Bangladesh Violence: शेख हसीना के बयान से यूनुस सरकार को लगी मिर्ची, भारत सरकार से कर दी ऐसी मांग
Published by : ArbindKumar Mishra Updated At : 06 Feb 2025 9:20 PM
Sheikh Hasina
Bangladesh Violence: बांग्लादेश में एक बार फिर से हिंसा भड़क उठी है. बीती रात बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान के ढाका स्थित आवास में प्रदर्शनकारियों ने तोड़फोड़ की और आग लगा दी. हिंसा के बाद बांग्लादेश ने भारत के सामने विरोध दर्ज कराया है.
Bangladesh Violence: बांग्लादेश ने गुरुवार को अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के बयानों को लेकर भारत के समक्ष विरोध दर्ज कराया. यह जानकारी विदेश मंत्रालय ने दी. बांग्लादेश की ओर से ऐसी प्रतिक्रिया तब आई है, जब शेख हसीना बुधवार रात सोशल मीडिया के माध्यम से भाषण दे रही थी और उन्होंने देशवासियों से मौजूदा शासन के खिलाफ प्रतिरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था.
हसीना के बयानों से देश में अस्थिरता का माहौल पैदा हो रहा: बांग्लादेश
बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने फेसबुक पोस्ट में कहा, “बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना द्वारा बांग्लादेश में अस्थिरता को बढ़ावा देने के लिए सोशल मीडिया सहित विभिन्न प्लेटफार्मों पर लगातार की जा रही झूठी, मनगढ़ंत टिप्पणियों और बयानों पर भारत सरकार के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया है.
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बांग्लादेश ने भारत के उच्चायुक्त को सौंपा विरोध पत्र
यूनुस सरकार ने ढाका में भारत के कार्यवाहक उच्चायुक्त को एक विरोध पत्र सौंपा है. जिसमें कहा गया- शेख हसीना की ऐसी गतिविधियों को बांग्लादेश के प्रति शत्रुतापूर्ण कृत्य माना जाता है और यह दोनों देशों के बीच स्वस्थ संबंध स्थापित करने के प्रयासों के लिए अनुकूल नहीं है. बांग्लादेश ने भारत सरकार से एक्शन लेने के लिए अनुरोध किया है.
शेख हसीना ने क्या दिया था बयान
शेख हसीना ने बुधवार रात को अपने संबोधन में कहा था, “वे इमारत को ध्वस्त कर सकते हैं, लेकिन इतिहास को नहीं. लेकिन उन्हें यह भी याद रखना चाहिए कि इतिहास अपना बदला लेता है.” हसीना ने मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार से कहा- “उनके पास अभी भी राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और उस स्वतंत्रता को बुलडोजर से नष्ट करने की ताकत नहीं है, जिसे हमने लाखों शहीदों के बहुमूल्य जीवन को गंवाकर हासिल किया है.”
बांग्लादेश हिंसा के बाद हसीना को देना पड़ा था इस्तीफा
शेख हसीना पिछले साल पांच अगस्त से भारत में रह रही हैं. छात्रों के नेतृत्व में हुए बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन के बीच उन्हें बांग्लादेश से भागना पड़ा था. हिंसा के बाद अवामी लीग की 16 साल पुरानी सरकार गिर गयी थी.
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अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.
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