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Shani Amavasya December 2021: जानें किस दिन है शनैश्चरी अमावस्या, होने जा रही है साल की अंतिम बड़ी खगोलीय घटना

Updated at : 29 Nov 2021 1:40 PM (IST)
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Shani Amavasya December 2021: जानें किस दिन है शनैश्चरी अमावस्या, होने जा रही है साल की अंतिम बड़ी खगोलीय घटना

Shani Amavasya December 2021: शनिवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या तिथि को शनैश्चरी अमावस्या या शनि अमावस्या कहते हैं. शनि देव की पूजा के लिए 4 दिसंबर 2021 शनिवार का दिन बहुत ही उत्तम है. इस दिन साल का अंतिम सूर्यग्रहण भी पड़ रहा है.

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Shani Amavasya 2021: शनि देव की पूजा के लिए 4 दिसंबर 2021 शनिवार का दिन बहुत ही उत्तम है. इस दिन मार्गशीर्ष मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि है. इस दिन शनिवार होने के कारण यह शनैश्चरी अमावस्या कहलाएगी. शनिवार के दिन अमावस्या तिथि होने पर उसका महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है.

शनिवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या तिथि को शनैश्चरी अमावस्या या शनि अमावस्या कहते हैं. बताते चलें कि प्रत्येक अमावस्या तिथि, देव पितृकार्यों के लिए सर्वोत्तम तिथि मानी जाती है. यह तिथि अपने पूर्वजों को याद करने के लिए एक महत्वपूर्ण तिथि है.

शनि देव के पिता हैं ‘सूर्य’

शनि अमावस्या की तिथि शनि देव को समर्पित है. इस दिन सूर्य ग्रहण भी लग रहा है. शास्त्रों के अनुसार सूर्य और शनि में पिता और पुत्र का संबंध है.

सूर्य ग्रहण 2021 (solar eclipse)

4 दिसंबर 2021, शनिवार के दिन सूर्य ग्रहण भी लग रहा है. जो वर्ष 2021 का आखिरी सूर्य ग्रहण है. इस सूर्य ग्रहण को महत्वपूर्ण माना जा रहा है. मान्यता है कि जब ग्रहण लगता है तो इसका प्रभाव मेष से लेकर मीन राशि तक के लोगों पर पड़ता है.

इन चीजों का करें दान-

अमावस्या तिथि पर शनिदेव से जुड़ी चीजों जैसे छाता, उड़द, उड़द दाल की खिचड़ी, काले तिल, सरसों का तेल आदि चीजों का दान जरूरतमंद लोगों में करें. माना जाता है कि इससे शनिदेव प्रसन्न होते हैं और आपके जीवन की समस्याएं दूर होती हैं.

मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष अमावस्या तिथि

मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि आरंभ- शुक्रवार, 3 दिसंबर को शाम 04:55 बजे से मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि समाप्त- शनिवार, 4 दिसंबर को दोपहर 01:12 तक

शनिदेव के उपाय

1. शनि के अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए एक कटोरी में तिल का तेल लेकर उसमें अपना चेहरा देखकर शनि मंदिर में कटोरी और तेल दोनों ही रख आएं. माना जाता हैं कि तिल के तेल से शनि विशेष प्रसन्न रहते हैं.

2. साबुत काले उड़द सवापाव की मात्रा में लेकर काले कपड़े में बांध लें और शुक्रवार को उसे अपने पास ही रखकर सोएं. फिर शनिवार को उस पोटली को शनि मंदिर में रख आएं.

3. एक शीशी काला सुरमा खरीद लें और शनिवार के दिन 9 बार अपने ऊपर से सिर से पैर तक किसी से उतरवा कर सुनसान जमीन में गाड़ दें.

4. शनि मंत्र- ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनये नमः का जप करके भी काफी हद तक शनि के कुप्रभाव से बचा जा सकता है। Shani Amavasya 2021

5. जिन लोगों की जन्मकुंडली में शनि का कुप्रभाव हो उन्हें शनिदेव के पैरों की तरफ ही देखना चाहिए और जहां तक हो सके शनि दर्शन से बचना चाहिए,

Posted By: Shaurya Punj

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