साहिबगंज के इस पहाड़ से निकल रहा 'खून' जैसा पानी! पूजा-पाठ करने में जुटे लोग, जानिए क्या है मामला

झारखंड के साहिबगंज जिले में अद्भूत नजारा देखने को मिला है. दरअसल, बेलभद्री पहाड़ की तलहटी से खून जैसा लाल रंग का पानी निकल रहा है. इस पानी को देख लोग हैरान है. पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है. लाल पानी को लोग रक्त समझ कर पूजा-अर्चना करने में जुट गये हैं. आइये जानते हैं क्या है पूरा सच.
साहिबगंज जिले के मिर्जाचौकी थाना क्षेत्र के मंडरो अंचल अंतर्गत बेलभद्री पहाड़ की तलहटी से निकल रहा लाल रंग का पानी को लोग रक्त समझ कर पूजा-अर्चना करने में जुट गये हैं. लोगों की आस्था है कि यहां पर भगवान शिव का शिवलिंग हैं. इस कारण यहां से लाल रक्तस्राव हो रहा है. लोगों ने स्थल के चारों ओर पोल व खुट्टा गाड़ कर रस्सी से घेर कर स्थल पर झंडा लगाते हुए प्रसाद चढ़ा रहे हैं. पूजा-अर्चना कर भगवान शिव के जयकारा का जय घोष, माता पार्वती की जय घोष से पूरे क्षेत्र को भक्तिमय में परिवर्तित होते नजर आ रहे हैं. इसके बाद जेसीबी के माध्यम से मिट्टी से स्थान को ढंक दिया गया.
सुबह होते ही आस्था पर भारी पड़े लोगों ने मिट्टी को पुन: खोदकर स्थल पर अगरबत्ती जला कर पूजा-अर्चना करना शुरू कर दिया है. सामवेल पहाड़िया, सोमर पहाड़िया, रघुवीर पहाड़िया, सलिता देवी ,सोनी देवी ने बताया कि यहां पर शिव मंदिर बनवाया जायेगा. महिलाओं का भी यही कहना था कि इतने दिन से यहां पर इस तरह का रक्त जैसा लाल पानी नहीं निकला. आज क्यों निकल रहा है. यह भगवान का चमत्कार ही तो है. होपनमय मुर्मू का कहना है कि रात में मुझे सपना आया कि यहां पर भगवान शिव और माता पार्वती का मंदिर बनना चाहिए.
अंग्रेजी का मोरोम शब्द का छोटानागपुरी पर्याय है. ललगुटुवा, यह लाल होता है. पानी को लाल कर भी देता है. यह कोबाल्ट भी हो सकता है, जो जांच का विषय है. जबकि राजमहल पहाड़ी क्षेत्रों में जीवाश्म के साथ बेशकीमती खनिज एवं रत्न भी हैं. काला हीरा बेसाल्ट पत्थर भी है. भू-वैज्ञानिक के लिए शोध संसाधन और प्राकृतिक प्रयोगशाला है. इसमें विभिन्न तरह की भू-वैज्ञानिक घटनाएं हो चुकी है. इसका प्रमाण आज भी पहाड़ी के गर्भ में छिपे हैं. केंद्र व राज्य सरकार का ध्यानाकर्षण करना चाहूंगा कि राजमहल पहाड़ी को धरोहर के रूप में विकसित करने की जरूरत है.
-डॉ रणजीत कुमार सिंह, भू वैज्ञानिक
बेलभद्री पहाड़ की तलहट्टी से निकल रहे रक्त जैसा लाल पानी की जांच करने पहुंचे. यहां के एरिया में पत्थर पूरी तरह से लाला है, जो पानी में डालने के बाद लाल रंग निकलता है. बारिश के मौसम में पहाड़ी क्षेत्र में लाल पत्थर से लाल रंग निकलने पर लोग इसे जो रूप दे दे. यह उनकी भावनाओं पर जाता है.
-मनीष तिवारी, वन प्रमंडल पदाधिकारी, साहिबगंज
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By Prabhat Khabar News Desk
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