Jharkhand News : सोशल मीडिया पर सबसे लोकप्रिय सीएम बने हेमंत, छह महीने में 3.95 लाख पहुंची फॉलोअर्स की संख्या... पढ़ें झारखंड की टॉप 5 खबरें...

सोशल मीडिया पर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है. 27 दिसंबर 2019 को सीएम पद की शपथ लेने से पहले ट्वीटर पर श्री सोरेन के 32 हजार फॉलोअर थे. वहीं, पिछले छह माह में ट्वीटर पर इनके फॉलोअर की संख्या बढ़कर 3.95 लाख हो गयी है. तो वहीं, कोरोना से जंग में झारखंड को कोमचाबी मिल रही है. झारखंड में रोजाना मिलनेवाले संक्रमितों की तुलना में स्वस्थ होनेवालों की संख्या ज्यादा है. इधर, आर्थिक तंगी ने एक अंतर्राष्ट्रीय फुटबॉलर को बना दिया बीएसएल का ठेका मजदूर, यहां तक की सरकार से बार बार गुहार लगाने के बाद भी नहीं मिली मदद. तो सारी दुनिया का बोझ उठानेवाले कुली अब न तो अपना और न ही अपने परिवार का बोझ नहीं उठा पा रहे हैं... तो इधर, कागज पर हुई स्ट्रॉबेरी की खेती खूब फली फूली, एनडीए सरकार में किसानों के नाम पर अफसरों ने मचायी लूट... आज टॉप 5 झारखंड में इन्ही खबरों पर हम विस्तार से चर्चा करेंगे...
सोशल मीडिया पर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है. 27 दिसंबर 2019 को सीएम पद की शपथ लेने से पहले ट्वीटर पर श्री सोरेन के 32 हजार फॉलोअर थे. वहीं, पिछले छह माह में ट्वीटर पर इनके फॉलोअर की संख्या बढ़कर 3.95 लाख (13 गुना अधिक) हो गयी है. इधर, फेसबुक पर भी उनके फॉलोअर लगातार बढ़ रहे हैं.
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झारखंड में रोजाना मिलनेवाले संक्रमितों की तुलना में स्वस्थ होनेवालों की संख्या ज्यादा है. स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बताते हैं कि 13 से 28 जून (16 दिन) में 648 नये संक्रमित मिले, जबकि 1039 स्वस्थ हुए हैं. यानी बीते दो हफ्ते में जितने नये संक्रमित मिले हैं, उनकी तुलना में स्वस्थ होनेवाले की संख्या करीब डेढ़ गुना अधिक है. झारखंड में कोरोना से जुड़ी हर News in Hindi से अपडेट रहने के लिए बने रहें हमारे साथ.
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अंतर्राष्ट्रीय जूनियर फुटबॉल चैंपियनशिप में भारत और राष्ट्रीय फुटबॉल चैंपियनशिप में राज्य का कई बार प्रतिनिधित्व करने वाले बोकारो के प्रतिभावान खिलाड़ी संतोष कुमार आज बीएसएल प्लांट में ठेका मजदूरी करने को विवश हैं. जिला फुटबॉल संघ की ओर से संतोष को नियोजन देने की मांग को लेकर वर्ष 2000 में तत्कालीन राज्य सरकार को आवेदन भी भेजा गया था. लेकिन, उन्हें सरकार से किसी तरह की मदद नहीं मिल सकी.
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कुली, जिन्हें रेलवे की भाषा में सहायक कहा जाता है. उनके सामने आजीविका का संकट पैदा हाे गया है. कारण यह है कि लॉकडाउन शुरू होते ही पैसेंजर ट्रेनें बंद हो गयीं. इससे स्टेशनाें पर यात्रियों के सामान उठा कर अपनी रोजी-रोटी कमानेवाले कुली की कमाई भी बंद हो गयी.
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पिछली एनडीए सरकार के कार्यकाल में कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए कागज पर ही स्ट्रॉबेरी की खेती करवायी. महालेखाकार (एजी) द्वारा गुमला डिस्ट्रिक्ट हर्टिकल्चर ऑफिस में नमूना जांच के दौरान मामला पकड़ में आया है. एजी ने सरकार को रिपोर्ट भेज दी है.
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Post by : Pritish Sahay
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