कोलंबिया में भूकंप से मरने वालों की संख्या बढ़कर 132 हुई, शोध में सामने आईं इमारतों के ढहने की वजहें
भूकंप से ढह गई इमारत, फोटो एक्स
कोलंबिया के चोको प्रांत में सैन जोस डेल पालमार के पास आए शक्तिशाली भूकंप में अब तक 132 लोगों की मौत हो चुकी है. मृतकों की संख्या में इजाफा हो सकता है. भूकंप की वजह से हजारों मकानों के ढहने या क्षतिग्रस्त होने की खबर है. भूकंप से काली, मैनिजालेस और पेरेइरा शहरों में भारी नुकसान हुआ है.
अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण (यूएसजीएस) के अनुसार, 7.4 तीव्रता का यह भूकंप मुख्य रूप से स्ट्राइक-स्लिप भ्रंश (फॉल्ट) के कारण आया. सरल शब्दों में, इस तरह के भूकंप में धरती की पपड़ी के दो हिस्से एक-दूसरे के ऊपर या नीचे जाने के बजाय क्षैतिज दिशा में खिसकते हैं और आपस में टकरा जाते हैं.
लातिन अमरीकी देशों में कंक्रीट की पतली दीवारें बढ़ा रहीं भूकंपीय खतरा, शोध में हुआ खुलासा
कोलंबिया सहित लातिन अमेरिका के कई देशों में इमारतों के निर्माण में अपनाई जा रही तकनीक बड़े भूकंप के लिहाज से बेहद खतरनाक साबित हो सकती है. शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि इन इमारतों में इस्तेमाल होने वाली कंक्रीट की पतली दीवारें और इस्पात की कमी किसी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती हैं.
स्विट्जरलैंड स्थित अर्थक्वेक इंजीनियरिंग एंड स्ट्रक्चरल डायनेमिक्स प्रयोगशाला (EESD) में कोलंबिया की निर्माण शैली पर किए गए परीक्षणों में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं.
- पतली दीवारें और कमजोर जाली: इमारतों में कंक्रीट की दीवारें केवल 7 से 10 सेंटीमीटर पतली हैं, जिनमें इस्पात (स्टील) की केवल एक परत या वेल्डेड वायर जाली का इस्तेमाल किया जाता है, जो दबाव में तुरंत टूट सकती है.
- दरारें और दबाव: भूकंप के समय मजबूत इमारतों में दबाव बांटने के लिए कई छोटी दरारें बनती हैं. हालांकि, कम इस्पात वाली इन पतली दीवारों में एक ही बड़ी दरार बन जाती है, जिससे सारा दबाव एक जगह केंद्रित होकर दीवार और इमारत को धराशायी कर सकता है.
- अतिरिक्त सुरक्षा का अभाव: कम मोटाई होने के कारण इन दीवारों में अतिरिक्त मजबूती देने वाली संरचनाएं लगाना संभव नहीं हो पाता, और स्थानीय निर्माण मानकों में भी इसे अनिवार्य नहीं किया गया है.
कोलंबिया के काली शहर में 2018 के सर्वेक्षण के अनुसार, 90 प्रतिशत इमारतों में केवल एक परत वाली इस्पात की दीवारें थीं और 30 प्रतिशत की मोटाई 100 मिलीमीटर या उससे कम पाई गई. विशेषज्ञ इसे पूरे लातिन अमरीकी क्षेत्र के लिए एक गंभीर सुरक्षा संकट मान रहे हैं.
क्राइस्टचर्च आपदा से सीख
न्यूजीलैंड के 2011 क्राइस्टचर्च भूकंप के बाद से ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में पुरानी कंक्रीट इमारतों की मजबूती को लेकर चिंताएं गहरा गई हैं. हालिया अंतरराष्ट्रीय शोध से संकेत मिलते हैं कि पतली दीवारों और कम इस्पात वाली इमारतें शक्तिशाली भूकंपीय झटकों को झेलने में सक्षम नहीं हैं.
2011 में क्राइस्टचर्च में आए 6.3 तीव्रता के भूकंप में 'पाइन गोल्ड' भवन ढहने से भारी तबाही हुई थी. जांच में पाया गया कि इसकी वजह पतली कंक्रीट दीवारें और इस्पात की कम मात्रा थी, जिससे दबाव एक ही दरार पर केंद्रित हो गया था.
- नियमों में सुधार: क्राइस्टचर्च हादसे के बाद न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया (2018 में) ने अपने निर्माण मानकों में बदलाव किए और दीवारों में इस्पात के सही इस्तेमाल को अनिवार्य बनाया.
- पुराने भवनों पर खतरा: मानकों में बदलाव से पहले ऑस्ट्रेलिया में भी पतली दीवारों और कम इस्पात वाली निर्माण शैली को अनुमति थी. परीक्षणों से पता चला है कि ये पुरानी इमारतें भी भूकंप के दौरान कोलंबिया की कमजोर इमारतों की तरह ही ढह सकती हैं.
- सुरक्षा की जरूरत: शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि ऑस्ट्रेलिया भूकंपीय खतरों से पूरी तरह मुक्त नहीं है. ऐसे में 2018 से पहले बने कमजोर कंक्रीट भवनों की पहचान कर उन्हें री-इंजीनियर करना बेहद आवश्यक हो गया है.
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By अरबिंद कुमार मिश्रा
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खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:
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अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.
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पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.
शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)
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बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.
एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.
लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.
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