Lata Mangeshkar Death: जब लता मंगेशकर के मुंह से ये शब्द सुनकर जद्दनबाई ने कही थी ये बात, पढ़ें वो किस्सा

'स्वर कोकिला' लता मंगेशकर के निधन से पूरी दुनिया शोक में डूबी है. देश में ही नहीं बल्कि दुनियाभर में अपनी गायकी के लिए जानी जाती हैं.
‘स्वर कोकिला’ लता मंगेशकर के निधन से पूरी दुनिया शोक में डूबी है. देश में ही नहीं बल्कि दुनियाभर में अपनी गायकी के लिए जानी जाती हैं. इसमें कोई संदेह नहीं कि लता मंगेशकर देश के उन चुनिंदा कलाकारों में से हैं जिन्होंने देश का नाम गर्व से ऊंचा किया है. लता मंगेशकर ने 40 के दशक से ही फिल्मों में गाने गाना शुरू कर दिया था. उन्होंने किशोर कुमार, मोहम्मद रफी, मन्ना डे, येसुदास, नौशाद और एसडी बर्मन के साथ कई सुपरहिट गीत गाये जिसे आज भी लोग सुनना पसंद करते हैं.
संगीत की दुनिया में लता मंगेशकर के सफर को उनके ही शब्दों में यतींद्र मिश्र ने अपनी किताब ‘लता- सुर गाथा’ में पेश किया है. इस पुस्तक में शामिल एक दिलचस्प प्रसंगों में शामिल एक प्रसंग फिल्म के गाने ‘महल’ के गाने आयेगा आनेवाला से जुड़ा है.
‘सन् 1948-49 का जमाना था, तब रिर्कोडिंग के लिए वैसे स्टूडियो नहीं होते थे, न ही अलग से कोई ऐसी व्यवस्था होती थी जैसे बाद में स्टूडियो बनाकर होने लगी. अक्सर गानों को कैद करने के लिए खाली स्टूडियो, पेड़ों के पीछे की जगह या फिर बड़ी गाड़ी ट्रक के अंदर बैठकर किया जाता था.’
लता मंगेशकर बताती हैं,’ फिल्म लाहौर की शूटिंग चल रही थी और बॉम्बे टॉकीज़ में जद्दनबाई और नरगिस दोनों मौजूद थीं. जब मैंने स्टूडियों में यह गाना रिकॉर्ड करना शुरू किया तो जद्दनबाई बड़े ध्यान से यह गाना सुनतीं रहीं. बाद में मुझे बुलाकर कहा- ‘इधर आओ बेटा, क्या नाम है तुम्हारा ?’ जी लता मंगेशकर.’
“अच्छा तुम मराठन हो ना?’ ‘जी हां, ‘ इस पर जद्दनबाई ख़ुश होते हुए बोलीं- ‘माशाअल्लाह क्या बग़ैर कहा है.’ “दीपक बग़ैर कैसे परवाने जल रहे हैं… में ‘बग़ैर’ सुनकर तबीयत ख़ुश हो गई. ऐसा तलफ़्फ़ुज़ हर किसी का नहीं होता बेटा. तुम निश्चित ही एक रोज़ बड़ा नाम करोगी.” लता मंगेशकर यह शाबाशी पाकर बेहद खुश हुईं. मगर उनके भीतर आनंद के साथ थोड़ा डर भी प्रवेश कर गया था. इस डर के बारे में वो बताती हैं, “बाप रे! इतने बड़े-बड़े लोग मेरे काम को सुनने आ रहे हैं और इतने ध्यान से एक-एक शब्द पर सोचते-विचारते हैं.”
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बता दें कि, ‘आएगा आने वाला…आएगा’ लता मंगेशकर का शुरुआती सुपरहिट गीत था, लेकिन इस गीत के रेकॉर्ड के बाज़ार में आने से पहले संगीतकार खेमचंद प्रकाश का निधन हो गया था. इस बात का जिक्र लता मंगेशकर दुखी मन से करती हैं कि, काश उनके करियर में पहली बार सुर्खियों में आया और प्रसिद्ध हुआ गीत रचनेवाला व्यक्ति उसे देखने के लिए मौजूद होता.
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