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झारखंड : इस जिले में अलग होती है दुर्गा पूजा की धूम, मां की प्रतिमा को पहनाए जाते हैं असली सोने के आभूषण

Updated at : 20 Oct 2023 11:18 AM (IST)
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झारखंड : इस जिले में अलग होती है दुर्गा पूजा की धूम, मां की प्रतिमा को पहनाए जाते हैं असली सोने के आभूषण

झारखंड के जामताड़ा जिले में मां दुर्गा का श्रृंगार बेहद अहम ढंग किया जाता है. सार्वजनिक दुर्गापूजा समिति बाजार रोड में मां दुर्गा की पूजा को लेकर तैयारी अंतिम चरण में है. यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु माथा टेकने पहुंचते हैं.

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Durga Puja 2023: जामताड़ा जिले में शारदीय नवरात्र के पांचवें दिन गुरुवार को मां स्कंदमाता की पूजा हुई. देवी दुर्गा अपने पांचवें स्वरूप में स्कंदमाता के नाम से जानी जाती हैं. इस मौके पर सभी प्रमुख देवी मंदिरों में पूजा के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही. वहीं, गांधी मैदान, दुमका रोड, कोर्ट रोड, बाजार रोड, कायस्थपाड़ा स्थित मां दुर्गा मंदिरों में पूजा-अर्चना को लेकर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. सुबह से ही भक्त मां के दर्शन-पूजन कर सुख समृद्धि की कामना करते रहे. समय के साथ देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती ही जा रही है. वहीं नवरात्र के छठे दिन शुक्रवार को मां कात्यायनी की अराधना होगी. इधर पूजा को लेकर शहर से लेकर गांव तक तैयारी जोरों पर है. महासप्तमी से सभी पंडालों में मां की प्रतिमा स्थापित होने के बाद महाअष्टमी, महानवमी व महादशमी की पूजा-अर्चना होगी. श्री श्री सार्वजनिक दुर्गापूजा समिति बाजार रोड में मां दुर्गा की पूजा को लेकर तैयारी अंतिम चरण में है. यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु माथा टेकने पहुंचते हैं. बाजार रोड दुर्गोत्सव की खास बात यह है कि यहां मां दुर्गा का शृंगार सोने के आभूषण से की जाती है. गले के हार से लेकर मांग टीका, मां के कंगन, मां का मुकुट, सभी सोने के होते हैं. यह आभूषण श्रद्धालुओं के द्वारा दान में दिया जाता है. हालांकि, प्रतिमा विसर्जन के समय सभी आभूषणों को उतार लिया जाता है.

जामताड़ा बाजार रोड में दुर्गोत्सव वर्ष 1916 से मनाया जा रहा है. इस पूजा की शुरुआत जामताड़ा के राजघराने की ओर से की गयी थी. आज भी इस पूजा समिति के अध्यक्ष राजपरिवार के अजीत सिंह हैं. वर्ष 1916 में दुर्गापूजा की शुरुआत करने के समय तत्कालीन राजा ने पूजा में होने वाले खर्च के वहन का दायित्व तिलाबाद के माझी परिवार को सौंपा था. इसके लिए तब के राजा ने खेती दान में दिया था और कहा था कि खेत से उगने वाले अनाज को बेचने पर जो आय प्राप्त होगी उसी से मां दुर्गा पूजा के अनुष्ठान पर खर्च वहन किया जायेगा. 105 साल से दुर्गापूजा के अनुष्ठान में खर्च का वहन तिलाबाद के माझी परिवार उठा रहे हैं. इस पूजा की एक और खास बात यह है कि दशमी के दिन मां को श्रद्धालु कंधे पर रखकर तिलाबाद उनके सेवायत माझी परिवार से मिलाने ले जाया जाता है. यहां के बुजुर्गों का कहना है तिलाबाद मां का मायका है.

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