आज तो नेता ही वोटरों को लुभाने के लिए पैसे देते हैं

जमाना बहुत तेजी से बदल गया है. पहले एक फोन लगाने में घंटों लग जाते थे. राज्य से बाहर फोन करने के लिए ट्रंक कॉल बुक किया जाता था. अब मोबाइल से तुरंत कही भी बात हो जाती है. चुनाव में भी संचार क्षेत्र की तरह ही बदलाव आया है, लेकिन यह बदलाव सकारात्मक नहीं […]
जमाना बहुत तेजी से बदल गया है. पहले एक फोन लगाने में घंटों लग जाते थे. राज्य से बाहर फोन करने के लिए ट्रंक कॉल बुक किया जाता था. अब मोबाइल से तुरंत कही भी बात हो जाती है. चुनाव में भी संचार क्षेत्र की तरह ही बदलाव आया है, लेकिन यह बदलाव सकारात्मक नहीं है. इलेक्शन के बढ़ते खर्च के रूप में इसके साइडइफेक्ट्स दिखने लगे हैं.
पहले के चुनाव में कार्यकर्ता जिम्मेवारी के साथ काम करते थे. ऐसे कार्यकर्ताओं को पार्टी में अहमियत दी जाती थी. परंतु, आज न तो कार्यकर्ताओं की अहमियत है और न वह जिम्मेवारी पूर्वक काम ही करते हैं. अब उनका स्थान पीआर एजेंसियों ने लिया है. एक ही एजेंसी कई दलों का प्रचार करती हैं.
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By Prabhat Khabar Digital Desk
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