हत्‍या का आरोपी नहीं, फिर भी मिली कोरियाई जहाज के कैप्टन को 36 साल कैद की सजा

Published at :11 Nov 2014 2:59 PM (IST)
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हत्‍या का आरोपी नहीं, फिर भी मिली कोरियाई जहाज के कैप्टन को 36 साल कैद की सजा

ग्वांग्जू : अप्रैल में डूबे दक्षिण कोरियाई जहाज के कैप्टन को आज 36 साल कैद की सजा सुनायी गयी लेकिन उसे इस त्रासदी में मरने वालों की हत्या के आरोप से मुक्त कर दिया गया. इस घटना में 300 से ज्यादा लोग मारे गए थे और इनमें से अधिकांश स्कूली छात्र थे. पांच माह तक […]

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ग्वांग्जू : अप्रैल में डूबे दक्षिण कोरियाई जहाज के कैप्टन को आज 36 साल कैद की सजा सुनायी गयी लेकिन उसे इस त्रासदी में मरने वालों की हत्या के आरोप से मुक्त कर दिया गया. इस घटना में 300 से ज्यादा लोग मारे गए थे और इनमें से अधिकांश स्कूली छात्र थे.

पांच माह तक चली इस मुकदमे की नाटकीय और पीडादायक सुनवाई के बाद तीन न्यायाधीशों की अदालत ने कहा कि मौत की सजा की मांग करने वाले वकील यह साबित करने में विफल रहे हैं कि सिवोल के कैप्टन ली जुन-सियोक (69) ने लोगों की हत्या के इरादे के साथ काम किया. हालांकि कैप्टन को भारी लापरवाही बरतने और कर्तव्य निवर्हन में खामी का दोषी ठहराया गया. वह जहाज को ऐसे समय में छोडकर भाग गये थे, जब सैंकडों यात्री उसपर फंसे थे. इनमें से अधिकतर स्कूली छात्र थे.

पीडितों के जो संबंधी दक्षिणी शहर ग्वांग्जू के अदालतकक्ष में मौजूद थे, उन्होंने हत्या के आरोप से मुक्ति दिए जाने पर गुस्सा जाहिर किया. एक महिला न्यायाधीशों पर चिल्लाई, न्याय कहां है? जबकि अन्य लोग खुलकर रोने लगे. एक अन्य महिला चिल्लाई, यह सही नहीं है. हमारे बच्चों की जिंदगियों का क्या? ये (प्रतिवादी) तो मौत से भी भयानक सजा के हकदार हैं.

नरसंहार के आरोपों का सामना कर रहे चालक दल के तीन अन्य वरिष्ठ सदस्यों को 15 से 30 साल के बीच की सजा सुनायी गयी. न्यायाधीश लिम जोउंग-योउब ने फैसला सुनाते हुए कहा, हम इस नतीजे पर नहीं पहुंच सके हैं कि प्रतिवादी इस बात को जानते थे कि उनके द्वारा किए गए कार्यों की वजह से सभी पीडित मारे जाएंगे. इसलिए हत्या के आरोपों को स्वीकार नहीं किया जा रहा.

लिम ने इस बात पर जोर दिया कि अगर ली और उनके चालक दल के सदस्यों ने सियोल पोत के संकट में फंसते ही उचित तरीके से काम किया होता तो कई जिंदगियां बचायी जा सकती थीं. उन्होंने कहा, उन्होंने यात्रियों की सुरक्षा की अपनी जिम्मेदारी नहीं निभायी और उन्हें छोड दिया. नतीजन, बहुत से लोग मारे गए. 16 अप्रैल को हुई इस त्रासद घटना के संदर्भ में ली और उनके चालक दल की सार्वजनिक रुप से बहुत बदनामी हुई थी.

कई कानूनी विशेषज्ञों ने उनकी निष्पक्ष सुनवाई होने पर संशय जताया था. दक्षिणी कोरिया की मीडिया में आई खबरों में मुकदमा शुरु होने से पहले ही दोषी ठहराए जाने का पूर्वाग्रह हावी दिखा. राष्ट्रपति पार्क ग्यून हेई ने सार्वजनिक तौर पर चालक दल के इस कदम को हत्या के समान बताया था. जहाज छोडने के साथ-साथ उनकी निंदा इस बात को लेकर भी की गयी कि जब जहाज खतरनाक ढंग से झुक गया तब भी उन्होंने यात्रियों को अपनी-अपनी जगह पर बने रहने के लिए कहा था.

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