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झारखंड विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की जीत से पार्टी मज़बूत हुई या कसर बाक़ी है?

Updated at : 25 Dec 2019 11:02 PM (IST)
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झारखंड विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की जीत से पार्टी मज़बूत हुई या कसर बाक़ी है?

<figure> <img alt="सोनिया, राहुल और प्रियंका" src="https://c.files.bbci.co.uk/D12E/production/_110305535_gettyimages-1020194118.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>कांग्रेस पार्टी झारखंड के विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद बीते एक साल में पाँच राज्यों की सरकार में शामिल हो गई है.</p><p>ये राज्य मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और झारखंड हैं. </p><p>लोकसभा चुनावों से पहले हुए मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ […]

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<figure> <img alt="सोनिया, राहुल और प्रियंका" src="https://c.files.bbci.co.uk/D12E/production/_110305535_gettyimages-1020194118.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>कांग्रेस पार्टी झारखंड के विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद बीते एक साल में पाँच राज्यों की सरकार में शामिल हो गई है.</p><p>ये राज्य मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और झारखंड हैं. </p><p>लोकसभा चुनावों से पहले हुए मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने अपने दम पर जीत हासिल की है. </p><p>वहीं, महाराष्ट्र और झारखंड में कांग्रेस पार्टी गठबंधन सरकार में शामिल हुई. हरियाणा में भी कांग्रेस का प्रदर्शन बेहतर रहा.</p><p>ऐसे में ये सवाल उठना लाज़िमी है कि क्या एक संगठन और राजनीतिक पार्टी के रूप में कांग्रेस अपनी कमियों को धीरे-धीरे दूर कर रही है और ये चुनावी नतीजे इस बात का प्रमाण हैं?</p><figure> <img alt="कांग्रेस पार्टी" src="https://c.files.bbci.co.uk/1159D/production/_110296017_hi058795852.jpg" height="549" width="976" /> <footer>AFP</footer> </figure><h1>कांग्रेस के आने वाले दिन कैसे होंगे?</h1><p>झारखंड में जीत के बाद कांग्रेस ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से ट्वीट किया, &quot;झारखंड विधानसभा चुनाव के नतीजे कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं की कड़ी मेहनत – समर्पण और कांग्रेस अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गांधी और राहुल गांधी के अविश्वसनीय मार्गदर्शन का प्रमाण है. झारखंड ने भारत में सत्य, लोकतंत्र और एकता की जीत का मार्ग प्रशस्त कर दिया है.&quot;</p><p><a href="https://twitter.com/INCIndia/status/1209361481789136898">https://twitter.com/INCIndia/status/1209361481789136898</a></p><p>कांग्रेस ने इस ट्वीट में भविष्य के लिए उम्मीदें भी जताईं.</p><p>लेकिन कांग्रेस की राजनीति को क़रीब से देखने वालीं वरिष्ठ पत्रकार कल्याणी शंकर मानती हैं कि इस जीत का मतलब ये बिलकुल नहीं है कि कांग्रेस एक बार फिर अपने पैरों पर खड़ी हो रही है.