EU-Mercosur Trade Deal: करीब 25 साल तक चली लंबी और जटिल बातचीत के बाद आखिरकार मर्कोसुर-यूरोपीय संघ (EU) मुक्त व्यापार समझौता अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है. यह समझौता दक्षिण अमेरिकी व्यापारिक समूह मर्कोसुर जिसमें ब्राजील, अर्जेंटीना, उरुग्वे और पैराग्वे जैसे देश शामिल हैं और यूरोपीय संघ के बीच आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है. समझौते का लक्ष्य दोनों क्षेत्रों के बीच व्यापार बाधाओं को कम करना, आयात शुल्क घटाना और निवेश व निर्यात के नए अवसर पैदा करना है. इससे खास तौर पर कृषि, ऑटोमोबाइल, मशीनरी और औद्योगिक क्षेत्रों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है, वहीं महत्वपूर्ण कच्चे खनिजों तक पहुंच भी आसान होगी. हालांकि, इस समझौते को लेकर विरोध भी सामने आया है. फ्रांस समेत कई यूरोपीय देशों के किसान आशंकित हैं कि सस्ते कृषि उत्पादों के आयात से उनकी आजीविका प्रभावित होगी.
इस फैसले के बाद अब यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के लिए मर्कोसुर के सदस्य देशों के साथ औपचारिक रूप से समझौते पर हस्ताक्षर करने का रास्ता खुल गया है. अर्जेंटीना के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, यह हस्ताक्षर समारोह 17 जनवरी को असुन्सियोन में आयोजित किया जाएगा. ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने मर्कोसुर-यूरोपीय संघ साझेदारी समझौते को मंजूरी मिलने पर खुशी जताई है. उन्होंने इसे बहुपक्षीय व्यवस्था के लिहाज से एक ऐतिहासिक क्षण बताया, क्योंकि लंबे समय से अटके इस समझौते को अब यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के आवश्यक बहुमत का समर्थन मिल गया है.
ब्राजील को क्या फायदा होगा, लूला क्या बोले?
सोशल मीडिया एक्स पर उन्होंने लिखा कि बढ़ते संरक्षणवाद और एकतरफा नीतियों के दौर में यह समझौता अंतरराष्ट्रीय व्यापार को आर्थिक विकास का माध्यम मानने का स्पष्ट संदेश देता है, जिससे दोनों पक्षों को लाभ पहुंचेगा. उन्होंने इसे दुनिया के सबसे बड़े मुक्त व्यापार समझौतों में से एक करार देते हुए कहा कि यह दो ऐसे आर्थिक समूहों को जोड़ता है, जिनकी संयुक्त आबादी लगभग 71.8 करोड़ है और कुल सकल घरेलू उत्पाद करीब 22.4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर है.
ब्राजील 247 के अनुसार, यह निर्णय दुनिया की सबसे जटिल और महत्वाकांक्षी व्यापार वार्ताओं में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है. अधिकांश यूरोपीय देशों की सहमति से तय हुआ यह समझौता दोनों क्षेत्रों के बीच व्यापारिक रिश्तों को नई दिशा देने वाला है. रॉयटर्स के हवाले से बताए गए अध्ययनों में कहा गया है कि लंबे समय में इससे ब्राजील के एग्रीबिजनेस उत्पादन में लगभग 2 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है. खास तौर पर पशुपालन, पोल्ट्री, सूअर पालन, वनस्पति तेल और वसा जैसे क्षेत्रों को इसका सबसे अधिक लाभ मिलने की संभावना है.
ट्रंप ने मचाया है हड़कंप, जर्मनी खुश
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीतियों से वैश्विक बाजार में मची हलचल के बीच यूरोपीय आयोग और जर्मनी-स्पेन जैसे देशों का मानना है कि यह समझौता अमेरिकी आयात शुल्कों से हुए नुकसान की भरपाई में मददगार होगा. साथ ही, महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति सुनिश्चित कर यह चीन पर निर्भरता कम करने का जरिया भी बनेगा. जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने इस फैसले को एक अहम उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह जर्मनी और पूरे यूरोप के हित में है. हालांकि उन्होंने यह भी माना कि 25 साल तक चली बातचीत बहुत लंबी रही और आगे ऐसे मुक्त व्यापार समझौतों को जल्द पूरा किया जाना चाहिए.
इस समझौते के तहत औद्योगिक और कृषि उत्पादों पर चरणबद्ध तरीके से शुल्क घटाने की व्यवस्था की गई है, ताकि दोनों पक्षों के बाजारों की संवेदनशीलताओं का संतुलन बना रहे. इसके अनुसार, मर्कोसुर यूरोपीय संघ से आने वाली करीब 91 प्रतिशत वस्तुओं और ब्राजील के आयात मूल्य के 85 प्रतिशत हिस्से को उदार बनाएगा, जबकि यूरोपीय संघ ब्राजील से आयात होने वाली लगभग 95 प्रतिशत वस्तुओं और 92 प्रतिशत आयात मूल्य पर शुल्क में छूट देगा.
टैरिफ में कटौती के अलावा, समझौते में सतत विकास, सरकारी खरीद, बौद्धिक संपदा अधिकार और नई तकनीकों से जुड़े आधुनिक प्रावधान भी शामिल किए गए हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि संरक्षणवादी नीतियों के बढ़ते चलन के बीच यह समझौता खुले अंतरराष्ट्रीय व्यापार के पक्ष में एक मजबूत संदेश देता है. इससे ब्राज़ील के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा, यूरोपीय निवेश आकर्षित होगा और दोनों क्षेत्रों के बीच व्यापार नियमों को सरल बनाने में मदद मिलेगी.
देशों और किसानों का विरोध और सड़क जाम
दूसरी ओर, फ्रांस के नेतृत्व में कुछ देशों ने इसका विरोध किया. उनका तर्क है कि इस समझौते से गोमांस, पोल्ट्री और चीनी जैसे सस्ते कृषि उत्पादों का आयात बढ़ेगा, जिससे यूरोपीय संघ के किसानों को नुकसान हो सकता है. उल्लेखनीय है कि फ्रांस यूरोपीय संघ का सबसे बड़ा कृषि उत्पादक देश है. शुक्रवार को यूरोपीय संघ के कई हिस्सों में किसानों ने इस समझौते के खिलाफ प्रदर्शन किए. फ्रांस और बेल्जियम में किसानों ने राजमार्गों को जाम कर दिया, जबकि पोलैंड में बड़े पैमाने पर मार्च निकाले गए.
65% देश समझौते पर सहमत
फ्रांस ने इस समझौते के खिलाफ वोट दिया, फिर भी आवश्यक बहुमत मिलने के कारण इसे मंजूरी मिल गई. यूरोपीय संघ के एक राजनयिक और पोलैंड के कृषि मंत्री के अनुसार, 21 देशों ने समझौते का समर्थन किया. ऑस्ट्रिया, फ्रांस, हंगरी, आयरलैंड और पोलैंड ने विरोध किया, जबकि बेल्जियम ने मतदान से दूरी बनाए रखी. मंजूरी के लिए कम से कम 15 देशों का समर्थन जरूरी था, जो संघ की कुल आबादी के 65 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करते हों.
क्या है मर्कोसुर? What is Mercosur?
दक्षिणी साझा बाजार, जिसे स्पेनिश में मर्कोसुर (Mercosur) और पुर्तगाली में मर्कोसुल (Mercosul) कहा जाता है, दक्षिण अमेरिका का एक प्रमुख व्यापारिक संगठन है. इसकी स्थापना 1991 में असुन्सियोन संधि और 1994 में ओरो प्रेटो प्रोटोकॉल के तहत की गई थी. इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच मुक्त व्यापार, आर्थिक एकीकरण और राजनीतिक सहयोग को बढ़ावा देना है. इसका पूरा नाम Southern Common Market है. वर्तमान में इसके पूर्ण सदस्य देश अर्जेंटीना, ब्राजील, पराग्वे, उरुग्वे और बोलीविया हैं. वेनेजुएला भी पूर्ण सदस्य है, लेकिन दिसंबर 2016 से उसे निलंबित कर दिया गया है. वहीं चिली, कोलंबिया, इक्वाडोर, गयाना, पनामा, पेरू और सूरीनाम सहयोगी देश हैं, ये देश बैठकों में हिस्सा ले सकते हैं, लेकिन उन्हें निर्णय लेने का अधिकार नहीं होता. (Who are Mercosur Countries?)
मर्कोसुर की जड़ें 1960 में बने लैटिन अमेरिकी मुक्त व्यापार संघ (LAFTA) और बाद में लैटिन अमेरिकी एकीकरण संघ (ALADI) से जुड़ी हैं. 1980 के दशक में अर्जेंटीना और ब्राज़ील ने क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए अहम पहल की. 1985 की इगुआसू घोषणा और इसके बाद हुए द्विपक्षीय समझौतों ने एक साझा बाजार की नींव रखी. 1988 की एकीकरण, सहयोग और विकास संधि के जरिए दोनों देशों ने साझा बाजार बनाने का लक्ष्य तय किया, जिसमें बाद में पैराग्वे और उरुग्वे भी शामिल हो गए.
मर्कोसुर का महत्व
इन प्रयासों का परिणाम 1991 की असुन्सियोन संधि के रूप में सामने आया, जिसने मर्कोसुर को औपचारिक रूप से जन्म दिया. शुरुआत में यह एक मुक्त व्यापार क्षेत्र था, जहां सदस्य देश आपसी आयात पर शुल्क नहीं लगाते थे. 1 जनवरी 1995 से यह एक कस्टम्स यूनियन बन गया, जिसमें बाहरी देशों के लिए साझा बाहरी शुल्क व्यवस्था लागू की गई. मर्कोसुर दक्षिण अमेरिका में व्यापार बढ़ाने, आयात शुल्क घटाने, साझा बाहरी टैरिफ लागू करने और वैश्विक मंच पर सामूहिक आर्थिक ताकत मजबूत करने में अहम भूमिका निभाता है.
मर्कोसुर का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच वस्तुओं, सेवाओं, लोगों और पूंजी की मुक्त आवाजाही को बढ़ावा देना है. व्यापार के साथ-साथ यह क्षेत्रीय एकीकरण, श्रम आवागमन और साझा नीतियों पर भी जोर देता है. 2023 में मर्कोसुर की संयुक्त अर्थव्यवस्था लगभग 5.7 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर आंकी गई, जिससे यह दुनिया के सबसे बड़े आर्थिक ब्लॉकों में शामिल हो गया है. यह यूरोपीय संघ, चीन और अन्य वैश्विक साझेदारों के साथ व्यापार समझौतों के जरिए क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा देता है.
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