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35 साल बाद इस शहर में लैंड हुआ पहला यूरोपीय जहाज, कभी 1 के बदले मिलते थे 3 डॉलर, आज पूरा देश है उजड़ा चमन

Updated at : 17 Dec 2025 11:42 AM (IST)
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After 35 years first European aircraft landed at Iraq's Baghdad International Airport.

35 साल बाद पहला यूरोपीय विमान इराक के बगदाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरा. फोटो- एक्स (@@Sinjaree)

Iraq Baghdad Airport European aircraft landing after 35 years: इराक की राजधानी बगदाद के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 35 वर्षों बाद पहली यूरोपीय एयरलाइंस का जहाज लैंड हुआ. ग्रीस की एजियन एयरलाइंस द्वारा संचालित एक उड़ान ने इराक की राजधानी में लैंडिंग की. इराक की अर्थव्यवस्था कभी अरब देशों में दूसरी सबसे मजबूत इकॉनमी थी, लेकिन युद्ध ने ऐसे हालात खराब किए कि वह उजड़े हुए चमन से बियाबान जैसा हो गया.

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Iraq Baghdad Airport European aircraft landing after 35 years: कभी 1 दिनार में मिलते थे 3 डॉलर, आज है उजड़ा चमन. ऐसा चमन, जो लोगों की मौजूदगी के बावजूद बियाबान सा लगता है. हम बात कर रहे हैं इराक की. इस देश की राजधानी बगदाद के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर में तीन दशकों से अधिक समय बाद पहली बार किसी यूरोपीय एयरलाइन का विमान उतरा है. इराक के परिवहन मंत्रालय के अनुसार, मंगलवार, 16 दिसंबर को ग्रीस की एजियन एयरलाइंस द्वारा संचालित एक उड़ान ने इराक की राजधानी में लैंडिंग की, जो 35 वर्षों में बगदाद पहुंचने वाली पहली यूरोपीय संघ (ईयू) की एयरलाइन बनी. मंत्रालय ने कहा कि यह लैंडिंग यूरोपीय विमानन मानचित्र पर इराक की वापसी का संकेत है, इससे इराक के विमानन क्षेत्र में पुनरुद्धार के एक नए चरण की शुरुआत हो रही है. 

1990 के दशक की शुरुआत में यूरोपीय एयरलाइंस ने बगदाद के लिए उड़ानें रोक दी थीं. लेकिन सवाल यह है कि यूरोपीय उड़ानें आखिर बगदाद आना क्यों बंद हो गई थीं? 1970 के दशक के उत्तरार्ध में इराक आर्थिक रूप से अपने शिखर पर था और तेजी से विकसित होता देश बन चुका था. तेल उत्पादन बढ़कर लगभग 35 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया था, जिससे तेल राजस्व 1979 में करीब 21 अरब डॉलर और 1980 में लगभग 27 अरब डॉलर तक पहुंच गया. 

इसी दौर में इराक ने लगभग 35 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार जमा कर लिया था. उसकी मुद्रा इराकी दीनार इतनी मजबूत थी कि उसकी कीमत 1 दीनार के बदले 3 अमेरिकी डॉलर से अधिक थी. 1980 तक इराक सऊदी अरब के बाद अरब दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका था. मजबूत तेल आय के कारण स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था मध्य-पूर्व की बेहतरीन प्रणालियों में गिनी जाती थी और बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा परियोजनाएं चल रही थीं.

युद्ध शुरू हुआ और तबाह हो गया इराक

हालांकि यह समृद्धि ज्यादा समय तक नहीं टिक सकी और 1980 में शुरू हुए ईरान-इराक युद्ध. 1980-1988 के इस युद्ध ने बगदाद समेत पूरे इराक की अर्थव्यवस्था को गहरे संकट में डाल दिया. इसके बाद खाड़ी युद्ध और 1990 के दशक के कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों ने इराक के आर्थिक उछाल को पूरी तरह रोक दिया. दरअसल 1990 में इराक के तत्कालीन शासक सद्दाम हुसैन ने पड़ोसी कुवैत पर हमला किया था. इस आक्रमण के बाद खाड़ी युद्ध छिड़ गया. इराक पर कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगे और सुरक्षा स्थिति तेजी से बिगड़ गई. इसी वजह से व्यावसायिक विमानन बेहद जोखिम भरा और लगभग अव्यावहारिक हो गया.

