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मानव तस्करों के चंगुल में फंसी गिरिडीह की चार बच्चियां हुईं मुक्त, दिल्ली में तस्करी की थी तैयारी

Updated at : 22 Jun 2020 11:12 AM (IST)
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मानव तस्करों के चंगुल में फंसी गिरिडीह की चार बच्चियां हुईं मुक्त, दिल्ली में तस्करी की थी तैयारी

कोडरमा : लॉकडाउन के कारण आर्थिक तंगी बढ़ने के साथ ही मानव तस्करों का गिरोह फिर सक्रिय हो गया है. नौकरी का झांसा देकर बच्चियों की तस्करी की जाने लगी है. गिरिडीह के तिसरी से दिल्ली ले जायी जा रहीं चार बच्चियों को रविवार को रेस्क्यू किया गया. इन्हें मानव तस्करों के चंगुल से मुक्त किया गया.

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कोडरमा : लॉकडाउन के कारण आर्थिक तंगी बढ़ने के साथ ही मानव तस्करों का गिरोह फिर सक्रिय हो गया है. नौकरी का झांसा देकर बच्चियों की तस्करी की जाने लगी है. गिरिडीह के तिसरी से दिल्ली ले जायी जा रहीं चार बच्चियों को रविवार को रेस्क्यू किया गया. इन्हें मानव तस्करों के चंगुल से मुक्त किया गया.

चार बच्चियां हुईं मुक्त

मानव तस्करों के चंगुल से मुक्त करायी गयी बच्चियों की उम्र 14 से 17 वर्ष के बीच है. जानकारी के अनुसार, कोडरमा स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर चार से एक बाल तस्कर द्वारा चार बच्चियों को दिल्ली लेकर जाने की तैयारी थी. इसी बीच तत्परता दिखाते हुए इन्हें मानव तस्कर के चंगुल से छुड़ा लिया गया.

संरक्षण में हैं बच्चियां

इसकी सूचना चाइल्ड लाइन के टॉल फ्री नंबर 1098 पर मिली, तो तिसरी चाइल्डलाइन सब-सेंटर, कोडरमा चाइल्ड लाइन, जीआरपी और आरपीएफ ने स्टेशन पर खोजबीन शुरू कर दी. इसी बीच पुरुषोत्तम एक्सप्रेस (गाड़ी संख्या 02801) स्टेशन पहुंची. जब सभी बच्चियां ट्रेन में चढ़ने लगीं, तो एक ने उनकी पहचान कर ली. फिर सभी को अपने संरक्षण में ले लिया गया.

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चारों बच्चियां तिसरी की

मानव तस्करों के चंगुल से छुड़ायी गई ये चारों बच्चियां गिरिडीह जिले के तिसरी की रहने वाली हैं. शक होने पर गिरिडीह के हीरोडीह थाना के बदडीहा निवासी युवक को बाल तस्कर समझ कर टीम ने कब्जे में भी लिया है. पूछताछ के बाद जानकारी मिली कि असली बाल तस्कर उसी ट्रेन से पहले ही निकल चुका है.

दो बच्चियां सगी बहनें

बच्चियों ने बताया कि घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण कमाने दिल्ली जा रही थीं. गांव के ही पास के एक व्यक्ति ने रेल टिकट बुक कराया था. उसी ने बोलेरो की व्यवस्था कर कोडरमा पहुंचाया. चार में से दो बच्चियां सगी बहनें हैं. उन्होंने बताया कि घर में कोई कमानेवाला नहीं है. वह पहले भी दिल्ली में घर का काम कर चुकी हैं. एक लड़की ने बताया कि उसके पिता बीमार हैं, इसलिए काम करने के लिए दिल्ली जा रही थी.

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आज सीडब्ल्यूसी के समक्ष होंगी पेश

फिलहाल चारों बच्चियों को चाइल्ड लाइन को सौंप दिया गया है. सोमवार को सभी बच्चियों को सीडब्ल्यूसी के समक्ष पेश किया जायेगा. रेस्क्यू अभियान में रेल थाना प्रभारी शिव शंकर प्रसाद, सब सेंटर तिसरी के निदेशक अशोक कुमार सिंह, समन्वयक संजय पांडेय, चाइल्ड लाइन कोडरमा के समन्वयक दीपक राणा, टीम सदस्य नूतन कुमारी, कुमारी ज्योति सिन्हा, उमेश कुमार, सुजीत कुमार, समर्पण के नरेंद्र शर्मा, शाम्पी मंडल आदि का सहयोग रहा.

Posted By : Guru Swarup Mishra

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