</p><p>वो कहती हैं, &quot;मैं ये नहीं कह सकती कि झारखंड चुनाव में जेएमएम के साथ बने गठबंधन की जीत कांग्रेस पार्टी का पुनरुत्थान है. तीन राज्यों में जीत दर्ज करने के बाद ये बात ज़रूर शुरू हुई थी. अगर बीते चार-पांच सालों में कांग्रेस के प्रदर्शन को देखें तो ये नज़र आता है कि जहां एक ओर लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी लगातार बेहतर प्रदर्शन करने में चूक रही है. लेकिन इसके बाद लोकसभा चुनाव के नतीज़े आए और फिर ये बात ख़त्म हो गई.&quot; </p><p>&quot;झारखंड चुनाव में भी लोग कह रहे हैं कि ये जीत हेमंत सोरेन की वजह से हुई है. ऐसे में ये कहना थोड़ा जल्दी होगा. अभी दिल्ली के चुनाव आने वाले हैं जिसके नतीज़े बताएंगे कि ऐसा सही है या नहीं. हालांकि ये बात मैं कह सकती हूं कि ये जीत कांग्रेस पार्टी और इसके कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने में एक भूमिका अदा करेगी.&quot;</p><p>लेकिन बीते कुछ समय में विधानसभा चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहतर होता दिख रहा है. </p><figure> <img alt="राहुल गांधी" src="https://c.files.bbci.co.uk/163BD/production/_110296019_hi058640290.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><h1>अपने दम पर सरकार बनाने में फेल</h1><p>हरियाणा के विधानसभा चुनावों ये ट्रेंड देखने को मिला है. </p><p>मगर महाराष्ट्र और झारखंड में कांग्रेस अपने दम पर सरकार बनाने में सफल नहीं हुई. </p><p>शंकर इसके लिए कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व को ज़िम्मेदार मानती हैं. </p><p>वे कहती हैं, &quot;विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी इससे बेहतर प्रदर्शन कर सकती है लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है. इसकी वजह कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व है. कांग्रेस पार्टी ने दूसरे स्तर पर नेताओं को विकसित नहीं किया. अगर इस पार्टी के इतिहास में जाएं तो नेहरू के ज़माने में उनके साथ कामराज, संजीवा रेड्डी और पीसी राय जैसे नेता थे. लेकिन इंदिरा गांधी का दौर आने के बाद दूसरी पंक्ति के नेताओं को विकसित किया जाना बंद हो गया.&quot; </p><p>&quot;इंदिरा गांधी ऐसा नहीं करना चाहती थीं. उन्होंने जिसे नामित कर दिया, राज्यों में भी वहीं लोग बड़े नेता बन गए. ये भी कुछ दिन तक चलता रहा. लेकिन अब जो नेता सामने आ रहे हैं, उनका राज्यों में जनाधार नहीं है. वे खुद अपनी सीट ही जीतने में सक्षम नहीं हैं. ऐसे में जब राज्यों में पार्टी का संगठन ही नहीं होगा तो कांग्रेस का पुनरुत्थान कैसे होगा.&quot;</p><figure> <img alt="कांग्रेस पार्टी" src="https://c.files.bbci.co.uk/CB65/production/_110296025_hi058795853.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><h1>केंद्रीय नेतृत्व की ख़ामियां</h1><p>कांग्रेस की राजनीति को करीब से देखने समझने वाले वरिष्ठ पत्रकार जतिन गांधी भी झारखंड में कांग्रेस वाले गठबंधन की जीत को कांग्रेस का पुनरुत्थान नहीं मानते हैं. </p><p>जतिन गांधी बताते हैं, &quot;झारखंड में कांग्रेस की जीत को इस पार्टी का पुनरुत्थान नहीं कहा जा सकता. क्योंकि साल की शुरुआत में कांग्रेस पार्टी को तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव में जीत हासिल हुई. लेकिन इसके बाद लोकसभा चुनाव में कांग्रेस सिर्फ़ 55 सीटों पर सिमट गई. ऐसे में इसे कांग्रेस का पुनरुत्थान नहीं कहा जा सकता है.