Air pollution: सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद गोपाल राय ने कहा-कोर्ट के आदेश का पालन होगा

Delhi Air pollution: सुप्रीम कोर्ट ने आज कहा कि हर हाल में पराली जलाना बंद किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि सरकारें सख्त कदम उठाएं. वायु प्रदूषण को आज ही रोकना होगा, कल तक हम इंतजार नहीं कर सकते हैं.
Delhi Air Pollution: सुप्रीम कोर्ट ने आज दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण पर तल्ख टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा है कि प्रदूषण को लेकर कोई दिशा-निर्देश ही नहीं है. हर कोई इस मामले की जिम्मेदारी दूसरे पर डालकर खुद बचना चाहता है. लेकिन हर मामले में राजनीति नहीं हो सकती है. दिल्ली में प्रदूषण को रोकना ही होगा, हम लोगों को मरते हुए नहीं देख सकते.
सुप्रीम कोर्ट ने आज कहा कि हर हाल में पराली जलाना बंद किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि सरकारें सख्त कदम उठाएं. वायु प्रदूषण को आज ही रोकना होगा, कल तक हम इंतजार नहीं कर सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार से कहा कि वह यह सुनिश्चित करें कि नगरपालिका का ठोस कचरा खुले में नहीं जलाया जाए. कोर्ट ने कहा कि दिल्ली को साल-दर-साल इस दौर से नहीं गुजरने दिया जा सकता. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान की सरकारें अविलंब पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाएं.
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सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा कि सरकार ऑड-ईवन कार योजना लागू करने में कोर्ट द्वारा प्रदूषण को रोकने के लिए जो निर्देश दिये हैं, उन्हें शामिल करेगी. गौरतलब है कि गोपाल राय ने सोमवार को यह बताया था कि दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए सरकार 13-20 नवंबर तक ऑड-ईवन कार योजना लागू करेगी. सुप्रीम कोर्ट आज दिल्ली एनसीआर में वायु प्रदूषण की गंभीर होती स्थिति से संबंधित एक मामले की सुनवाई करते हुए बहुत ही सख्त टिप्पणी की और यह कहा कि राज्य सरकारें ऐसी व्यवस्था करें ताकि पराली जलाने की घटना ना हो. गोपाल राय ने कहा कि हमारी यह कोशिश है कि हम कोर्ट द्वारा दिए गए तमाम निर्देशों का पालन करें.
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By रजनीश आनंद
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.
राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.
रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.
आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.
रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.
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