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PM Modi in Varanasi: पीएम मोदी ने कहा वड़क्कम तमिलनाडु, देश-दुनिया में जा रही काशी तमिल संगमम् की आवाज

Updated at : 17 Dec 2023 8:06 PM (IST)
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PM Modi in Varanasi: पीएम मोदी ने कहा वड़क्कम तमिलनाडु, देश-दुनिया में जा रही काशी तमिल संगमम् की आवाज

पीएम मोदी ने कहा कि एक बार काशी के विद्यार्थी रहे सुब्रमण्यम भारती ने लिखा था कि काशी नगर में जो मंत्रोच्चार होते हैं उन्हें तमिलनाडु के कांची शहर में सुनने की व्यवस्था हो जाए तो कितना अच्छा होता. आज सुब्रमण्यम भारती जी को उनकी वह इच्छा पूरी होती नजर आ रही होगी.

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वाराणसी: काशी के दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे पीएम नरेंद्र मोदी ने नमो घाट पर आयोजित काशी तमिल संगमम् का उद्घाटन किया. इस मौके पर उन्होंने वड़क्कम काशी वड़क्कम तमिलनाडु और हर हर महादेव से अपना संबोधन शुरू किया. पीएम ने कहा कि कहा कि कार्यक्रम में मौजूद लोगों को मेरी परिवारजनों कहकर संबोधित किया.

पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि तमिलनाडु से आये लोगों से कहा कि वह इतनी बड़ी संख्या में सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय करके काशी आए हैं. काशी में आप सब अतिथि से ज्यादा मेरे परिवार के सदस्य के तौर पर हैं. मैं आप सभी का काशी तमिल संगम में स्वागत करता हूं. मेरे परिवारजनों तमिलनाडु से काशी आने का मतलब है महादेव के एक घर से उनके दूसरे घर आना. तमिलनाडु से काशी आने का मतलब है मदुरई मीनाक्षी के यहां से काशी विशालाक्षी के यहां आना. इसलिए तमिलनाडु और काशी वासियों के बीच हृदय में जो प्रेम है जो संबंध है वह अलग भी है और आज द्वितीय भी है. मुझे विश्वास है काशी के लोग आप सभी की सेवा में कोई कमी नहीं जोड़ रहे होंगे. आप जब यहां से जाएंगे तब बाबा विश्वनाथ के आशीर्वाद के साथ-साथ काशी का स्वाद काशी की संस्कृति और काशी की स्मृतियां भी ले जाएंगे. आज यहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से टेक्नोलॉजी का नया प्रयोग भी हुआ है. एक नई शुरुआत हुई है और उम्मीद है कि इससे आप तक मेरे बात पहुंचाना और आसान हुआ है.

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तमिल संगमम् की आवाज पूरी दुनिया में जा रही

पीएम मोदी ने कहा कि आज यहां से कन्याकुमारी वाराणसी तमिल संगमम् ट्रेन को हरी झंडी दिखाई गई है. मुझे तमिल के ग्रंथों का विभिन्न भाषाओं में अनुवाद के लोकार्पण का सौभाग्य मिला है. एक बार काशी के विद्यार्थी रहे सुब्रमण्यम भारती जी ने लिखा था कि काशी नगर में जो मंत्रोच्चार होते हैं उन्हें तमिलनाडु के कांची शहर में सुनने की व्यवस्था हो जाए तो कितना अच्छा होता. आज सुब्रमण्यम भारती जी को उनकी वह इच्छा पूरी होती नजर आ रही होगी. काशी तमिल संगम की आवाज पूरे देश में पूरी दुनिया में जा रही है. इस आयोजन के लिए सभी संबंधित मंत्रालयों को यूपी सरकार को और तमिलनाडु के सभी नागरिकों को बधाई देता हूं.

काशी तमिल संगमम् यात्रा से जुड़ रहे लाखों लोग

पीएम मोदी ने कहा कि काशी तमिल संगम शुरू होने के बाद से ही इस यात्रा में दिनों-दिन लाखों लोग जुड़ते जा रहे हैं. विभिन्न मतों के धर्मगुरु, स्टूडेंट, तमाम कलाकार, साहित्यकार, शिल्पकार, प्रोफेशनल्स, कितने ही क्षेत्र के लोगों को इस संगम से आपसी संवाद और संपर्क का एक प्रभावी मंच मिला है. मुझे खुशी है संगम को सफल बनाने के लिए बनारस हिंदू विश्वविद्यालय और आईआईटी मद्रास भी साथ आए हैं. आईआईटी मद्रास ने बनारस के हजारों स्टूडेंट्स को साइंस और मैथ में ऑनलाइन सपोर्ट देने के लिए विद्या शक्ति इनीशिएटिव शुरू किया है. एक वर्ष के भीतर हुए अनेक कार्य इस बात के प्रमाण हैं कि काशी और तमिलनाडु के रिश्ते भावनात्मक भी है और रचनात्मक भी हैं.

एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना हो रही मजबूत

काशी तमिल संगम ऐसा अविरल प्रवाह है जो एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना को लगातार मजबूत कर रहा है इसी सोच के साथ कुछ समय पहले काशी में ही गंगा पुस्कुरालू उत्सव (काशी तेलुगू संगम) भी हुआ था. गुजरात में हमने सौराष्ट्र तमिल संगमम् का भी सफल आयोजन किया था. एक भारत श्रेष्ठ भारत के लिए हमारे राजभवनों ने भी बहुत अच्छी पहल की है. अब राजभवन में दूसरे राज्यों के स्थापना दिवस समारोह धूमधाम से मनाए जाते हैं. दूसरे राज्यों के लोगों को बुलाकर विशेष आयोजन किए जाते हैं.

उन्होंने कहा कि एक भारत श्रेष्ठ भारत की यह भावना उसे समय भी नजर आई, जब हमने संसद के नए भवन में प्रवेश किया. नये संसद भवन में पवित्र सेंगोल की स्थापना की गई है. संतो के मार्गदर्शन में यही सेंगोल 1947 में सत्ता के हस्तांतरण का प्रतीक बना था. एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना का यही प्रमाण है, जो आज हमारे राष्ट्र की आत्मा में है.

पीएम ने कहा कि हम भारतवासी बोलियों, भाषा, वेशभूषा, खानपान, रहन-सहन की विविधता से भरे हुए हैं. भारत की यही विविधता उसकी आध्यात्मिक चेतना में रची बची है. जिसके लिए तमिल में कहा गया है कि सभी जल गंगाजल है भारत का हर भूभाग काशी है. जब उत्तर में आक्रांता हमारी आस्था के केंद्रों, काशी पर आक्रमण कर रहे थे, तब राजा पराक्रम पांडियन ने शिव काशी में यह कह कर मंदिरों का निर्माण कराया था कि काशी को मिटाया नहीं जा सकता है. आप दुनिया की कोई भी सभ्यता देख लीजिए विविधता में एकजुटता का ऐसा सहज और श्रेष्ठ स्वरूप आपको शायद ही कहीं मिलेगा. अभी हाल ही में जी-20 समिट के दौरान भी दुनिया भारत की इस विविधता को देखकर चकित थी.

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Amit Yadav

लेखक के बारे में

By Amit Yadav

UP Head (Asst. Editor)

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