Varanasi News: काशी की आबोहवा में घुला प्रदूषण, महज दो दिन में कृत्रिम फेफड़ा हुआ धुंधला
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 12 Apr 2022 7:04 PM
काशी की हवा में मौजूद जहरीले प्रदूषण के बारे में क्लाइमेट एजेंडा की निदेशक एकता शेखर ने कहा, महज दो दिन पहले ही स्थापित किये गए उच्च क्षमता वाले फिल्टर युक्त सफेद कृत्रिम फेफड़े का धुंधला (ग्रे) हो जाना प्रशासनिक दावों की कलई खोलता है.
Varanasi News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के अस्सी घाट पर स्वच्छ पर्यावरण जागरूकता विषय पर आयोजित ‘घाट वाक’ के अंतर्गत वायु प्रदूषण की जांच के लिए लगाए गए फिल्टर युक्त कृत्रिम फेफड़े महज 48 घण्टे में ही सफेद रंग की जगह धुंधले पड़ गए. इससे साफ तौर पर पता चलता है कि स्वच्छ माने जाने वाले अस्सी घाट पर प्रदूषण का बुरा प्रभाव है.

राष्ट्रीय स्वच्छ हवा कार्य के तहत जागरूकता फैलाने वाले इस कार्यक्रम में आम जन में वायु प्रदूषण की समझ पैदा करने के उद्देश्य से कृत्रिम फेफड़े की प्रदर्शनी स्थापित की गयी है. जिसे रविवार को ही शहर के जाने माने चिकित्सक डॉ आर एन बाजपेई, पर्यावरण एवं धारणीय विकास संस्थान के निदेशक डॉ ए एस रघुवंशी और योगिराज पंडित विजय प्रकश मिश्रा ने क्लाइमेट एजेंडा की निदेशक एकता शेखर के साथ स्थापित किया था.
Also Read: Varanasi News: जलती चिताओं के बीच नगर वधुओं ने सजाई नृत्य की महफिल, काशी की अनोखी है ये परंपराप्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र की हृदय स्थली अस्सी घाट पर वायु प्रदूषण की स्थिति चिंताजनक है, क्योंकि क्लाइमेट एजेंडा द्वारा वाराणसी के स्वच्छ समझे जाने वाले अस्सी घाट पर स्थापित किये गए उच्च क्षमता वाले फ़िल्टर युक्त कृत्रिम फेफड़े महज दो दिन के अंदर धुंधले हो गए. ज्ञात हो कि आम जन में वायु प्रदूषण की समझ पैदा करने के उद्देश्य से इस कृत्रिम फेफड़े की प्रदर्शनी स्थापित की गयी है. इसके द्वारा देखना यह था कि शहर के सबसे साफ़ माने जाने वाले अस्सी घाट पर प्रदूषण के बारे में प्रशासनिक दावों के पीछे की सच्चाई क्या है?
Also Read: शिव की नगरी काशी में दिखी गंगा-जमुनी तहजीब, राम बारात यात्रा पर मुस्लिमों ने बरसाए फूल, पिलाया पानीकाशी की हवा में मौजूद जहरीले प्रदूषण के बारे में क्लाइमेट एजेंडा की निदेशक एकता शेखर ने कहा, महज दो दिन पहले ही स्थापित किये गए उच्च क्षमता वाले फिल्टर युक्त सफेद कृत्रिम फेफड़े का धुंधला (ग्रे) हो जाना प्रशासनिक दावों की कलई खोलता है. भीषण गर्मी के समय में प्रदूषण का स्तर स्वाभाविक रूप से कम हो जाता है. ऐसे समय में शहर के स्वच्छतम क्षेत्र की हालत पूरे शहर के वायु प्रदूषण के आंकड़ों की पोल खोलती है. प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में केंद्र सरकार द्वारा घोषित राष्ट्रीय कार्ययोजना का लापरवाही भरा अनुपालन वायु प्रदूषण के विषय पर प्रशासन और शासन का गंभीर न होना स्पष्ट करता है.
वाराणसी में बीएचयू स्थित सर सुंदर लाल अस्पताल के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ ओम शंकर ने कहा, हम दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में यूं ही नहीं शामिल हैं. महज दो दिनों में कृत्रिम फेफड़ों का ग्रे हो जाना साबित करता है कि शहर और आस पास रहने वाले लोगों का दिल और फेफड़ा वायु प्रदूषण की जद में है. बेहद जरूरी है कि इसे एक स्वस्थ आपातकाल मानते हुए जरूरी कदम उठाए जाएं.
यह अब बेहद जरूरी हो गया है कि पर्यावरण की बेहतरी के लिए परिवहन को प्रमुख रूप से स्वच्छ बनाया जाए और सभी विभाग मिलकर स्वच्छ वायु कार्ययोजना का क्रियान्वयन सुनिश्चित करें.
रिपोर्ट- विपिन सिंह, वाराणसी
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