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यहां है देश का एक मात्र तक्षक नाग मंदिर, Nag Panchmi 2023 के दिन ऐसे पहुंचे यहां

Updated at : 15 Aug 2023 1:16 PM (IST)
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यहां है देश का एक मात्र तक्षक नाग मंदिर, Nag Panchmi 2023 के दिन ऐसे पहुंचे यहां

Nag Panchmi 2023, Country Only Takshak Snake Temple: मध्यप्रदेश राज्य के खरगोन जिले में खंडवा रोड पर ग्राम बिलाली से कुंछ ही दूरी पर स्थित नागराज का अतिप्राचीन तक्षक नाग का मंदिर स्थापित है. यहां पर्व विशेष के अतिरिक्त वर्षभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है.

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Nag Devta Takshak snake temple: सनातन परंपरा में नागपूजा का विशेष महत्व है.श्रावण शुक्ल पंचमी का दिन नागपंचमी पर्व के रूप में मनाया जाता है.इस साल 21 अगस्त को नाग पंचमी का त्योहार मनाया जाएगा. मान्यता है कि इस दिन नाग देवता की पूजा करने से उनकी कृपा मिलती और सर्प से किसी भी प्रकार की हानि का भय दूर हो जाता है. मध्यप्रदेश राज्य के खरगोन जिले में खंडवा रोड पर ग्राम बिलाली से कुंछ ही दूरी पर स्थित नागराज का अतिप्राचीन तक्षक नाग का मंदिर स्थापित है.यहां पर्व विशेष के अतिरिक्त वर्षभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है.

जानें तक्षक नाग मंदिर के बारे में

नाग को निमाड़वासी अपना रक्षक मानते हैं इसलिए खेत, खलिहान, गांव, शहर आदि स्थानों पर इनकी स्थापना की गई है.जिले में ही एक पौराणिक नाग मंदिर भी है.तक्षक नाग का यह मंदिर देश में एकमात्र होकर पौराणिक व धार्मिक महत्व भी रखता है. जिला मुख्यालय से 25 किमी दूर दसनावल में आज भी वट वृक्ष मौजूद है जिसके साथ मान्यता जुड़ी है.इसी के पास तक्षक नाग के मंदिर में श्रद्घालुओं का तांता लगा रहता है.यहां के पुजारी घनश्याम भारद्वाज ने बताया कि यही वह स्थल है जहां तक्षक नाग ने धनवंतरी को डसा था.

नाग ने यह उस चमत्कार के बाद किया जब यहां मौजूद एक वृक्ष को फूंफकार कर सुखा दिया गया था.इस सूखे प़ेड को ऋषि धनवंतरी ने पुनः हरा भरा कर दिया था.तक्षक नाग को आशंका थी कि वे राजा परीक्षित को पुनः जीवित कर सकते है.

समरसता के प्रतीक है भीलटदेव

जिले में लगभग साढ़े 3 हजार भीलटदेव व नाग मंदिर हैं.प्रमुख मंदिरों में से एक बीटीआई रोड स्थित मोठा भीलट मंदिर है.यहां समरसता देखी जा सकती है.कई वर्षों से यहां दलित परिवार इस मंदिर की देखभाल कर रहा है.वर्तमान में देखभाल करने वाली गंगाबाई को फख्र है कि उनकी कई पीढ़ियों ने इस मंदिर की सेवा की.अभी भी श्रद्घालुओं की आस्था इस मंदिर पर है.वे चाहती हैं कि इस मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचने वाले श्रद्घालुओं की मनोकामना पूरी हो.

कैसे पहुंचे खरगोन

वायु मार्ग द्वारा

सबसे पास का विमानपत्तन देवी अहिल्या बाई होल्कर विमानपत्तन इंदौर है.यह विमानपत्तन खरगौन से 150 कि.मी. दूरी पर स्थित है.

रेल मार्ग द्वारा

खरगौन के निकटस्थ रेल्वे स्टेशन खंडवा जंक्शन है.यह खरगौन से 87 कि.मी. कि दूरी पर स्थित है.साथ ही इंदौर जंक्शन खरगौन से 150 कि.मी. कि दूरी पर स्थित है.मीटर गेज़ रेल्वे स्टेशन मे निकटस्थ रेल्वे स्टेशन सनावद है जो खरगौन से 70 कि.मी. कि दूरी पर स्थित है.

सड़क मार्ग द्वारा

यह शहर इंदौर से 150 कि.मी., बड़वानी से 90 कि.मी. (यदि आप गुजरात से आ रहे हैं – राज्य महामार्ग 26), सेंधवा से 70 कि.मी. (यदि आप महाराष्ट्र से आ रहे हैं – आगरा मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग क्रं. 3), धामनोद से 65 कि.मी. (यदि आप इंदौर से आ रहे हैं – आगरा मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग क्रं. 3), धार से 130 कि.मी., खण्डवा से 90 कि.मी., बुरहानपुर से 130 कि.मी. तथा भुसावल से 150 कि.मी. दूरी पर है.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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