&quot;</p><p>&quot;इससे पहले जब 2015 में बिहार विधानसभा चुनाव से पहले नीतीश और लालू एक साथ आए थे, तब कांग्रेस ने अपना समर्थन दिया था. इसके बाद महागठबंधन बना था. तब भी ऐसी ही स्थितियां पैदा हुई थीं. झारखंड चुनाव में बीजेपी पर अंक गणित हावी हुआ है. ऐसे में कांग्रेस वाले इसे अपनी पार्टी का पुनरुत्थान कह सकते हैं लेकिन राजनीतिक विश्लेषक ये नहीं कह सकते हैं.&quot;</p><figure> <img alt="कांग्रेस पार्टी" src="https://c.files.bbci.co.uk/2F25/production/_110296021_hi058796759.jpg" height="549" width="976" /> <footer>EPA</footer> </figure><h1>बड़े मुद्दों पर कांग्रेस की भूमिका</h1><p>राष्ट्रीय पार्टी की हैसियत रखने वाली कांग्रेस एनआरसी के मुद्दे पर लोकसभा और राज्यसभा में बीजेपी को घेरती हुई नज़र आई. </p><p>लोकसभा में कांग्रेस नेता मनीष तिवारी और राज्य सभा में आनंद शर्मा ने इस विधेयक का विरोध किया. </p><p>इसके बाद से लगातार कांग्रेस नेता इस क़ानून के प्रति अपना विरोध दर्ज कर रहे हैं.</p><p>हालांकि, वरिष्ठ पत्रकार जतिन गांधी कांग्रेस के विरोध को नाकाफ़ी मानते हैं.</p><p>वे कहते हैं, &quot;कांग्रेस पार्टी महज़ प्रेस कॉन्फ्रेंस करती रही है, बड़े नेता ट्वीट करते रहे हैं. ऐसा लग ही नहीं रहा है कि कांग्रेस ने किसी तरह की पहल की है.&quot;</p><figure> <img alt="कांग्रेस पार्टी" src="https://c.files.bbci.co.uk/7D45/production/_110296023_hi058795851.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><h1>कांग्रेस का रिवाइवल कैसे हो सकता है?</h1><p>संगठन के लिहाज़ से कांग्रेस की कमियों और इनमें सुधार पर जतिन गांधी कहते हैं कि जब कांग्रेस राज्यों में उतरते हुए स्थानीय नेताओं पर भरोसा करती है तो उसे बेहतर परिणाम मिलते हैं. </p><p>वे बताते हैं, &quot;कांग्रेस पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को ये समझना चाहिए कि जिन लोकतांत्रिक मूल्यों की बात वह करती है, उन्हें पार्टी के अंदर भी दोबारा विकसित किया जाना चाहिए. ऐसा करते हुए राज्य स्तर पर कांग्रेस पार्टी को मजबूत किया जाए. ये करने से एक-एक राज्य उन खंबों का रूप ले सकता है जिसके ऊपर कांग्रेस पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की छत को खड़ा किया जा सके.&quot;</p><p>&quot;लेकिन अगर कांग्रेस फिर से वैसे ही कहेगी कि वो एक ही परिवार की पूजा करें, कोई उनसे सवाल-जवाब नहीं कर सकता. और फिर कांग्रेस पार्टी ये उम्मीद करेगी कि राहुल गांधी या सोनिया गांधी या प्रियंका गांधी मिलकर सारी सीटें जिता दें तो ऐसा नहीं होगा और इसके संकेत लगातार मिल रहे हैं.&quot;</p><p>राहुल गांधी के अध्यक्ष पद छोड़ने के कई महीने बीतने के बाद भी सोनिया गांधी ही कांग्रेस पार्टी की अंतरिम अध्यक्षा बनी हुई हैं. </p><p>ऐसे संकेत नहीं मिल रहे हैं कि गांधी परिवार से परे राज्य के स्तर से आने वाले किसी नेता को अध्यक्ष पद की कमान दी जाए. </p><p><strong>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप </strong><a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi">यहां क्लिक</a><strong> कर सकते हैं. आप हमें </strong><a href="https://www.facebook.com/bbchindi">फ़ेसबुक</a><strong>, </strong><a href="https://twitter.com/BBCHindi">ट्विटर</a><strong>, </strong><a href="https://www.instagram.com/bbchindi/">इंस्टाग्राम</a><strong> और </strong><a href="https://www.youtube.com/bbchindi/">यूट्यूब</a><strong> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</strong></p>

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