छत्तीसगढ़ एम्स में मरीज़ों से उनका धर्म पूछे जाने पर विवाद

<p>छत्तीसगढ़ के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स में आने वाले मरीज़ों से उनके धर्म की जानकारी लिए जाने के मुद्दे पर सवाल उठ रहे हैं. </p><p>मरीज़ों का कहना है कि आख़िर बीमारी के इलाज में धर्म का क्या काम है.</p><p>जशपुर के रहने वाले अजय तिग्गा के लिये यह समझना मुश्किल है कि आख़िर इलाज […]
<p>छत्तीसगढ़ के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स में आने वाले मरीज़ों से उनके धर्म की जानकारी लिए जाने के मुद्दे पर सवाल उठ रहे हैं. </p><p>मरीज़ों का कहना है कि आख़िर बीमारी के इलाज में धर्म का क्या काम है.</p><p>जशपुर के रहने वाले अजय तिग्गा के लिये यह समझना मुश्किल है कि आख़िर इलाज के लिये किसी को धर्म बताना क्यों ज़रूरी है.</p><p>अजय कहते हैं, "नाम, पता, उम्र तक पूछना समझ में आता है. आर्थिक आधार पर इलाज संबंधी सुविधा के लिये बीपीएल के बारे में भी जानकारी ली जा सकती है. कुछ ख़ास जातियों में होने वाली बीमारी के लिहाज़ से जाति की जानकारी भी पूछने का औचित्य समझ में आता है. लेकिन बीमारी का धर्म से क्या लेना-देना?"</p><p>आदिवासी बहुल जशपुर के रहने वाले अजय तिग्गा अपने एक परिजन को लेकर रायपुर के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स पहुंचे हुये थे. </p><p>यहां मरीज़ को भर्ती करने से पहले जो जानकारियां मांगी गईं, उनमें मरीज़ के धर्म को लेकर भी सवाल थे.</p><p>छत्तीसगढ़ एम्स में मरीज़ों के धर्म संबंधी जानकारी एकत्र किये जाने का मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स में कार्यरत वरिष्ठ डॉक्टरों से धर्म और जाति का विवरण मांगा गया है.</p><hr /> <ul> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-47025235">देश के हर ग़रीब को मिलेगी न्यूनतम आमदनी: राहुल गांधी</a></li> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-43727166">अलग धर्म की मांग करने वाले लिंगायत क्या हैं?</a></li> </ul><hr /><h1>एम्स ने मानी ग़लती</h1><p>हालांकि, दिल्ली स्थित एम्स ने कहा है कि वरिष्ठ चिकित्सकों से उनकी जानकारी के लिये जो फॉर्म वितरित किया गया था, उसमें जाति और धर्म का विवरण ग़लती से जोड़ दिया गया था जिसका पता चलने के बाद तुरंत उसे हटा दिया गया.</p><p>लेकिन छत्तीसगढ़ में एम्स के चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर अजय दानी का कहना है कि छत्तीसगढ़ में मरीज़ों की जो जानकारी एकत्र की जा रही है, वह केंद्रीय स्तर पर हो रहा है. </p><p>उन्होंने बीबीसी से बातचीत में कहा, "भारत सरकार के नेशनल इंफार्मेशन सेंटर की ओर से जो फार्मेट बनाया गया है, उसमें ही यह जानकारी डालने का प्रावधान है. हर मरीज़ का धर्म इस फॉर्मेट में डालना अनिवार्य है."</p><p>डॉक्टर अजय दानी का कहना है कि कई बार संसद में इस तरह के सवाल पूछे जाते हैं या फिर सूचना के अधिकार के तहत भी ऐसी जानकारी मांगी जाती है. ऐसे में मरीज़ों के धर्म की जानकारी रखना ज़रुरी है.</p><p>इनका दावा है कि इस जानकारी को किसी और को केवल संख्यात्मक रुप से ही बताया जाता है, इसलिये इसे निजता के हनन के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिये.</p><p><strong>गंभीर </strong><strong>मामला</strong></p><p>हालांकि, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के अधिवक्ता माजिद अली इसे एक गंभीर मसला मानते हैं. उनका कहना है कि आधार कार्ड के तर्ज़ पर सरकार हर तरफ़ से लोगों की व्यक्तिगत जानकारियां एकत्र करने का काम कर रही है.</p><p>माजिद अली कहते हैं, "पिछले कुछ सालों में सरकार ने लोगों की व्यक्तिगत जानकारियों को एकत्र करने के लिये एक के बाद एक तरीक़े निकाले हैं. एम्स भी जिस तरीक़े से लोगों की जानकारियां एकत्र कर रहा है, उसे इसी परिप्रेक्ष्य में देखे जाने की ज़रुरत है."</p><p>दूसरी ओर नागरिक संगठन भी एम्स द्वारा मरीज़ों की धार्मिक जानकारियों को एकत्र किये जाने को ग़लत मानते हैं. </p><p>छत्तीसगढ़ संयुक्त नागरिक संघर्ष समिति के संयोजक अखिलेश एडगर कहते हैं, "यह चकित करने वाली बात है कि अब सरकार मरीज़ों से धर्म की जानकारी एकत्र कर रही है. एक केंद्रीय संस्थान अगर इस तरीक़े से धर्म की जानकारी एकत्र कर रहा है, तो यह गंभीर मामला है."</p><p>कुछ संगठनों का कहना है कि वे इस मामले को अदालत तक ले जायेंगे. ज़ाहिर है, अगर ऐसा हुआ तो धर्म, बीमारी और इलाज़ के रिश्तों को लेकर आने वाले दिनों में कुछ नई बहसें भी शुरु हो सकती हैं.</p><p><strong>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप </strong><a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi">यहां क्लिक</a><strong> कर सकते हैं. आप हमें </strong><a href="https://www.facebook.com/bbchindi">फ़ेसबुक</a><strong>, </strong><a href="https://twitter.com/BBCHindi">ट्विटर</a><strong>, </strong><a href="https://www.instagram.com/bbchindi/">इंस्टाग्राम</a><strong> और </strong><a href="https://www.youtube.com/bbchindi/">यूट्यूब</a><strong> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</strong></p>
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