भारत-किर्गिजस्तान ने विश्व भर में आतंकवाद की बढती प्रवृत्ति पर चिंता जताई, चार समझौतों पर हस्ताक्षर

Published at :12 Jul 2015 4:55 PM (IST)
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भारत-किर्गिजस्तान ने विश्व भर में आतंकवाद की बढती प्रवृत्ति पर चिंता जताई, चार समझौतों पर हस्ताक्षर

बिश्केक, किर्गिजस्तान: विश्व भर में आतंकवाद और उग्रवाद की बढती प्रवृत्ति पर गहरी चिंता जताते हुए भारत और किर्गिजस्तान ने आपसी रक्षा सहयोग को बढाने और वार्षिक संयुक्त सैन्य अभ्यास करने सहित चार समझौतों पर आज हस्ताक्षर किए.मध्य एशिया और रुस की आठ दिवसीय यात्रा के क्रम में कल रात किर्गिजस्तान की राजधानी पंहुचे प्रधानमंत्री […]

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बिश्केक, किर्गिजस्तान: विश्व भर में आतंकवाद और उग्रवाद की बढती प्रवृत्ति पर गहरी चिंता जताते हुए भारत और किर्गिजस्तान ने आपसी रक्षा सहयोग को बढाने और वार्षिक संयुक्त सैन्य अभ्यास करने सहित चार समझौतों पर आज हस्ताक्षर किए.मध्य एशिया और रुस की आठ दिवसीय यात्रा के क्रम में कल रात किर्गिजस्तान की राजधानी पंहुचे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज यहां किर्गिज नेतृत्व से बातचीत के दौरान आतंकवाद और उग्रवाद को बिना सरहदों वाला खतरा बताते हुए इससे लडने की आवश्यकता पर जोर दिया.

उन्होंने कहा, हम दोनों अपने क्षेत्र में चुनौतियों के समय में शांतिपूर्ण और सुरक्षित पडोस को सुनिश्चित करने की कामना करते हैं. आतंकवाद तथा उग्रवाद से लडने में हमारे साझा हित हैं क्योंकि ये बिना सरहदों वाला एक बडा खतरा बन गया है. किर्गिज राष्ट्रपति अल्माजबेक अतामबायेव के साथ वार्ता के बाद चार समझौतों पर हस्ताक्षर करने के पश्चात दिये अपने बयान में मोदी ने यह बात कही.

मोदी और अतामबायेव के बीच वार्ता के बाद जारी संयुक्त बयान में दोनों पक्षों ने क्षेत्र और पूरे विश्व में उग्रवाद, कट्टरवाद और आतंकवाद की बढती प्रवृत्ति पर गहरी चिंता जताई. इसमें कहा गया कि भारत ने किर्गिज सरकार द्वारा आतंकवाद से लडने और किर्गिज समाज का धर्मनिर्पेक्ष चरित्र बनाए रखने की सराहना की. बयान में कहा गया, दोनों पक्ष अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद और अन्य अपराधों के खिलाफ समझौतों में तेजी लाने पर सहमत हुए. दोनों देशों के बीच हुए चार समझौतों में रक्षा सहयोग और सांस्कृतिक आदान प्रदान शामिल है. दोनों देशों के चुनाव आयोगों के बीच और आर्थिक संबंधों को आगे बढाने में मददगार बनने के लिए मानक स्थापित करने के विषय में सहयोग पर दो सहमति पत्रों पर भी हस्ताक्षर किये गए.

प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि इस क्षेत्र के पांच देशों की उनकी यात्रा इस बात को दर्शाती है कि भारत मध्य एशिया के साथ नये स्तर के संबंधों को कितना महत्व देता है. किर्गिजस्तान इस परिकल्पना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. किर्गिजस्तान के साथ द्विपक्षीय रक्षा संबंधों के मजबूत होने का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि संयुक्त सैन्य अभ्यास ह्यह्यखंजर 2015 हाल ही में सम्पन्न हुआ है.

उन्होंने कहा, हमने वार्षिक आधार पर संयुक्त सैन्य अभ्यास करने का निर्णय किया है. मोदी ने कहा कि रक्षा सहयोग पर नया समझौता हमारे द्विपक्षीय संबंधों के ढांचे को और व्यापक बनायेगा जिसमें रक्षा प्रौद्योगिकी भी शामिल है.

दोनों देशों के बीच हुए रक्षा समझौते का उद्देश्य रक्षा, सुरक्षा, सैन्य शिक्षा एवं प्रशिक्षण के क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को और गहरा बनाना है. इसके तहत अन्य बातों के अलावा संयुक्त सैन्य अभ्यास, अनुभवों एवं सूचनाओं का आदान प्रदान और सैन्य पर्यवेक्षकों तथा इंस्ट्रक्टरों का आदान प्रदान शामिल है.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संभावित विस्तार में स्थायी सदस्यता की भारत की उम्मीदवारी का मजबूत समर्थन करने के लिए मोदी ने किर्गिजस्तान का धन्यवाद किया और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सुधारों को शीघ्र पूरा करने के लिए आतमबायेव का समर्थन मांगा.

