ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की अंतिम विदाई की तारीखें तय, मौत के 4 महीने बाद मशहद में होंगे दफन
Published by : Anant Narayan Shukla Updated At : 14 Jun 2026 7:07 AM
अली खामेनेई की मौत के बाद प्रदर्शन करते लोग. फोटो- एक्स (ANI).
Ali Khamenei Funeral: ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार का कार्यक्रम घोषित कर दिया गया है. तेहरान से शुरू होने वाली अंतिम यात्रा 9 जुलाई को मशहद में उनके दफन के साथ समाप्त होगी.
Ali Khamenei Funeral: ईरान में दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को अंतिम विदाई देने की तैयारियां शुरू हो गई हैं. ईरानी अधिकारियों ने उनके अंतिम संस्कार और श्रद्धांजलि कार्यक्रमों का विस्तृत कार्यक्रम जारी कर दिया है. सरकारी मीडिया के अनुसार, उनके अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम 4 जुलाई को राजधानी तेहरान से शुरू होंगे और 9 जुलाई को उनके पैतृक शहर मशहद में दफन के साथ संपन्न होंगे.
ईरान की समाचार एजेंसी फार्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, अली खामेनेई को श्रद्धांजलि देने के लिए 4 और 5 जुलाई को तेहरान स्थित इमाम खोमैनी प्रेयर ग्राउंड्स में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. इसके बाद 6 जुलाई को तेहरान में अंतिम यात्रा निकाली जाएगी.
इसके अगले चरण में 7 जुलाई को पवित्र शहर कोम में समारोह आयोजित होंगे. वहीं 9 जुलाई को मशहद में अंतिम कार्यक्रम किए जाएंगे. खामेनेई को मशहद स्थित इमाम रजा के पवित्र दरगाह परिसर में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा.
28 फरवरी के हवाई हमले में हुई थी मौत
अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत 28 फरवरी को ईरान पर हुए इजरायली और अमेरिकी हवाई हमलों के पहले ही दिन हो गई थी. उस समय उनकी उम्र 86 वर्ष थी. वे करीब 36 वर्षों तक इस्लामिक गणराज्य ईरान के सर्वोच्च नेता रहे और देश की राजनीतिक तथा धार्मिक व्यवस्था के सबसे प्रभावशाली चेहरे माने जाते थे. जिस हवाई हमले में उनकी मौत हुई, उसमें तेहरान स्थित उनका केंद्रीय परिसर पूरी तरह तबाह हो गया था.
बेटे मोजतबा खामेनेई ने संभाली कमान
हमले में अली खामेनेई के 56 वर्षीय बेटे मोजतबा खामेनेई भी घायल हुए थे. उनकी पत्नी की भी उसी हमले में मौत हो गई थी. बाद में मोजतबा खामेनेई को देश का नया सर्वोच्च नेता नियुक्त किया गया और उन्होंने अपने पिता की जगह संभाली.
अपने लंबे कार्यकाल के दौरान अली खामेनेई ने ईरान को मध्य पूर्व में अमेरिका-विरोधी एक मजबूत शक्ति के रूप में स्थापित किया. उन्होंने लेबनान के हिजबुल्लाह जैसे सहयोगी संगठनों के जरिए क्षेत्र में ईरान का प्रभाव बढ़ाया. घरेलू स्तर पर भी उन्होंने सख्त रुख अपनाया और सरकार विरोधी आंदोलनों तथा अशांति की घटनाओं पर कड़ा नियंत्रण बनाए रखा.
परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका से बना रहा टकराव
1989 में ईरान के सुप्रीम लीडर बने खामेनेई अपने पूरे शासनकाल में अमेरिका के मुखर आलोचक रहे. दूसरी ओर, अमेरिका के कई प्रशासन ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रहे विवाद का समाधान निकालने की कोशिश करते रहे, लेकिन कोई स्थायी सफलता नहीं मिल सकी.
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मुहर्रम में अंतिम संस्कार की योजना टाली
ईरान अपने दिवंगत सुप्रीम लीडर के अंतिम संस्कार को पहले मुहर्रम के महीने में करना चाहता था. यह इस्लामिक कैलेंडर का पहला महीना होता है. तीन दिन का यह कार्यक्रम जून में होना था. लेकिन इसे टाल दिया गया.
तेहरान के मेयर अलीरेजा जकानी के मुताबिक, मुहर्रम के शुरुआती दिनों शिया समुदाय के इमाम हुसैन का वार्षिक शोक मनाया जाता है. इसलिए अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को आगे रखा गया. ईरान के अधिकारियों के मुताबिक इस कार्यक्रम में लगभग 1-2 करोड़ लोगों के शामिल होने की उम्मीद है. इसके लिए तैयारियां की जा रही हैं.
आम तौर पर इस्लामिक कायदे के मुताबिक, किसी की मौत के तुरंत बाद उसे सुपुर्द ए खाक किया जाता है. लेकिन युद्ध या अन्य परिस्थिति की वजह से इसे टाला जा सकता है. हिज्बुल्लाह के चीफ हसन नसरल्लाह का आंतिम संस्कार भी देरी से हुआ था. वहीं अब अली खामेनेई को लगभग 132 दिन बाद उनके गृहनगर मशहद में दफन किया जाएगा.
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By Anant Narayan Shukla
इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.
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