सहरसा में बाबा वाणेश्वर मंदिर में उमड़ती है आस्था, शिवभक्ति और आध्यात्म का अद्भुत संगम
Published by : Pratyush Prashant Updated At : 14 Jun 2026 8:02 AM
सहरसा - बाबा वाणेश्वर मंदिर
Aaj Ka Darshan: कोसी क्षेत्र का एक ऐसा प्राचीन शिवधाम, जहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना कभी खाली नहीं लौटती. सावन और महाशिवरात्रि में यहां उमड़ता है श्रद्धालुओं का जनसैलाब.
सहरसा से विनय कुमार मिश्र की विशेष रिपोर्ट.
Aaj Ka Darshan: कहरा प्रखंड के देवना स्थित बाबा वाणेश्वर मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि लाखों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास का केंद्र है. वर्षों पुराना यह शिव मंदिर कोसी क्षेत्र में विशेष धार्मिक महत्व रखता है. यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं. मान्यता है कि बाबा वाणेश्वर अपने भक्तों की सच्ची श्रद्धा से की गई प्रार्थना को स्वीकार करते हैं और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं.
शिवभक्ति और आध्यात्म का अद्भुत संगम
देवना स्थित बाबा वाणेश्वर मंदिर में प्रवेश करते ही एक अलग तरह की आध्यात्मिक शांति का अनुभव होता है. मंदिर परिसर का शांत वातावरण और शिवलिंग के दर्शन श्रद्धालुओं को गहरे आध्यात्मिक भाव से जोड़ देते हैं.
स्थानीय लोगों का कहना है कि बाबा वाणेश्वर की कृपा से भक्तों के जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और उन्हें सुख, शांति तथा समृद्धि की प्राप्ति होती है. यही कारण है कि सुबह से लेकर देर शाम तक यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है.
सावन में कांवरियों से भर जाता है मंदिर परिसर
श्रावण मास आते ही बाबा वाणेश्वर मंदिर की रौनक कई गुना बढ़ जाती है. दूर-दराज के गांवों और विभिन्न जिलों से कांवरिया जल लेकर यहां पहुंचते हैं और भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं.
सावन के दौरान मंदिर परिसर में रुद्राभिषेक, भजन-कीर्तन, धार्मिक अनुष्ठान और विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है. हर-हर महादेव के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है. श्रद्धालु घंटों कतार में खड़े होकर बाबा के दर्शन करते हैं.

महाशिवरात्रि पर सजता है भव्य धार्मिक उत्सव
महाशिवरात्रि के अवसर पर बाबा वाणेश्वर मंदिर का दृश्य देखने लायक होता है. सुबह से देर रात तक श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती रहती है. इस दौरान बाबा का विशेष श्रृंगार किया जाता है और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विशेष पूजा-अर्चना संपन्न होती है.
शाम की आरती और भजन-कीर्तन में हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं. खास बात यह है कि महाशिवरात्रि के अवसर पर कला संस्कृति विभाग की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है, जो श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनता है.
धार्मिक पर्यटन का उभरता केंद्र
बाबा वाणेश्वर मंदिर केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है. यहां आने वाले श्रद्धालु पूजा-अर्चना के साथ मंदिर की प्राचीन परंपरा, धार्मिक विरासत और आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव करते हैं.
हाल के वर्षों में मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिससे इसकी भव्यता और आकर्षण पहले से अधिक बढ़ गया है. स्थानीय लोगों का विश्वास है कि बाबा वाणेश्वर की कृपा से पूरे क्षेत्र में सुख, शांति और खुशहाली बनी रहती है.
आस्था का ऐसा दरबार, जहां हर दिन पहुंचते हैं भक्त
देवना का बाबा वाणेश्वर मंदिर आज भी हजारों लोगों की श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है. परिवार की सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना लेकर यहां आने वाले श्रद्धालु बाबा के चरणों में शीश झुकाते हैं और आध्यात्मिक संतोष के साथ लौटते हैं.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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