1990 में ही कर्ज तले दब गया बगदाद

युद्ध का सीधा असर बगदाद के बुनियादी ढांचे पर पड़ा, जहां बिजली संयंत्र, तेल रिफाइनरियां, पुल, सड़कें और औद्योगिक क्षेत्र बड़े पैमाने पर क्षतिग्रस्त हो गए. सैन्य खर्च में तेज बढ़ोतरी के कारण शिक्षा, स्वास्थ्य और शहरी विकास पर खर्च लगभग ठप हो गया. मुद्रा कमजोर हुई, महंगाई और बेरोजगारी बढ़ी, जिसकी वजह से आम लोगों का जीवन स्तर तेजी से गिरा. इसके बाद कुवैत पर हमले, खाड़ी युद्ध और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों ने हालात और बिगाड़ दिए. कभी मध्य-पूर्व के समृद्ध शहरों में गिना जाने वाला बगदाद 1990 के दशक तक कर्ज और बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझने लगा. इस युद्ध में इराक को आज की कीमतों में करीब 500 अरब अमेरिकी डॉलर का नुकसान झेलना पड़ा. युद्ध के अंत तक देश पर 80 से 100 अरब डॉलर से अधिक का विदेशी कर्ज चढ़ चुका था. 

फिर भी शांति नहीं आई

तेल पर निर्भर अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा, क्योंकि उत्पादन घटा और निर्यात मार्ग बाधित हो गए. इसके चलते सरकारी राजस्व में भारी गिरावट दर्ज की गई. इसके बाद भी इराक की किस्मत में शांति नहीं लिखी थी. 2003 में इराक युद्ध शुरू हो गया. इसे ऑपरेशन इराकी फ्रीडम (Operation Iraqi Freedom) के नाम से भी जाना जाता है. इसकी शुरुआत 20 मार्च 2003 को हुई, जब संयुक्त राज्य अमेरिका के नेतृत्व में उसके सहयोगी देशों ने इराक पर आक्रमण किया.

WMD की खोज ने और तबाह किया

इस सैन्य कार्रवाई का घोषित उद्देश्य सद्दाम हुसैन की सरकार को सत्ता से हटाना, सामूहिक विनाश के हथियारों (WMDs) का पता लगाना और आतंकवाद को कथित समर्थन समाप्त करना था. आक्रमण के शुरुआती कुछ ही हफ्तों में सद्दाम हुसैन का शासन गिर गया, लेकिन इसके बाद देश में लंबे समय तक विद्रोह, हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता का दौर शुरू हो गया. यह संघर्ष कई वर्षों तक चलता रहा और अंततः 2011 में अमेरिकी सेना की औपचारिक वापसी के साथ युद्ध का मुख्य चरण समाप्त हुआ, हालांकि इसके बाद भी इराक में अस्थिरता बनी रही.

इराक लंबे समय तक गृहयुद्ध, सांप्रदायिक टकराव और विद्रोही गतिविधियों से जूझता रहा. इस दौर में सशस्त्र जिहादी संगठनों का उभार हुआ, आतंकी हमले आम हो गए और हवाई अड्डों की सुरक्षा गंभीर चुनौती बन गई. ऐसे हालात में यूरोपीय एयरलाइंस के लिए बगदाद तक सीधी उड़ानें चलाना बेहद जोखिम भरा माना जाता था, इसलिए दशकों तक इस पर रोक लगी रही.

बदलाव की बयार में एयरलाइन की बहार

अब यह स्थिति धीरे-धीरे बदलती नजर आ रही है. कई वर्षों की अस्थिरता के बाद हाल के समय में, खासकर बड़े शहरों में, हालात पहले से बेहतर हुए हैं. इराकी सरकार अंतरराष्ट्रीय समुदाय का भरोसा दोबारा हासिल करने की दिशा में काम कर रही है, ताकि विदेशी निवेश आए और संघर्ष व प्रतिबंधों से कमजोर हुई अर्थव्यवस्था को दोबारा मजबूत किया जा सके.

इसी क्रम में बगदाद-एथेंस-बगदाद के नए हवाई मार्ग की शुरुआत की गई है, जिस पर सप्ताह में दो उड़ानें संचालित होंगी. परिवहन मंत्रालय का कहना है कि यात्रियों की संख्या बढ़ने पर भविष्य में उड़ानों की संख्या बढ़ाई जा सकती है. इससे पहले, इस साल की शुरुआत में एजियन एयरलाइंस ने इराक के उत्तरी कुर्द क्षेत्र की राजधानी एरबिल के लिए उड़ानें शुरू की थीं, जिसे लंबे समय से देश का अपेक्षाकृत सुरक्षित और स्थिर इलाका माना जाता है.

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Anant Narayan Shukla

लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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