JTET भाषा विवाद: मंत्रियों की कमेटी में नहीं बनी बात, 6 में से 4 का विरोध, अब CM करेंगे फैसला

Published by : Sameer Oraon Updated At : 04 Jun 2026 7:01 AM

विज्ञापन

बैठक करते कमेटी के सदस्य

Jharkhand JTET Dispute: झारखंड जेटेट (JTET) में भोजपुरी, मगही और अंगिका भाषा को शामिल करने पर बनी मंत्रियों की उच्च स्तरीय कमेटी की बैठक बेनतीजा रही. शिल्पी नेहा तिर्की और हफिजुल हसन सहित 4 मंत्रियों के विरोध के बाद अब अंतिम फैसले के लिए रिपोर्ट मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भेजी जा रही है.

विज्ञापन

रांची से आनंद मोहन की रिपोर्ट

Jharkhand JTET Dispute, रांची: झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) की जिलावार सूची में भोजपुरी, मगही और अंगिका भाषा को शामिल करने का मामला पूरी तरह उलझ गया है. इस विवाद को सुलझाने के लिए गठित मंत्रियों की उच्च स्तरीय कमेटी की बुधवार को हुई अहम बैठक बेनतीजा रही. पूर्व की पांच सदस्यीय कमेटी के विस्तार के बाद यह पहली बैठक थी, जिसमें मंत्रियों के बीच आपसी सहमति नहीं बन सकी. अब कमेटी अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सौंपेगी, जिनका फैसला इस विषय पर अंतिम होगा.

कमेटी में अल्पमत में आए समर्थक, विरोध में 4 मंत्री

बैठक में कमेटी के भीतर भाषाई प्राथमिकताओं को लेकर मंत्रियों के बीच स्पष्ट विभाजन देखने को मिला. कमेटी में शामिल दो नए मंत्रियों- शिल्पी नेहा तिर्की और हफिजुल हसन अंसारी ने भोजपुरी, मगही और अंगिका को जेटेट में शामिल करने पर कड़ी असहमति जताई. पहले से कमेटी में शामिल मंत्री सुदिव्य सोनू और योगेंद्र महतो पहले से ही इसके विरोध में थे. इसके साथ ही विरोध करने वाले मंत्रियों की संख्या बढ़कर चार हो गई है. कमेटी के संयोजक व वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर, मंत्री दीपिका पांडेय सिंह और मंत्री संजय सिंह यादव इन तीनों भाषाओं को शामिल करने के पक्ष में डटे रहे.

संयोजक राधाकृष्ण किशोर ने चला नया दांव

बैठक के दौरान सहमति न बनते देख कमेटी के संयोजक राधाकृष्ण किशोर ने एक नया प्रस्ताव सामने रखा. उनका कहना था कि यदि ये तीन भाषाएं शामिल नहीं की जाती हैं, तो हिंदी को पेपर टू (Paper 2) में अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए. उन्होंने दलील देते हुए कहा कि पलामू और गढ़वा में नागपुरी भाषा को सूची में शामिल किया गया है, जबकि वहां दो प्रतिशत आबादी भी इस भाषा को नहीं बोलती. उन्होंने जोर दिया कि राज्य का गठन जनजातीय भावना के साथ-साथ यहां के सामाजिक व आर्थिक उत्थान के लिए सभी वर्गों को ध्यान में रखकर हुआ था. हालांकि, इस प्रस्ताव पर बाकी मंत्रियों ने साफ कहा कि पेपर वन (Paper 1) में हिंदी पहले से ही मौजूद है.

Also Read: Ranchi: गैंगस्टर प्रिंस खान के नाम पर होटल कारोबारी से 50 लाख की मांगी रंगदारी

जानिए बैठक में किस मंत्री ने क्या तर्क दिया

कमेटी की नई सदस्य और कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि राज्य में अभी स्पष्ट स्थानीय नीति नहीं है, ऐसे में भाषा से ही स्थानीय युवाओं के अधिकारों की रक्षा और बाहरी तत्वों पर नियंत्रण संभव है. शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) राज्य अपनी जरूरत और योग्य शिक्षकों की तलाश के लिए लेता है, वरना सीटेट (CTET) ही काफी था. जनजातीय व क्षेत्रीय भाषाएं हमारे सामाजिक-सांस्कृतिक हितों से जुड़ी हैं. जब स्कूलों में मगही, भोजपुरी और अंगिका की पढ़ाई ही नहीं होती, तो इन्हें परीक्षा में कैसे शामिल किया जा सकता है.”

हफिजुल हसन अंसारी ने क्या कहा

कमेटी के एक और नए सदस्य हफिजुल हसन अंसारी ने कहा कि मगही, भोजपुरी और अंगिका बिहार की मूल भाषाएं हैं. जब खुद बिहार ने अपनी प्रशासनिक सेवा (BPSC) की परीक्षाओं में इन भाषाओं को शामिल नहीं किया है, तो झारखंड इन्हें अपनी परीक्षा में क्यों शामिल करें? इन्हें किसी भी हाल में शामिल नहीं किया जा सकता.”

मंत्री इस सुदिव्य सोनू ने क्या कहा

मंत्री इस सुदिव्य सोनू ने इस विवाद पर तर्क देते हुए झारखंड राज्य का गठन जिन मूल भावनाओं और उद्देश्यों के लिए हुआ था, उसका हर हाल में सम्मान किया जाना चाहिए. वहीं, हेमंत कैबिनेट के एक और मंत्री योगेंद्र प्रसाद महतो ने दलील दी कि मगही, भोजपुरी और अंगिका झारखंड की मूल क्षेत्रीय भाषाएं नहीं हैं, इसलिए इन्हें शामिल करने का कोई औचित्य नहीं है.”

दीपिका पांडेय सिंह और राधाकृष्ण किशोर समर्थन में

हालांकि, दीपिका पांडेय सिंह इन 3 भाषाओं को शामिल करने के पक्ष में दिखाई पड़ीं. उन्होंने कहा कि अंगिका, भोजपुरी और मगही को परीक्षा में शामिल किया जाना चाहिए. हर भाषा का अपना सम्मान होना चाहिए.” मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कमेटी की सदस्य और मंत्री दीपिका की बात का समर्थन किया. उन्होंने दलील दी कि राज्य में किसी भी क्षेत्र के अभ्यर्थियों के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए, परीक्षा में सबको समान अवसर मिलना चाहिए.”

मुख्यमंत्री को भेजी जाएगी रिपोर्ट, दो दिन का समय

कमेटी के संयोजक राधाकृष्ण किशोर ने स्पष्ट कर दिया है कि यह इस संबंध में आखिरी बैठक थी. उन्होंने कमेटी के सभी सदस्यों से कहा है कि यदि वे चाहें तो अपनी बातें लिखित रूप में एक-दो दिन के भीतर दे सकते हैं. इसके बाद मंत्रियों की इस भावना और लिखित दलीलों से अवगत कराते हुए पूरी रिपोर्ट मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भेज दी जाएगी, जिसके बाद इस पूरे विवाद पर अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री स्तर से ही लिया जाएगा.

Also Read: झारखंड में अवैध माइनिंग पर ब्रेक: CM हेमंत सोरेन का कड़ा निर्देश- निष्क्रिय खदानों के ऑक्शन होंगे रद्द

विज्ञापन
Sameer Oraon

लेखक के बारे में

By Sameer Oraon

समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola