दक्षेस सम्मलेन: भारत और नेपाल ने कई समझौतों पर किये हस्ताक्षर, नेपाल को मिला ध्रुव हेलीकॉप्टर

Published at :25 Nov 2014 7:24 PM (IST)
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दक्षेस सम्मलेन: भारत और नेपाल ने कई समझौतों पर किये हस्ताक्षर, नेपाल को मिला ध्रुव हेलीकॉप्टर

काठमांडो: नेपाल के साथ संबंधों को मजबूत करने की भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज नेपाल को एक आधुनिक हल्का हेलीकॉप्टर (एएलएच) सौंपा जिसका इस्तेमाल सैन्य अभियानों के लिए किया जाएगा. मोदी ने कहा, ‘यह नेपाल के रक्षा कवच में शामिल होगा. ‘ध्रुव मार्क-3’ हेलीकॉप्टर का निर्माण सरकारी स्वामित्व वाली […]

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काठमांडो: नेपाल के साथ संबंधों को मजबूत करने की भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज नेपाल को एक आधुनिक हल्का हेलीकॉप्टर (एएलएच) सौंपा जिसका इस्तेमाल सैन्य अभियानों के लिए किया जाएगा.
मोदी ने कहा, ‘यह नेपाल के रक्षा कवच में शामिल होगा. ‘ध्रुव मार्क-3’ हेलीकॉप्टर का निर्माण सरकारी स्वामित्व वाली हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने किया है. मार्क-3 मूल ध्रुव हेलीकॉप्टर का सबसे आधुनिक संस्करण है और शक्तिशाली इंजनों से युक्त है. ऐसे एक हेलीकॉप्टर की कीमत 60 से 80 करोड रुपये के बीच होने की संभावना है. फिलहाल इसका निर्यात मालदीव और इक्वाडोर समेत कम से कम तीन अन्य देशों को किया जाता है.
इसके अलावा दोनों देशों के बीच मोटर वाहन समझौते पर भी आज दस्तखत किये गए जिसके तहत दोनों देशों में निर्धारित मार्गों पर वाहनों को चलने की अनुमति होगी.
नेपाल के राजनीतिक दलों में गंभीर राजनीतिक मतभेद होने के कारण देश के नये संविधान का निर्माण नहीं हो पा रहा था, लेकिन इस दिशा में गहन विचार विमर्श के बाद अब संविधान का पहला मसौदा 22 जनवरी 2014 तक तैयार करने पर सहमति बनी है. पिछली संविधान सभा को भंग कर दिया गया था, क्योंकि वह बहुत से प्रमुख मामलों पर विवादों को हल नहीं कर पाई.
मोदी ने नेपाल के संविधान निर्माण के बारे में कहा कि संविधान तैयार करते समय ‘ऋषि मन’ की हिमायत की और ‘युद्ध से बुद्ध’ की भावना के अनुसरण पर जोर दिया. हालांकि उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत नेपाल के अंदरुनी मामले में दखल नहीं देना चाहता, लेकिन हरसंभव मदद का आश्वासन दिया.
मोदी ने कहा, ‘विश्वास और भरोसे के इंजन ने भारत और नेपाल के संबंधों को गति दी है.’ उन्होंने कहा कि पहले एक फैसले को लागू करने में दस बरस लगते थे, अब एक के बाद एक फैसले लागू किए जा रहे हैं.
इस संदर्भ में उन्होंने विभिन्न पनबिजली परियोजनाओं के कार्यान्वयन का जिक्र किया. भारत द्वारा कई छोटी, लेकिन महत्वपूर्ण सहयोग पहलों की घोषणा करते हुए मोदी ने सचल मृदा जांच प्रयोगशाला और युवा प्रतिनिधियों के आवागमन का जिक्र किया.
प्रधानमंत्री ने बताया कि अपनी पिछली यात्रा में उन्होंने जो वादा किया था, उसके अंतर्गत भारत को ई.लाइब्रेरी की स्थापना के संबंध में सुझाव मिले हैं. उन्होंने कहा कि सरकार इसपर विचार कर रही है.
उन्होंने बेहतर संपर्क के लिए दोनो देशों के बीच राजमार्गों के निर्माण की वकालत की और इस संदर्भ में उन्होंने कहा, ‘हम नेपाल के लिए ई.वे के साथ ही हाई-वे का भी निर्माण करेंगे.
इसके अलावा भारत और नेपाल काठमांडो-वाराणसी, जनकपुर-अयोध्या और लुंबिनी-बोध गया के बीच जुड़वा शहर समझौतों पर भी सहमत हुए.
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