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Afghanistan में शुरू हुआ तालिबान कट्टरपंथियों का क्रूर राज! जारी हो रहे अजीबोगरीब फरमान

Updated at : 28 Mar 2022 10:41 PM (IST)
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Afghanistan में शुरू हुआ तालिबान कट्टरपंथियों का क्रूर राज! जारी हो रहे अजीबोगरीब फरमान

Afghanistan Taliban News तालिबान कट्टरपंथी अफगानिस्तान में पिछले कुछ दिनों से दमनकारी आदेशों की झड़ी लगा रहे हैं, जो 1990 के दशक के उत्तरार्ध से उनके कठोर शासन की ओर इशारा करते हैं.

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Afghanistan Taliban News तालिबान कट्टरपंथी अफगानिस्तान में पिछले कुछ दिनों से दमनकारी आदेशों की झड़ी लगा रहे हैं, जो 1990 के दशक के उत्तरार्ध से उनके कठोर शासन की ओर इशारा करते हैं. अफगानिस्तान की तालिबान के नेतृत्ववाली सरकार ने एक ओर जहां लड़कियों को छठी कक्षा से आगे स्कूल जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. वहीं, महिलाओं की फ्लाइट से यात्रा करने की आजादी को भी छीन लिया है, इसे लेकर एक आदेश जारी किया गया है. साथ ही तालिबान ने महिलाओं के एक सप्ताह में तीन से ज्यादा दिन पार्कां में जाने पर पाबंदी भी लगा दी है.

तालिबान शासन के फैसले को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने व्यक्त की गहरी चिंता

अफगानिस्तान में छठी कक्षा से ऊपर की कक्षाओं में लड़कियों को पढ़ाई नहीं करने देने संबंधी तालिबान शासन के फैसले को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने गहरी चिंता व्यक्त की है. संयुक्त राष्ट्र ने अफगानिस्तानी प्राधिकारियों से बिना विलंब के अपने उस संकल्प का पालन करने का आह्वान किया, जिसमें सभी उम्र की छात्राओं के लिए स्कूलों को दोबारा खोले जाने का आश्वासन दिया गया था. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्यों की ओर से रविवार को जारी बयान में कहा गया है कि हम लड़कियों समेत सभी अफगान नागरिकों के लिए शिक्षा के अधिकार को दोहराते हैं तथा तालिबान से बिना देरी के सभी उम्र की लड़कियों के लिए दोबारा स्कूल खोले जाने और शिक्षा का अधिकार का सम्मान करने का आह्वान करते हैं. सुरक्षा परिषद ने लड़कियों समेत सभी अफगान नागरिकों को शिक्षा उपलब्ध कराने के संबंध में 25 मार्च को अफगानिस्तान के प्रतिनिधि को तलब किया था.

पार्क जाते समय महिलाएं पहने हिजाब

तालिबान के नेतृत्व वाली सरकार की ओर से जारी किए गए फरमान के मुताबिक, अफगानिस्तान में अब महिलाए एक सप्ताह में सिर्फ तीन दिन ही पार्क में टहलने के लिए जा सकती हैं, जबकि पुरुषों को चार दिन पार्क जाने की इजाजत है. तालिबान शासन ने रविवार को महिलाओं के लिए एक लिंग-पक्षपाती समय सारिणी की घोषणा की कि वे सप्ताह में केवल तीन दिन पार्क जा सकती हैं, जबकि पुरुषों को चार दिनों के लिए अनुमति दी गई है. इसके साथ ही शासन ने महिलाओं को पार्क जाते समय हिजाब पहनने का भी निर्देश दिया है. कहा गया है कि महिलाओं को हिजाब पहनना चाहिए.

पुरुष अभिभावकों के बगैर हवाई यात्रा नहीं कर सकती महिलाएं

बता दें कि अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज होने के बाद तालिबानियों के खासकर महिलाओं को लेकर अजीबोगरीब फरमान जारी हो रहे हैं. एक और ताजा मामला वहां महिलाओं के हवाई जहाज में यात्रा को लेकर सामने आया है. बताया जा रहा है कि अफगानिस्तान के तालिबान शासकों ने दर्जनों महिलाओं को फ्लाइट में सवार होने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है. कारण ये बताया जा रहा है कि कि वे पुरुष अभिभावकों के बगैर यात्रा कर रही थीं. अफगानिस्तान में एयरलाइंस को आदेश दिया गया है कि महिलाओं को फ्लाइट में तभी चढ़ने दिया जाए, जब उनके साथ कोई पुरुष रिश्तेदार मौजूद हो. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, वहां के ट्रैवेल एजेंट भी बता रहे हैं कि उन्होंने सिंगल यात्रा करने वाली महिला यात्रियों को टिकट जारी करना बंद कर दिया है.

तालिबान ने बीबीसी समाचार प्रसारण पर लगाया बैन

बीबीसी ने कहा है कि पश्तो, फारसी और उज्बेक में बुलेटिन हटा दिए गए हैं. वॉयस ऑफ अमेरिका को भी तालिबान प्रसारण रोकने का आदेश दिया है. ब्रिटेन के राष्ट्रीय प्रसारक के मुताबिक, बीबीसी समाचार बुलेटिनों को ऑफ एयर करने का आदेश अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने दिया है. बीबीसी ने रविवार को यह घोषणा की और कहा कि अफगानिस्तान के लोगों के लिए अनिश्चितता और अशांति के समय में यह एक चिंताजनक स्थिति है.

तालिबान का वैश्विक चेहरा बनकर उभरा था मुल्ला बरादर

बता दें कि मुल्ला बरादर तालिबान का वैश्विक चेहरा बनकर उभरा था. मुल्ला बरादर को ही कतर की राजधानी दोहा में तालिबान के राजनीतिक कार्यालय की कमान सौंपी गई थी. अगस्त 2021 में तालिबान की जीत के बाद अनुमान लगाया जा रहा था कि मुल्ला बरादर के हाथ में ही अफगानिस्तान की कमान आएगी, लेकिन हक्कानी के विरोध के कारण ऐसा हो नहीं सका. मुल्ला बरादर ने ही दुनिया को भरोसा दिया था कि तालिबान की नई सरकार पहले की तुलना में काफी उदार होगी, लेकिन अधिकांश विश्लेषकों और पर्यवेक्षकों का मानना है कि सिराजुद्दीन हक्कानी के रहते तालिबान का उदारवादी रुख संभव नहीं है.

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