Bangladesh Leader Hindu Sub Inspector Lynched and Burned Video: बांग्लादेश में हिंसा, विशेषकर अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है. जुलाई में शेख हसीना सरकार के खिलाफ चले हिंसक आंदोलन से ही देश भर में आग लगाने की घटना ज्यादा देखी गई है. बीते दिनों में दीपू चंद्र दास और खोकन दास के मामले में शरीर पर ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग लगाने की घटना देखी गई है. इससे लोगों में आक्रोश देखा जा रहा है. इसी बीच सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो को लेकर लोगों की नाराजगी और बढ़ गई है. इस वीडियो में बांग्लादेश का एक युवक, जिसे स्थानीय स्तर का युवा नेता बताया जा रहा है, एक हिंदू पुलिस अधिकारी की हत्या पर गर्व जताते हुए और पुलिस अधिकारियों को खुलेआम धमकाते हुए नजर आता है. युवक इस घटना को अपने शब्दों में “जुलाई 2024 के आंदोलन” से जोड़कर पेश करता है.
यह वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर खोजी पत्रकार और लेखक साहिदुल हसन खोकोन ने साझा किया है. उनके मुताबिक, वीडियो में बोलने वाला युवक हबीगंज जिले का एक छात्र समन्वयक है. वीडियो क्लिप में युवक एक पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी को धमकी देता हुआ सुनाई देता है और कहता है कि वह थाने को आग के हवाले कर देगा. वह यह दावा भी करता है कि कथित जुलाई आंदोलन के दौरान उनके समूह ने पहले ही बनियाचोंग पुलिस स्टेशन को जला दिया था.
साहिदुल हसन खोकोन ने वीडियो के साथ लिखा, “यह लड़का हबीगंज जिले का एक छात्र समन्वयक है. वह खुलेआम एक पुलिस स्टेशन के ऑफिसर-इन-चार्ज को धमकी दे रहा है कि वह थाने को जला देगा. वह यह भी शेखी बघारता है कि जुलाई आंदोलन के दौरान उन्होंने पहले ही बनियाचोंग पुलिस स्टेशन को आग लगा दी थी…” इसके बाद युवक एक बेहद गंभीर और डर पैदा करने वाला बयान देता है. वह कहता है, “हमने हिंदू अधिकारी एसआई संतोष को जला दिया.” उसका संकेत सब-इंस्पेक्टर संतोष भाभू की हत्या की ओर माना जा रहा है. चौंकाने वाली बात यह है कि वह यह बात किसी भय या पश्चाताप के बिना कहता दिखाई देता है, जबकि वह खुद एक पुलिस थाने के भीतर बैठा होता है. ‘यह यूनुस राजा का बांग्लादेश है.’
न तो इस वीडियो की सत्यता, न ही वक्ता की पहचान या उसमें किए गए दावों और साथ ही साहिदुल हसन खोकोन के दावे की भी प्रभात खबर पुष्टि नहीं कर रहा है.
अधिकारी संतोष की लिंचिंग
इस वीडियो में दिए गए बयान ने एक बार फिर सब-इंस्पेक्टर संतोष भाभू की हत्या के मामले को चर्चा के केंद्र में ला दिया है. संतोष भाभू हबीगंज जिले के बनियाचोंग पुलिस स्टेशन में तैनात थे और 5 अगस्त 2024 को उग्र भीड़ द्वारा पीट-पीटकर उनकी जान ले ली गई थी. बांग्लादेशी अखबार देश रूपांतर की रिपोर्ट के मुताबिक, उस शाम राजनीतिक माहौल बेहद तनावपूर्ण था. इसी दौरान एक भीड़ ने बनियाचोंग पुलिस स्टेशन पर धावा बोल दिया. यह घटना तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे से कुछ घंटे पहले की बताई जाती है.
आत्मरक्षा की स्थिति में संतोष भाभू और अन्य पुलिसकर्मियों ने भीड़ को काबू में करने के लिए गोलीबारी की, जिसमें मौके पर तीन लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए. घायलों में से एक व्यक्ति ने बाद में अस्पताल में दम तोड़ दिया. रिपोर्ट में बताया गया है कि उसी रात करीब एक बजे भीड़ दोबारा लौटी और पुलिस स्टेशन को चारों ओर से घेर लिया. जब सेना के जवान वहां पहुंचे, तो कथित तौर पर भीड़ इस शर्त पर मानी कि बाकी सभी पुलिसकर्मियों को जाने दिया जाएगा, लेकिन संतोष भाभू को उनके हवाले किया जाए. करीब रात 2:15 बजे संतोष भाभू को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला. रिपोर्ट के अनुसार, उनका शव अगले दिन तक सड़क पर पड़ा रहा और इसके बाद भीड़ द्वारा उसके साथ और भी अमानवीय व्यवहार किया गया.
अल्पसंख्यकों पर लगातार हो रहे हमले
हबीगंज जिला बांग्लादेश के उत्तर-पूर्वी हिस्से में स्थित है. यह जनसंख्या के लिहाज से मुख्य रूप से बंगाली मुस्लिम बहुल क्षेत्र है. सरकारी जनगणना आंकड़ों के अनुसार, यहां लगभग 84 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है, जबकि लगभग 16 प्रतिशत लोग बंगाली हिंदू समुदाय से आते हैं, जो एक अहम अल्पसंख्यक समूह है. बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद से अल्पसंख्यकों पर कई हमले हुए हैं. इनमें 12 फरवरी को होने वाले चुनावों की घोषणा के बाद से और तेजी आई है. दीपू चंद्र दास, अमृत मंडल की हत्या और खोकन दास के ऊपर जानलेवा हमले जैसे मामले खुलकर सामने आए हैं. इसे लेकर बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों में काफी डर बना हुआ है. कभी ईशनिंदा का झूठा आरोप लगाकर और तो कभी अपराधी बताकर की जा रही हत्याओं को रोकने में अंतरिम सरकार पूरी तरह विफल हो रही है.
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