परियोजनाओं, वित्तपोषण और नए निवेशों पर बातचीत को गति मिल सकती है.

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तीस्ता परियोजना भी बन सकती है बड़ा मुद्दा

रिपोर्टों के अनुसार, चीन यात्रा के दौरान तीस्ता नदी प्रबंधन परियोजना पर भी चर्चा हो सकती है. रिपोर्ट्स के अनुसार, विदेश मंत्री खलीलुर रहमान की हालिया चीन यात्रा के दौरान बांग्लादेश ने इस परियोजना के लिए चीनी सहयोग मांगा था. हालांकि, भारत भी इस विषय से प्रभावित होता है, क्योंकि भारतीय सीमा के नजदीक, चिकेन नेक के पास चीन को किसी प्रोजेक्ट में शामिल करना इंडिया की सुरक्षा के लिहाज से कतई अच्छा नहीं होगा.

तीस्ता मुद्दा पिछले कुछ समय में बांग्लादेश के भीतर भी राजनीतिक और जनभावनाओं से जुड़ा विषय बन गया है. अक्टूबर 2025 में चटगांव विश्वविद्यालय में छात्रों ने तीस्ता मास्टर प्लान को जल्द लागू करने और बांग्लादेश को नदी के जल में ‘उचित हिस्सेदारी’ दिलाने की मांग को लेकर प्रदर्शन भी किया था. तारिक रहमान सरकार इस मुद्दे पर सोच समझकर कदम रखना चाहेगी.

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Anant Narayan Shukla

लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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