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UP Chunav 2022: अखिलेश यादव के साथ आए चंद्रशेखर तो बिगड़ेगा मायावती का खेल! मुलाकात से हलचल हुई तेज

Updated at : 14 Jan 2022 8:39 AM (IST)
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UP Chunav 2022: अखिलेश यादव के साथ आए चंद्रशेखर तो बिगड़ेगा मायावती का खेल! मुलाकात से हलचल हुई तेज

UP Chunav 2022: आजाद समाज पार्टी के नेता चन्द्रशेखर रावण ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव से मुलाकात कर राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है.

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UP Chunav 2022: यूपी में विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां तेज हो गयी हैं. अब जबकि मतदान के लिए एक महीने का समय बचा है, सभी राजनीतिक दलों ने सियासी फॉर्मुला तलाश कर लिया है. एक ओर जहां भाजपा, सपा और बसपा ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं, वहीं कांग्रेस ने गुरुवार को अपने 125 प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी. वहीं बनते बिगड़ते राजनीतिक समीकरणों के बीच एक और बदलाव देखने को मिल रहा है. गुरूवार को आजाद समाज पार्टी के नेता चन्द्रशेखर रावण (Chandrashekhar Azad) ने एक बड़ा संकेत दे दिया है.

आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के नेता चंद्रशेखर आजाद गुरुवार को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व सीएम अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) से उनकी मुलाकात की. अखिलेश यादव के साथ मुलाक़ात के बाद दोनों दलों के बीच गठबंधन होने के कयास लगाए जा रहे हैं. ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं दोनों नेताओं में गठबंधन और सीट शेयरिंग को लेकर बातचीत आखिरी दौर में है. बता दें अखिलेश यादव की अगुवाई में सपा ने यूपी चुनाव के लिए अब तक सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, जनवादी पार्टी (सोशलिस्ट),राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी),अपना दल (कमेरावादी), प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया), महान दल, टीएमसी से गठबंधन किया है.

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चंद्रशेखर बिगाड़ेंगे मायावती का खेल!

चंद्रशेखर रावण ने पहले ही साफ़ कर दिया था कि वे भारतीय जनता पार्टी को हराने के लिए किसी भी दल के साथ गठबंधन कर सकते हैं. दरअसल उत्तरप्रदेश में करीब 22 प्रतिशत दलित आबादी रहती है ये समुदाय पश्चिमी यूपी की कई सीटों पर सीधा अपना प्रभाव रखते हैं. इतना ही नहीं यूपी की कुल 403 विधानसभा सीटों में से 85 सीटें दलितों के लिए आरक्षित हैं. इन सीटों पर बसपा का काफी अच्छा जनाधार है लेकिन पिछले दो चुनावों में यहां भी मायावती को नुकसान हुआ है. चन्द्रशेखर भी पश्चिमी यूपी के सहारनपुर से हैं, ऐसे में अगर वह सपा के साथ जाते हैं तो बपसा के लिए ये अच्छी खबर नहीं होगी. चन्द्रशेखर का उभार पिछले दो-तीन सालों में दलित नेता को तौर पर हुआ है. उनके साथ दलित युवाओं की अच्छी खासी भीड़ भी देखी जा सकती है.

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