रूस में बांग्लादेशियों के साथ धोखा, गार्ड बोलकर यूक्रेन मोर्चे पर किया तैनात, सैकड़ों गए; लौटे बस तीन

यूक्रेन के मोर्चे पर बांग्लादेशियों से जबरदस्ती काम करवाया गया.
Bangladeshi Trapped in Russia: बांग्लादेश से नौकरी की तलाश में रूस गए, लेकिन उन्हें यूक्रेन युद्ध में उतार दिया गया. यह कहानी है सैकड़ों बांग्लादेशियों की. हाल ही में ऐसे तीन लड़के किसी तरह अपने देश वापस लौटे. उन्होंने इसकी पूरी कहानी सुनाई.
Bangladeshi Trapped in Russia: सर्द हवा चेहरे को चीरती हुई गुजर रही थी और दूर कहीं बर्फ से ढकी जमीन पर गोलों की गूंज सुनाई दे रही थी. यह वह जगह नहीं थी जिसकी कल्पना मकसूदुर रहमान ने की थी. उसने अपने बांग्लादेश के गर्म, नम और भीड़भरे गांव से निकलते समय परिवार से वादा किया होगा, “कुछ महीनों में पैसे भेजूंगा, सब ठीक हो जाएगा.” श्रमिक एजेंट ने उसे बताया था कि रूस में एक शांत चौकीदार की नौकरी है, रहने-खाने का इंतजाम होगा और तनख्वाह इतनी कि घर की किस्मत बदल जाए. लेकिन सपनों की उस उड़ान ने उसे यूक्रेन के खिलाफ मोर्चे वाली ऐसी जंग की आग में ला खड़ा किया, जिसके बारे में उसने कभी सोचा भी नहीं था.
न्यूज एजेंसी ‘एसोसिएटेड प्रेस’ (एपी) की पड़ताल में सामने आया कि बांग्लादेशी कामगारों को छोटी-मोटी नौकरियां देने का झूठा वादा कर रूस बुलाया गया और बाद में उन्हें यूक्रेन में युद्ध की आग में झोंक दिया गया. कई लोगों को हिंसा, जेल में डालने या मार डालने की धमकी दी गई. एपी ने तीन बांग्लादेशी युवकों से बात की, जो रूसी सेना से भागने में सफल रहे. इनमें रहमान भी शामिल हैं. उन्होंने बताया कि मॉस्को पहुंचने के बाद उनसे रूसी भाषा में दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए, जो असल में सैन्य अनुबंध थे. इसके बाद उन्हें सेना के शिविर में ड्रोन युद्ध, मेडिकल निकासी और भारी हथियारों के साथ बुनियादी लड़ाई का प्रशिक्षण दिया गया.
जब रहमान ने आपत्ति जताई तो एक रूसी कमांडर ने अनुवाद ऐप के जरिये कहा, ‘‘तुम्हें यहां तुम्हारे एजेंट ने भेजा है, हमने तुम्हें खरीद लिया है.’’ तीनों युवकों ने बताया कि उन्हें जबरन अग्रिम मोर्चों पर भेजा गया, रसद ढोने, घायल सैनिकों को निकालने और शव उठाने का काम कराया गया. तीन अन्य लापता बांग्लादेशियों के परिजनों ने बताया कि उनके प्रियजनों ने भी ऐसे ही अनुभव बताए थे.
रूस के रक्षा मंत्रालय और विदेश मंत्रालय तथा इस दक्षिण एशियाई देश की सरकार ने ‘एपी’ द्वारा पूछे गए सवालों की सूची का जवाब नहीं दिया. रहमान के अनुसार, उनके समूह में शामिल श्रमिकों को 10 साल की जेल की धमकी दी गई और उनकी पिटाई की गई. सात महीने बाद घायल होने पर वह अस्पताल से भागकर मॉस्को स्थित बांग्लादेशी दूतावास पहुंचे और देश लौट आए.
पड़ताल में यात्रा दस्तावेज, सैन्य अनुबंध, मेडिकल रिपोर्ट और तस्वीरें सामने आईं, जिनसे युद्ध में उनकी भागीदारी की पुष्टि होती है. कितने बांग्लादेशी इस तरह फंसाए गए, यह साफ नहीं है, लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सैकड़ों लोग रूसी सेना के साथ थे. अधिकारियों और कार्यकर्ताओं का कहना है कि रूस ने भारत और नेपाल सहित अन्य देशों के लोगों को भी निशाना बनाया है.
लक्ष्मीपुर जैसे इलाकों में विदेश में काम करना परिवारों की आजीविका का अहम सहारा है. गरीबी और बेरोजगारी के चलते लोग एजेंटों के झांसे में आ जाते हैं. कई परिवार आज भी अपने लापता परिजनों के दस्तावेज थामे उनकी वापसी की उम्मीद लगाए बैठे हैं. एपी की पड़ताल में यह भी सामने आया कि बांग्लादेशी और रूसी संपर्कों वाले बिचौलियों का एक नेटवर्क काम कर रहा है.
बांग्लादेश पुलिस के एक जांचकर्ता के अनुसार, आशंका है कि लगभग 40 बांग्लादेशियों की इस युद्ध में जान जा चुकी है. लापता लोगों के परिजनों का कहना है कि उन्हें न तो कोई पैसा मिला और न ही अपने प्रियजनों की कोई खबर. एक महिला ने कहा, ‘‘मुझे पैसे नहीं चाहिए, बस मेरे बच्चों के पिता वापस आ जाएं.’’
गांव की तंग गलियों से लेकर मॉस्को की चमकती सड़कों तक का सफर जैसे एक जाल था. ऐसा जाल जिसमें उम्मीदों को चारा बनाकर फंसाया जाता है. भाषा अनजान, कागज अनजाने और हालात अचानक बदले हुए. कुछ ही हफ्तों में नौकरी का वादा बंदूक की आवाज में बदल गया. रहमान अकेला नहीं था; उसके जैसे कई युवा थे, जिनके हाथों में औजारों की जगह हथियार थमा दिए गए.
उनके सपनों की जगह अब सिर्फ डर, ठंड और जिंदा लौट आने की जिद बची थी. यह कहानी सिर्फ एक आदमी की नहीं, बल्कि उन सैकड़ों परिवारों की है, जो आज भी दरवाजे की आहट पर चौंकते हैं. शायद कोई खबर आई हो, शायद कोई लौट आया हो. उम्मीद और हकीकत के बीच की यह दूरी हजारों किलोमीटर से भी ज्यादा लंबी है.
पीटीआई-भाषा के इनपुट के साथ.
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By Anant Narayan Shukla
इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.
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