अटल बिहारी वाजपेयी स्मृति शेष : अमेरिका और पाकिस्तान से संबंध सुधारे, लाये अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नया आयाम
Updated at : 17 Aug 2018 7:38 AM (IST)
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कमर आगा अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार अटल बिहारी वाजपेयी के राजनीतिक जीवन में उनकी अंतरराष्ट्रीय राजनीति बहुत अच्छी थी. खासतौर पर इस्ट एशिया और दक्षिण इस्ट एशिया के संबंध में उनकी ‘लुक इस्ट पॉलिसी’ बहुत मायने रखती है. उनका मानना था कि इन क्षेत्रों के साथ व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंध पहले से ही रहे हैं […]
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कमर आगा
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार
अटल बिहारी वाजपेयी के राजनीतिक जीवन में उनकी अंतरराष्ट्रीय राजनीति बहुत अच्छी थी. खासतौर पर इस्ट एशिया और दक्षिण इस्ट एशिया के संबंध में उनकी ‘लुक इस्ट पॉलिसी’ बहुत मायने रखती है. उनका मानना था कि इन क्षेत्रों के साथ व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंध पहले से ही रहे हैं और इनकी इकोनॉमी बहुत अच्छी है. इसलिए इनके साथ हमारे अच्छे रिश्ते होने चाहिए.
जब वह विदेश मंत्री थे, तब उनका मानना था कि रूस के साथ ज्यादा संबंध नहीं होने चाहिए, हालांकि कुछ देशाें जैसे इस्राइल, अमेरिका आदि के साथ संबंध सुधारने की कोशिश की. लेकिन, जब वह प्रधानमंत्री बने, तब उन्होंने अपना विचार बदला और अरबों के साथ नजदीकियों पर बल देना शुरू किया. यह उनकी अंतरराष्ट्रीय राजनीति के लिए जरूरी था, क्योंकि भारत का तेल आयात अरबाें से ही जुड़ा हुआ है.
अटल बिहारी से पहले के दौर में अमेरिका अपनी नीति में भारत-पाक को एक-साथ जोड़कर ही देखता था, लेकिन अटल बिहारी ने पहल की कि भारत को पाकिस्तान से अलग करके अमेरिका देखे. इस कोशिश ने रंग लाया और आगे चलकर अमेरिका ने पाकिस्तान को अफगानिस्तान के साथ जोड़ लिया. यह कहना ज्यादा अच्छा होगा कि वाजपेयी ने अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ भारत के संबंधों को एक मजबूत अौर नया आयाम दिया.
वाजपेयी ने हमेशा पड़ोसी देशों को साथ लेकर या उनके साथ चलने की कोशिश की. इस संबंध में पाकिस्तान एक बड़ा उदाहरण है. वाजपेयी ही थे, जिन्होंने फरवरी 1999 में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के साथ द्विपक्षी समझौते ‘लाहौर डिक्लरेशन’ पर हस्ताक्षर किया. इस समझौते के तहत यह कहा गया कि भारत-पाक के बीच जितने भी मसले-मामले हैं, उन सबको आपस में दोनों देश मिलकर हल करने की काेशिश करेंगे.
उसके बाद ही कश्मीर मामले पर बातचीत शुरू हुई और धीरे-धीरे दोनों देशों के बीच आसानी से वीजा तक मिलने लगे, जो पहले मुश्किल से मिलते थे. लेकिन, उसके बाद पाकिस्तान ने हमें कारगिल का युद्ध दे दिया. हालांकि वह भारत से हार गया, लेकिन उसके बाद भारत-पाक संबंध बिगड़ते चले गये. लेकिन, वाजपेयी ने भारत-पाक के बीच विश्वास बहाली की कोशिशें कम नहीं की.
भारत की विदेश नीति में पाकिस्तान और अमेरिका से संबंध सुधारने में वाजपेयी का बड़ा योगदान रहा है. पश्चिमी देशों का रवैया भी इन्हीं के यानी एनडीए के शासनकाल में बदला और देखा जाये, तो मनमोहन िसंह ने यूपए एक और दो के अपने कार्यकाल में वाजपेयी की ज्यादातर नीतियों को आगे बढ़ाया.
वाजपेयी बहुत निडर नेता थे और इसकी सबसे अच्छी मिसाल पोखरण में परमाणु परीक्षण कार्यक्रम ‘पोखरण-2’ है. वे जानते थे कि इससे अमेरिका या बाकी देशों का प्रतिबंध झेलना पड़ेगा, लेकिन फिर भी उन्होंने हिम्मत दिखायी और परमाणु परीक्षण कर भारत को सामरिक रूप से सक्षम बनाया.
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