सैन्य सहयोग के संदर्भ में मोदी ने कहा कि किर्गिज सैन्य अकादमी का आईटी केंद्र दोनों देशों के बीच नवोन्मेषी सहयोग का एक उदाहरण है, जो दोनों देशों के लिए जरुरी है. उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के प्रति किर्गिजस्तान की प्रतिबद्धता वास्तव में सराहनीय है. मोदी ने कहा कि इस क्षेत्र में भारत अपने अनुभवों को किर्गिजस्तान के साथ बांटने में खुशी अनुभव करेगा.

प्रधानमंत्री ने कहा कि मध्य एशिया के भविष्य में भारत अपना एक महत्वपूर्ण स्थान देखता है. उन्होंने कहा, हम दोनों एक दूसरे की आर्थिक प्रगति को गति प्रदान कर सकते हैं. सतत विकास दोनों के लिए महत्वपूर्ण है. हम एशिया के विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग में योगदान कर सकते हैं.

मोदी ने कहा कि वह भारत के साथ किर्गिजस्तान का टेलीमेडिसिन सम्पर्क शुरु होने को लेकर आशान्वित हैं. उन्होंने कहा कि, इस क्षेत्र में यह ऐसा पहला सम्पर्क होगा. और यह हमें डिजिटल वर्ल्ड की संभावनाओं के बारे में बताता है. हम किर्गिज..भारत पर्वतीय बायो मेडिकल अनुसंधान केंद्र के दूसरे चरण की भी शुरुआत करेंगे. लोकतंत्र और विकास में आतमबायेव के योगदान की सराहना करते हुए मोदी ने कहा कि उनके साथ बहुत अच्छी बातचीत हुई और भारत के साथ रिश्तों को लेकर उन्होंने जो प्रतिबद्धता जतायी है, वह उसकी सराहना करते हैं.

प्रधानमंत्री ने कहा, व्यापार, निवेश, पर्यटन, संस्कृति और मानव संसाधन विकास के संबंधों को मजबूत करने के बारे में हमने लम्बी बातचीत की है. मोदी ने कहा कि उन्हें इस बात से खुशी है कि दोनों देशों के चुनाव आयोगों ने आपसी सहयोग के एक समझौते पर हस्ताक्षर किये हैं.

उन्होंने कहा कि किर्गिज गणराज्य के संसदीय चुनाव के बाद वह एक किर्गिज संसदीय प्रतिनिधिमंडल की भारत यात्रा की राह देख रहे हैं. मोदी ने कहा, आज मानकों और संस्कृति के बारे में हुए समझौतों का मैं स्वागत करता हूं. भारत और मध्य एशिया के बीच कनेक्टिविटी की पहलों से हमारे आर्थिक संबंधों को और विस्तार मिलेगा.

प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देश क्षमता उन्नयन करेंगे और किर्गिजस्तान के लिए प्रशिक्षण पेशकशों की संख्या इस साल सौ तक ले जायेंगे. उन्होंने कहा, मुझे इस बात की खुशी है कि हमने बिश्केक की किर्गिज स्टेट यूनिवसिर्टी में भारत किर्गिज सूचना प्रौद्योगिकी केंद्र की स्थापना की है. उन्होंने कहा कि भारत को किर्गिजस्तान के अन्य बडे शहरों में भी इस तरह के केंद्र स्थापित करने में प्रसन्नता होगी.

भारत और किर्गिजस्तान के बीच कृषि को एक महत्वपूर्ण क्षेत्र करार देते हुए मोदी ने कहा कि दोनों देश शीघ्र ही इस क्षेत्र में सहयोग के विभिन्न आयामों की संभावना तलाशने और इस क्षेत्र में ठोस परियोजनाओं की पहचान के लिए शीघ्र ही एक गोलमेज सम्मेलन आयोजित करेंगे.मोदी ने यूरेशियाई आर्थिक संघ में किर्गिजस्तान के शामिल होने के लिए राष्ट्रपति अतामबायेव को बधाई दी. उन्होंने कहा कि दोनों देश शंघाई सहयोग संगठन में सम्पर्क को लेकर काफी आशान्वित हैं.

प्रधानमंत्री ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को वैश्विक रुप से सफल बनाने में किर्गिजस्तान के समर्थन के लिए अतामबायेव का धन्यवाद किया. उन्होंने कहा, मुझे विश्वास है कि यह यात्रा हमारे द्विपक्षीय संबंधों को नई उंचाइयों पर ले जायेगी. मैं भारत में राष्ट्रपति अतामबायेव का जल्द से जल्द स्वागत करने को उत्सुक हूं.

मोदी मध्य एशिया के पांच देशों और रुस की यात्रा पर निकले हैं. वह उज्बेकिस्तान, कजाखस्तान, रुस, तुर्कमेनिस्तान की यात्रा पहले ही पूरी कर चुके हैं. रुस में उफा में मोदी ने ब्रिक्स और एससीओ शिखर स्तरीय बैठक में हिस्सा लिया. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी किर्गिजस्तान यात्रा की शुरुआत यहां राजधानी बिश्केक में विजय स्मारक (विक्टरी मोनुमेंट) पर श्रद्धासुमन अर्पित करके की.

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