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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिकी दौरे से जुड़े आठ अहम तथ्य

Updated at : 07 Jun 2016 5:48 PM (IST)
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिकी दौरे से जुड़े आठ अहम तथ्य

इंटरनेट डेस्क 9-10 जून को वियना में न्यूक्लियर्स सप्लायर्स ग्रुप (एनएसजी) की बैठक होने जा रही है. इसके पूर्व भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा मुलाकात करेंगे. पिछले दो वर्षों में नरेंद्र मोदी की यह दूसरी व्हाइट हाउस यात्रा है. बदलते दौर में भारत और अमेरिका पहले से ज्यादा करीब है. जार्ज […]

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इंटरनेट डेस्क

9-10 जून को वियना में न्यूक्लियर्स सप्लायर्स ग्रुप (एनएसजी) की बैठक होने जा रही है. इसके पूर्व भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा मुलाकात करेंगे. पिछले दो वर्षों में नरेंद्र मोदी की यह दूसरी व्हाइट हाउस यात्रा है. बदलते दौर में भारत और अमेरिका पहले से ज्यादा करीब है. जार्ज बुश और मनमोहन सिंह के बीच हुए सिविल न्यूक्लियर डील के बाद राष्ट्रपति बराक ओबामा का भारत को न्यूक्लियर्स सप्लायर्स ग्रुप (NSG) के लिए तगड़ा समर्थन हासिल है.
मोदी और ओबामा की दोस्ती से परवान चढ़ा भारत-अमेरिकी संबंध नये दौर की नयी कहानी लिख पायेगी या महज एक कूटनीति का हिस्सा बनकर रह जायेगी? भारत के पीएम मोदी व अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा के बीच किन-किन विषयों पर हो सकती है बातचीत? ये ऐसे अहम सवाल हैं जिनके बारे में हर भारतीय जानना चाहता है. आइए जानते है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिकी यात्रा से जुड़े आठ तथ्य
1. बराक ओबामा अपने कार्यकाल के अंतिम दौर में है. मंगलवार को व्हाइट हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी मुलाकात होगी. 2014 में नरेंद्र मोदी जब अमेरिकी दौरे पर थे, तो उस दौरान उनका उपवास चल रहा था लेकिन इस बार वो अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ लंच भी करेंगे.
2. नरेंद्र मोदी बुधवार को अमेरिकी कांग्रेस के संयुक्त सत्र को संबोधित करेंगे. ऐसा करने वाले वो देश के पांचवे प्रधानमंत्री होंगे.
3.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका में पेरिस जलवायु सम्मेलन के दौरान हुए करार के पालन को लेकर घोषणा कर सकते हैं. ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में जिन देशों की 50 प्रतिशत हिस्सेदारी है, वो लीगल पेपरवर्क संयुक्त राष्ट्रसंघ को सौपेंगे. इस डील के सहमति पत्र में भारत के हस्ताक्षर होने के बाद यह सुनिश्चित हो जायेगा कि अगले अमेरिकी राष्ट्रपति के पदभार ग्रहण के पहले से ही यह डील प्रभावी हो जायेगा.
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4. दोनों देशों के बीच सुरक्षा के क्षेत्र में बड़ी सहमति होने की संभावनाएं हैं. भारत जहां एक ओर अमेरिका के साथ मिलट्री पार्टनरशिप बढ़ाने को लेकर उत्सुक है वहीं अमेरिकी भी दक्षिण चीन सागर में चीन के बढ़ते प्रभाव और उससे उत्पन्न खतरों पर गंभीरता से मंथन कर सकता है.
5. अमेरिकी यात्रा को लेकर ऐसी संभावना जतायी जा रही है कि मिलट्री लॉजिस्टिक डील पर हस्ताक्षर हो सकते हैं. इसके अलावा अमेरिका भारत के साथ कोई बड़ी डिफेन्स डील भी कर सकता है. अमेरिका चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने की कोशिश करेगा.
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6. ऊर्जा क्षेत्र में हो सकते है समझौते : भारत और अमेरिका के बीच न्यूक्लियर समझौते के अलावा सौर ऊर्जा व पवन ऊर्जा को लेकर भी बात हो सकती है. दोनों देशों के बीच पहले भी आर्थिक मोर्चे पर समझौते हुए थे.
7. भारत तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वाला देश है. हाल ही में अमेरिका के बड़ी कंपनियों के सीइओ सत्या नडेला (माइक्रोसॉफ्ट), टिम कुक ( एप्पल) व सुंदर पिचाई ( गूगल) ने भारत का दौरा किया था.
8. ओबामा अपने कार्यकाल के अंतिम दौर में हैं, उनका ट्रैक रिकार्ड भारत के पक्ष में रहा है. भारत के साथ बढ़ती दोस्ती की वजह से अमेरिकी कांग्रेस के नेताओं ने उनकी आलोचना भी की है. अब वो जब अपने कार्यकाल के अंतिम दौर में हैं तो यह देखना जरूरी है कि वो किस तरह के फैसले लेते हैं. अगले साल अगर डोनॉल्ड ट्रंप राष्ट्रपति बनते हैं तो उनका क्या रुख रहेगा. यह कहना बेहद मुश्किल है.
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