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Rishi Panchami 2022: आज है ऋषि पंचमी का व्रत, जानें पूजा सामग्री और पंचमी व्रत कथा

Updated at : 01 Sep 2022 7:42 AM (IST)
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Rishi Panchami 2022: आज है ऋषि पंचमी का व्रत,  जानें पूजा सामग्री और पंचमी व्रत कथा

Rishi Panchami 2022: पंचांग के अनुसार आज 1 सितंबर, गुरुवार का दिन पूजा पाठ और धार्मिक कार्यों के लिए बहुत ही उत्तम है. इसी दिन ऋषि पंचमी का व्रत रखा जा रहा है.

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Rishi Panchami 2022: गणेश चतुर्थी व्रत के अगले दिन और हरतालिका तीज व्रत के ठीक दूसरे दिन यानि कि भाद्र पद की शुक्ल पंचमी को ऋषि पंचमी का व्रत रखा जाता है. पंचांग के अनुसार आज 1 सितंबर, गुरुवार का दिन पूजा पाठ और धार्मिक कार्यों के लिए बहुत ही उत्तम है. इसी दिन ऋषि पंचमी का व्रत रखा जा रहा है.

ऋषि पंचमी पर करें सप्त ऋषियों की पूजा

ऋषि पंचमी के दिन सप्त ऋषि की पूजा की जाती है. मान्यता है कि जो महिला ऋषि पंचमी का व्रत रख कर विधि विधान से पूजा करती है. उसके जीवन के सभी दुःख नष्ट हो जाते हैं और उसे अखंड सौभाग्यवती होने का वर मिलता है. इस दिन सात ऋषि- मुनि वशिष्ठ, कश्यप, विश्वमित्र, अत्रि, जमदग्नि, अग्नि, गौतम, और भारद्वाज की पूजा की जाती है. सप्तऋषि की पूजा करने के लिए निम्नलिखित मंत्र का जाप करें-
“कश्यपोत्रिर्भरद्वाजो विश्वामित्रोथ गौतमः.
जमदग्निर्वसिष्ठश्च सप्तैतै ऋषयः स्मृताः..
दहन्तु पापं सर्व गृह्नत्वर्ध्यं नमो नमः”

ऋषि पंचमी पूजन सामग्री

इस दिन सप्त ऋषि बनाकर दूध, दही, घी, शहद और जल से अभिषेक करें. रोली, चावल, धूप, दीप आदि से पूजन करें. इसके बाद कथा सुनने के बाद घी से होम करें.

ऋषि पंचमी पूजा विधान

इस दिन भी सुबह स्नानादि करने के बाद पूजा करने का नियम निर्धारित किया गया है.
इस दिन घर की साफ़-सफाई के बाद सात ऋषियों के साथ देवी अरुंधती की स्थापना करनी चाहिए.
हो सके तो इस दिन की पूजा में हलके पीले रंग के वस्त्र पहनें.
पूजा शुरू करने से पहले पूरे घर में गंगाजल छिड़कर अगरबत्ती या धूप बत्ती जलाएं.
सप्त ऋषियों की तस्वीर के सामने जल से भरा हुआ एक कलश रख दें.
सप्‍त ऋषि को धूप-दीपक इत्यादि दिखाकर उन्हें पीले फल-फूल और मिठाई अर्पित करें.

पूजा के जरूरी नियम

इस व्रत को रखने वाली महिलाएं इस दिन सुबह सूर्योदय के समय स्नान कर नए वस्त्र धारण करें. इसके बाद पूजा घर में आसन लगाकर बैठ जाएं. इसके बाद एक चौकी तैयार करें चौकी में हल्दी, कुमकुम से चौकोर मंडल बनाकर सप्तऋषियों की स्थापना करें. इसके बाद गंगाजल छिड़कर चंदन लगाए. साथ ही फूल माला अर्पित करें. इसके बाद इन्हें मिठाई व फल का भोग लगाएं. साथ ही धूप जलाकर इस व्रत की कथा का श्रवण करें. मान्यता है कि इस दिन जो महिलाएं शुद्ध मन से ऋषि पंचमी का व्रत रखकर पजा करती हैं उन्हें जाने-अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिलती है.

डिसक्लेमर

‘इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है. विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं. Prabhat Khabar का उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें. इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी.’

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