रवि का ‘प्रकाश’ हुआ अस्त, जीवटता से बने कैंसर रोगियों के लिए प्रेरणा, पढ़ें पिछले साल का यह खास इंटरव्यू
Ravi Prakash death : वरिष्ठ पत्रकार रवि प्रकाश अब नहीं रहे. लंग्स कैंसर से जंग लड़ते हुए आज दोपहर उनका निधन हो गया. इतनी गंभीर बीमारी के शिकार होने के बावजूद उन्होंने हमेशा अपनी जिंदादिली से लोगों को प्रेरणा दी. वे महज तीन दिन पहले अमेरिका से अवार्ड लेकर लौटे थे. मुंबई में उनका इलाज चल रहा था. पिछले साल कैंसर अवयरनेस डे के मौके पर उन्होंने कैंसर और इसके रोगियों पर प्रभात खबर के साथ विशेष बातचीत की थी. उस इंटरव्यू में उन्होंने कई जरूरी बातें कैंसर रोगियों के लिए बताई थी, जो आज भी प्रासंगिक हैं. एक बार फिर पढ़ें वह खास इंटरव्यू.
Ravi Prakash death : भारत में पिछले 22 साल में डेढ़ करोड़ लोग कैंसर से मरे हैं, लेकिन हम क्या कर रहे हैं. ‘क्लोज दि गैप’ का नारा देने मात्र से कैंसर का निदान संभव नहीं है. जरूरत इस बात कि है कि आप कैंसर की स्क्रीनिंग कराएं और इसका इलाज कराएं. कैंसर एक ऐसी बीमारी है जो थोड़ी डेडली है, लेकिन समय पर इलाज कराने से यह बीमारी ठीक हो जाती है. उक्त बातें कैंसर से पीड़ित वरिष्ठ पत्रकार रवि प्रकाश जी ने प्रभात खबर के साथ विशेष बातचीत में कही. रवि प्रकाश का हाल ही में 47वां कीमोथेरेपी हुआ है, बावजूद इसके वे पूरी ऊर्जा के साथ इस बीमारी से लोगों को अवगत करा रहे हैं और उन्हें उपचार के आसान रास्ते बता रहे हैं.
मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी उपचार योजना का उठाएं लाभ
रवि प्रकाश ने बताया कि कैंसर का इलाज संभव है, हां इसकी दवाइयां बहुत महंगी है. जैसे मैं अपनी ही बात करूं तो डाॅक्टर ने मुझे हर महीने पांच लाख की दवा दी थी, तो मैंने उनसे कहा कि मैं इतना खर्च नहीं कर पाऊंगा, तब उन्होंने मुझे दवा का दूसरा विकल्प दिया, जिसपर मैं हूं. कई लोग ऐसे हैं, जिनके पास इतने पैसे भी नहीं है, वे लोग दूसरे विकल्प पर जाते हैं. कई लोग जमीन बेचकर भी इलाज नहीं करा पाते हैं. उनके लिए मैं यह बताना चाहता हूं इलाज के कई और रास्ते हैं, जिनपर आपको चलना चाहिए. झारखंड में मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी उपचार योजना है. अगर किसी भी आदमी की सालाना आय तीन साल तक आठ लाख रुपये से कम है, तो वह इस योजना का पात्र है. ऐसे मरीज सिविल सर्जन के यहां आवेदन करेंगे और जरूरी दस्तावेज जमा कराएंगे, जिसमें आवास प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र और हलफनामा आदि शामिल है, तो उन्हें झारखंड सरकार 10 लाख रुपए तक की सहायत देती है और मरीज को कैशलेस इलाज मिलता है.
झारखंड सरकार ने टाटा मेमोरियल अस्पताल से किया है ये करार
झारखंड की सरकार ने टाटा मेमोरियल अस्पताल कोलकाता से एक करार किया है, जिसमें यह व्यवस्था है कि अगर कोई व्यक्ति आठ लाख सालााना आय वर्ग का है और वह इस अस्पताल में इलाज कराता है तो उसे सरकार 25 लाख रुपए तक की सहायता देती है. हां इसमें यह व्यवस्था जरूर है कि शुरुआत में जो पांच लाख रुपए लगते हैं वह आयुष्मान कार्ड से दिए जाते हैं. उसके बाद मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी योजना और अन्य योजनाओं से दी जाती है.
प्रधानमंत्री राहत कोष से भी मिलती है सहायता
इसके अलावा आप प्रधानमंत्री राहत कोष से भी सहायता लेकर अपना इलाज करा सकते हैं. इसके तहत आवेदन करना होता है और अस्पताल का काॅस्ट सर्टिफिकेट भी लगाना होता है. इस कोष से भी इलाज की सुविधा मिलती है. इसके अलावा कई ऐसे अस्पताल हैं, जो कम दर पर इलाज की सुविधा देती है, आपको बस विकल्प की तलाश करनी चाहिए. हमारी सोसाइटी में कई अच्छे लोग हैं, जो मदद के लिए सामने आते हैं. कैंसर को पूर्ण विराम ना मानें यह एक बीमारी है, किसी पाप का फल नहीं है. इससे लड़ने की कोशिश करें, डरें नहीं.
दुआओं का है अहम रोल
रवि प्रकाश जी ने बताया कि कैंसर मरीज को दुआओं और सपोर्ट की जरूरत होती है. जो समाज और परिवार देता भी है, लेकिन जो लोग कैंसर सुनकर किसी से छिटकते हैं, उन्हें यह समझना चाहिए कि बीमारी पूर्ण विराम नहीं है. कैंसर के बाद भी जीवन है, आज के सुपर स्टार शाहरुख खान के पिता का देहांत तब हो गया था, जब वे मात्र 15 साल के थे, लेकिन सबकुछ थम नहीं गया.
फोर्थ स्टेज में पता चला कैंसर से हैं पीड़ित
रवि प्रकाश जी का कहना है कि मुझे कैंसर का पता तब चला जब बीमारी फोर्थ स्टेज में पहुंच चुका था. ऐसे में मेरे सामने यही उपाय था कि जितनी भी जिंदगी है उसे बिना कष्ट के निकाला जाए. मेरा इलाज इसी तरह से हो रहा है. मेरा यह मानना है कि अगर आपको कोई भी परेशानी हो और वह अगर सात दिन से अधिक तक बनी रहे तो आप डाॅक्टर से संपर्क करें, जांच के बाद यह पता चल जाएगा कि आपको कोई बीमारी है या नहीं. अगर समय पर इलाज होगा तो मरीज स्वस्थ हो जाएंगे.
कैंसर की स्क्रीनिंग अनिवार्य हो
मेरा यह भी मानना है कि जब कोई मरीज डाॅक्टर के पास आता है तो जैसे वे बीपी, शुगर, वजन और अन्य जांच करते हैं उसी तरह उन्हें कैंसर की जांच भी करनी चाहिए, ताकि कैंसर का इलाज वक्त पर हो जाए और आम इंसान स्वस्थ रहे, कैंसर से उसकी मौत ना हो. मरीजों को भी अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरुक होना चाहिए और अपने डाॅक्टर पर भरोसा करके उनकी सलाह माननी चाहिए.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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