Jyeshtha Purnima 2021 Date: आज है ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा, बन रहा विशेष संयोग, जानें शुभ मुहूत, पूजा विधि और इससे जुड़ी पूरी जानकारी...
Author : Prabhat Khabar Digital Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 24 Jun 2021 5:55 AM
Jyeshtha Purnima 2021 Date: आज ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा तिथि है. इस बार ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा कई मायनों में खास है. पूर्णिमा तिथि 24 जून दिन गुरुवार को पड़ रही है. 24 जून दिन गुरुवार को पंचांग के अनुसार 'शुभ' योग बना हुआ है. इस योग को शुभ और मांगलिक कार्यों को करने के लिए अच्छा माना गया है. इस योग में जन्म लेने वाले जातक बुद्धिमान होते हैं और जीवन में सफलता प्राप्त करते हैं.
Jyeshtha Purnima 2021 Date: आज ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा तिथि है. इस बार ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा कई मायनों में खास है. पूर्णिमा तिथि 24 जून दिन गुरुवार को पड़ रही है. 24 जून दिन गुरुवार को पंचांग के अनुसार ‘शुभ’ योग बना हुआ है. इस योग को शुभ और मांगलिक कार्यों को करने के लिए अच्छा माना गया है. इस योग में जन्म लेने वाले जातक बुद्धिमान होते हैं और जीवन में सफलता प्राप्त करते हैं. शुभ योग के बाद शुक्ल योग आरंभ होगा. पूर्णिमा के दिन सूर्य मिथुन और चंद्रमा वृश्चिक राशि में संचार करेंगे. जिस कारण यह संयोग अतिविशिष्ट हो गया है. इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने का विशेष महत्व है. यदि नदियों तक जाना संभव नहीं हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में गंगा जल मिलाकर स्नान कर सकते हैं.
ज्येष्ठ पूर्णिमा शुभ मुहूर्त
पूर्णिमा तिथि 24 जून की सुबह 03 बजकर 32 मिनट से शुरू होगी और 25 जून की रात 12 बजकर 09 मिनट पर समाप्त होगी.
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ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन किसी पवित्र नदी में स्नान करने का महत्व होता है.
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इस दिन सुबह स्नान आदि से निवृत होकर व्रत का संकल्प लें.
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कोरोना काल में घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें.
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इस दिन विधि- विधान से हनुमान जी की पूजा करें.
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फिर भगवान विष्णु की पूजा का भी विशेष महत्व होता है.
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रात के वक्त चंद्रमा की पूजा का भी विधान है.
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ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान का बहुत महत्व बताया गया है. वहीं स्नान के बाद दान भी जरूरी है. गंगा या और किसी पवित्र नदी में इस प्रात काल डुबकी लगाने से पापों से मुक्ति मिलती है. लेकिन कोरोना जैसी महामारी के दौर में कहीं जाना संभव और सुरक्षित नहीं है. इसलिए घर में नहाने के पानी में गंगाजल मिलकर स्नान किया जा सकता है. जिस तरह ज्येष्ठ अमावस्या पर वट सावित्री का व्रत रखा जाता है ठीक उसी तरह ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन वट पूर्णिमा के व्रत का विधान है. ये व्रत खासतौर से महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत के कुछ जगहों पर रखा जाता है.
Posted by: Radheshyam kushwaha
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