बुजुर्गों का सहारा बन रहे हैं युवा किरायेदार

Updated at :16 Jul 2013 1:53 PM
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बुजुर्गों का सहारा बन रहे हैं युवा किरायेदार

टोक्यो: जापान में तेजी से वृद्ध होती आबादी के बीच अकेले रहने वाले बुजुर्गो के घरों में किरायेदार के तौर पर रहने वाले युवाओं की संख्या बढ़ रही है. इससे बुजुर्गों को ना केवल अतिरिक्त आय हो रही है बल्कि वृद्धावस्था में उन्हें सहारा भी मिल रहा है. फुकुई परफेक्चर में रहने वाले 83 वर्षीय […]

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टोक्यो: जापान में तेजी से वृद्ध होती आबादी के बीच अकेले रहने वाले बुजुर्गो के घरों में किरायेदार के तौर पर रहने वाले युवाओं की संख्या बढ़ रही है. इससे बुजुर्गों को ना केवल अतिरिक्त आय हो रही है बल्कि वृद्धावस्था में उन्हें सहारा भी मिल रहा है.

फुकुई परफेक्चर में रहने वाले 83 वर्षीय साचियो यामामोतो ने इस साल जनवरी में फुकुई विश्वविद्यालय के छात्र 19 वर्षीय शुसुके कोन्दो को अपने घर पर किरायेदार के तौर पर रखाना शुरु किया और अब वह अपने फैसले से बहुत खुश हैं. यामामोतो अपनी पत्नी के निधन के बाद से अकेले रह रहे थे.

उन्होंने कहा, ‘‘मैं अब खुश हूं और मुझे शांति मिलती है.’’ कोन्दो ओसाका परफेक्चर का रहने वाला है. यामामोतो के घर आने से पहले वह एक अर्पाटमेंट में अकेले ही रहता था. लेकिन यामामोतो के घर उनके साथ रहना अब उसे भी अच्छा लगता है क्योंकि उसे भी एक साथी मिल गया है. कोन्दो ने कहा, ‘‘मुझे यहां सकून मिलता है.’’

कोन्दो और यामामोतो का यह साथ फुकुई की सरकार और फुकुई विश्वविद्यालय की एक संयुक्त योजना के साथ शुरु हुआ. यहां की सरकार और विश्वविद्यालय ने वृद्ध निवासियों और यहां के विश्वविद्यालय के छात्रों के अकेलेपन को दूर करने के लिए वृद्ध लोगों के घरों में विश्वविद्यालय के छात्रों के रहने को बढ़ावा दिया. याकामोतो पहले ऐसे वृद्ध थे जिन्होंने इस योजना का हिस्सा बनाना स्वीकर किया.

जापान के चुबू क्षेत्र में स्थित फुकुई में बहुत सारे वृद्ध बड़े घरों में अकेले रहेते हैं. सर्दियों के मौसम में जब यहां घरों और परिसरों में बर्फ जम जाती है तो वृद्ध लोगों को बर्फ हटाने में दिक्कत होती है, इसे देखते हुए यह योजना बनायी गयी ताकि वृद्धों की मदद के लिए कोई हो. इस योजना के तहत उन मकान मालिकों को शामिल किया गया जो पूरी तरह स्वस्थ थे. इसके तहत युवा किरायेदारों को 20,000 येन तक का मासिक किराया देना होता है.

इस योजना का उद्देश्य मकान मालिकों के लिए आय के स्त्रोत की व्यवस्था करने से कहीं ज्यादा वृद्धावस्था में उनके लिए संपर्क और सहयोग बढ़ाना है. हालांकि किरोयदारों से मिलने वाले किराए से मकान मालिकों की आर्थिक स्थिति सुधरी है क्योंकि उनके पास अब आय का एक अतिरिक्त स्त्रोत है. लेकिन सबसे बढ़कर उन्हें अकेलेपन के दौर में नई उर्जा से भरपूर संगी मिल रहा है.

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