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झारखंड पंचायत चुनाव: सियासी रंग में रंगे गांव के टोले-मोहल्ले, किस पद के लिए रुचि नहीं दिखा रहे प्रत्याशी

Updated at : 25 Apr 2022 5:42 PM (IST)
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झारखंड पंचायत चुनाव: सियासी रंग में रंगे गांव के टोले-मोहल्ले, किस पद के लिए रुचि नहीं दिखा रहे प्रत्याशी

Jharkhand Panchayat Chunav 2022: लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड की बेतला समेत आसपास की पंचायतों में पंचायत समिति सदस्य पद के लिए प्रत्याशियों में उत्साह फीका देखा जा रहा है. पूर्व में जो पंचायत समिति सदस्य रह चुके हैं, वे भी इस पद में रुचि नहीं ले रहे हैं. वे भी मुखिया का चुनाव लड़ना चाहते हैं.

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Jharkhand Panchayat Chunav 2022: झारखंड पंचायत चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज है. गांव के टोले-मोहल्ले से लेकर प्रखंड मुख्यालय तक पंचायत प्रतिनिधियों का आना-जाना लगा हुआ है. वोटर्स के बीच भी प्रत्याशियों को लेकर चर्चा हो रही है. प्रत्याशी भी मतदाताओं को रिझाने में जुटे हैं. इस बीच लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड की बेतला समेत आसपास की पंचायतों में पंचायत समिति सदस्य पद के लिए प्रत्याशियों में उत्साह फीका देखा जा रहा है. पूर्व में जो पंचायत समिति सदस्य रह चुके हैं, वे भी इस पद में रुचि नहीं ले रहे हैं. वे भी मुखिया का चुनाव लड़ना चाहते हैं.

वार्ड सदस्य व मुखिया के लिए कई प्रत्याशी

जानकारी के अनुसार लातेहार जिले की बेतला पंचायत में अभी पंचायत समिति सदस्य पद के लिए तीन प्रत्याशी चर्चा में हैं. केचकी पंचायत से सिर्फ एक प्रत्याशी का ही नाम चर्चा में है. ऐसी ही स्थिति पोखरी में भी है. अन्य पंचायतों में भी पंचायत समिति सदस्य के प्रत्याशियों की संख्या कम है, जबकि वार्ड सदस्य और मुखिया पद के लिए काफी प्रत्याशी हैं. जिला परिषद सदस्य के लिए भी करीब एक दर्जन प्रत्याशी हैं.

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मुखिया का चुनाव लड़ने में दिलचस्पी

पूर्व में जो पंचायत समिति सदस्य थे, वे भी इस बार इस पद के लिए चुनाव नहीं लड़ना चाहते. बेतला के निवर्तमान पंचायत समिति सदस्य आफताब आलम ने कहा कि पंचायत में पंचायत समिति सदस्यों को अपेक्षित फंड नहीं मिलता है. इस कारण जनता के साथ किये वायदे को वे लोग पूरा नहीं कर पाते हैं. मुखिया पर दबाव बनाने के बावजूद उनकी बातें अनसुनी कर दी जाती हैं. कंचनपुर पंचायत के निवर्तमान पंचायत समिति सदस्य इस बार पंचायत समिति सदस्य का चुनाव नहीं लड़कर सीधे मुखिया का चुनाव लड़ना चाह रहे हैं. उनका कहना है कि पंचायत समिति सदस्य पंचायत की समस्याओं को प्रखंड स्तर तक पहुंचा तो देते हैं लेकिन उनकी बातें अनसुनी कर दी जाती हैं. इसलिए बेहतर होगा कि वह मुखिया बनकर क्षेत्र की जनता की सेवा करें. पोखरी पंचायत के निवर्तमान पंचायत समिति सदस्य मंसूर आलम भी इस बार चुनाव से परहेज कर रहे हैं.

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रिपोर्ट: संतोष कुमार

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