सीरिया के पूर्व राष्ट्रपति बशर को मौत की सजा, युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराधों में दोषी

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सीरिया के पूर्व राष्ट्रपति बशर अल असद. फोटो- एक्स.

सीरिया के पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद को दमिश्क की अदालत ने युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी मानते हुए मौत की सजा सुनाई है. यह फैसला दिसंबर 2024 में असद सरकार के पतन के बाद लिया गया है.

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सीरिया के पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद को दमिश्क की एक आपराधिक अदालत ने मौत की सजा सुनाई है. अदालत ने उन्हें देश में चले लंबे गृहयुद्ध के दौरान हुए युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी माना. दिसंबर 2024 में असद सरकार के पतन और उनके रूस भाग जाने के बाद यह मौत की सजा दी गई है. इस फैसले को सीरिया में सत्ता परिवर्तन के बाद पूर्व शासन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के बड़े कदम के तौर पर देखा जा रहा है.

24 साल तक सीरिया पर किया शासन

बशर अल-असद ने वर्ष 2000 में अपने पिता हाफिज अल-असद के निधन के बाद सीरिया की सत्ता संभाली थी. उनके पिता करीब तीन दशक तक देश के राष्ट्रपति रहे थे. बशर अल-असद ने करीब 24 वर्षों तक देश पर शासन किया.

लेकिन दिसंबर 2024 में इस्लामवादी नेतृत्व वाले विद्रोही गुटों के दमिश्क की ओर बढ़ने के बाद उनकी सरकार गिर गई. इसके बाद असद अपने परिवार के साथ रूस चले गए. सत्ता परिवर्तन के बाद अहमद अल-शरा के नेतृत्व में संक्रमणकालीन सरकार का गठन हुआ.

असद के भाईयों को भी मौत की सजा

अदालत ने असद के भाई माहेर अल असद और उनके चचेरे भाई और दक्षिणी प्रांत दारा में राजनीतिक सुरक्षा निदेशालय के पूर्व प्रमुख आतिफ नजीब को भी मृत्युदंड सुनाया है. नजीब अदालत में मौजूद होकर मुकदमे का सामना कर रहे थे. उन्हें जानबूझकर हत्या और यातना देने का दोषी पाया गया.

2011 में शुरू हुआ था सीरियाई गृहयुद्ध

सीरिया में गृहयुद्ध की शुरुआत 2011 में दारा शहर से हुई थी. सरकार विरोधी प्रदर्शनों को सुरक्षा बलों ने बलपूर्वक दबाने की कोशिश की, जिसके बाद आंदोलन पूरे देश में फैल गया. आगे चलकर यह संघर्ष सरकार, सशस्त्र विद्रोही समूहों और विदेशी शक्तियों के बीच बड़े युद्ध में बदल गया. इस संघर्ष में लाखों लोगों की मौत हुई और बड़ी संख्या में लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा.

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असद सरकार पर गंभीर आरोप

गृहयुद्ध के दौरान असद सरकार पर आम नागरिकों की हत्या, यातना, जबरन गायब करने, मनमानी गिरफ्तारी और रिहायशी इलाकों पर हमले जैसे गंभीर आरोप लगे. संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने सरकारी बलों के साथ-साथ अन्य सशस्त्र गुटों द्वारा किए गए कथित उल्लंघनों को भी दर्ज किया.

असद सरकार पर रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल का आरोप भी लगा. रासायनिक हथियार निषेध संगठन (OPCW) और संयुक्त राष्ट्र से जुड़े जांच तंत्रों ने कई हमलों के लिए सीरियाई सरकारी बलों को जिम्मेदार ठहराया.

पूर्व शासन के खिलाफ जारी है कानूनी कार्रवाई

अंतरराष्ट्रीय जांच में सीरिया की जेलों में यातना और हिरासत के दौरान लोगों की मौत के मामले भी सामने आए. यूरोप की कुछ अदालतों में असद सरकार से जुड़े पूर्व सुरक्षा अधिकारियों पर भी कथित मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर मुकदमे चल चुके हैं.

मौत की सजा ऐसे समय आई है जब सीरिया की संक्रमणकालीन सरकार पूर्व शासन के अधिकारियों और सुरक्षा तंत्र से जुड़े लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ा रही है. कुछ आरोपी अदालत में पेश हो रहे हैं, जबकि बशर अल-असद जैसे कुछ लोगों का मुकदमा उनकी गैरमौजूदगी में चलाया जा रहा है.

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अनन्त नारायण शुक्ल

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By अनन्त नारायण शुक्ल

अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. अनन्त राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर खबरें करते हैं. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यमात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं.

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अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने झारखंड विधान सभा 2024, दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 चुनाव और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है.

अनन्त कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं.

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

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