पहले ईरान को बर्बाद किया, अब उसी से हर्जाना मांग रहे ट्रंप, 50 साल के नुकसान और 52 हजार मौतों का मांगा हिसाब
ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप. फोटो- एक्स.
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर पलटवार किया है. ईरान की हर्जाने की मांग पर ट्रंप ने 50 साल के नुकसान और 52 हजार मौतों का हिसाब मांगा है. उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी नौसेना के 100% नियंत्रण का भी दावा किया.
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान के खिलाफ अपना रुख और सख्त कर दिया है. ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान अमेरिका से सैन्य कार्रवाई के दौरान हुए नुकसान का मुआवजा मांगता है, तो उसे भी पिछले 50 वर्षों में हुए नुकसान और जान-माल की क्षति के लिए भुगतान करना होगा. इसी के साथ ट्रंप ने दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिकी नौसेना का फिलहाल 100 प्रतिशत नियंत्रण है.
ईरान से मुआवजे की मांग करेगा अमेरिका
ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान, ईरान के साथ आगे की बातचीत को लेकर पूछे गए सवाल पर ट्रंप ने कहा कि तेहरान ने अमेरिका से सैन्य कार्रवाई के दौरान हुए नुकसान के लिए आर्थिक मुआवजे की मांग की है. ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान को मुआवजा मांगने का अधिकार लगता है, तो अमेरिका भी उससे पिछले पांच दशकों में हुए नुकसान का हिसाब मांग सकता है. उनका कहना था कि अगर नुकसान की भरपाई की बात हो रही है, तो ईरान को भी उन नुकसान के लिए भुगतान करना चाहिए, जिनका आरोप अमेरिका उस पर लगा रहा है.
होर्मुज पर अमेरिकी नौसेना का दबदबा
ट्रंप ने आगे कहा कि इस समय होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका का पूरा नियंत्रण है. उन्होंने अमेरिकी नौसेना की ओर से लगाए गए समुद्री अवरोध को बेहद मजबूत बताते हुए कहा कि यह एक ‘स्टील की दीवार’ की तरह काम कर रहा है.
ट्रंप के अनुसार, अमेरिका केवल उन्हीं जहाजों को जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दे रहा है, जिन्हें वह जाने देना चाहता है. उन्होंने दावा किया कि जिन जहाजों को अनुमति दी जा रही है, वे वहां से बाहर निकल भी रहे हैं, जबकि ईरान की ओर जाने वाले जहाजों को प्रवेश की इजाजत नहीं दी जा रही.
ट्रंप ने ईरान के खिलाफ पुराने हमलों का भी किया जिक्र
इससे पहले ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर ईरान की मुआवजे की मांग को खारिज करते हुए कहा था कि अमेरिका नहीं, बल्कि उल्टा तेहरान को ही अपने कथित हमलों और उनसे हुई मौतों के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए.
ट्रंप ने दावा किया कि ईरानी प्रतिनिधि हाल के पांच महीने के सैन्य संघर्ष में हुए नुकसान की भरपाई मांग रहे हैं. उनके अनुसार, यह संघर्ष तब शुरू हुआ जब ईरान ने अपने परमाणु हथियारों से जुड़ी महत्वाकांक्षाओं को छोड़ने से इनकार किया.
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USS Cole हमले से लेकर सोलेमानी तक का जिक्र
अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपनी जवाबी मांग में ईरान से जुड़े पुराने घटनाक्रमों का भी उल्लेख किया. उन्होंने वर्ष 2000 में अमेरिकी वॉरशिप यूएसएस कोल पर हुए हमले सहित हुई कई अन्य घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि इनमें मारे गए और गंभीर रूप से घायल लोगों के लिए भी ईरान को मुआवजा देना चाहिए.
ट्रंप ने ईरान के दिवंगत सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि ईरान के नेतृत्व की नीतियों से जुड़े संघर्षों में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई.
प्रदर्शनकारियों के परिवारों के लिए भी मुआवजे की मांग
ट्रंप ने अपनी मांग का दायरा और बढ़ाते हुए ईरान में पिछले पांच दशकों के दौरान सरकार विरोधी प्रदर्शनों में मारे गए लोगों के परिवारों के लिए भी मुआवजे की बात कही. उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले पांच महीनों के दौरान 52 हजार लोगों की मौत हुई है. हालांकि, ये आंकड़े और ट्रंप के आरोप उनके अपने बयानों पर आधारित हैं और इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
भविष्य की बातचीत में रखी जाएगी शर्त
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने अपने प्रतिनिधियों को निर्देश दिया है कि ईरान के साथ होने वाली भविष्य की सभी कूटनीतिक बातचीत में मुआवजे की यह मांग स्पष्ट रूप से शामिल की जाए. ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई, अमेरिकी प्रतिबंध हटाने और समुद्री नाकाबंदी खत्म करने जैसी शर्तों को जोड़े जाने के बाद अमेरिका की यह जवाबी मांग सामने आई है. इससे दोनों देशों के बीच संभावित बातचीत और अधिक जटिल होती दिखाई दे रही है.
अमेरिका के कितने लोग अब तक मारे गए
1979 में इस्लामिक क्रांति के बाद से ईरान और अमेरिका के बीच तकरार का दौर शुरू है. अमेरिकी सरकार का आरोप है कि ईरान समर्थित आतंकी संगठनों की गतिविधियों के कारण पिछले कई सालों में बड़ी संख्या में अमेरिकी नागरिकों और सैन्यकर्मियों की जान गई या वे घायल हुए.
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, इनमें 1983 में बेरूत स्थित अमेरिकी मरीन कैंप पर हुआ बम हमला भी शामिल है, जिसमें 241 अमेरिकी सैनिक मारे गए थे. इसके अलावा, 2003 से 2011 के बीच इराक में कम से कम 603 अमेरिकी सैनिकों की मौत के लिए भी ईरान समर्थित समूहों को जिम्मेदार ठहराया गया है. 2026 के इस संघर्ष में जहां ईरान में 3400 से ज्यादा नागरिक और सैनिक मारे गए हैं, वहीं अमेरिका के भी लगभग 18 सैनिक मारे गए हैं.
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By अनंत नारायण शुक्ला
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