'मेरा काम अधिकारियों तक घूस पहुंचाना और बेनामी संपत्तियां खरीदना था', SVU की पूछताछ में रिशु श्री के डमी डायरेक्टर ने खोले कई राज

Published by : Abhinandan Pandey Updated At : 06 Jun 2026 10:51 AM

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पुलिस के गिरफ्त में संतोष, रिशु श्री की फाइल फोटो

Bihar News: टेंडर माफिया रिशु श्री के सबसे करीबी सहयोगी और डमी डायरेक्टर संतोष कुमार की गिरफ्तारी के बाद SVU की जांच में बड़े खुलासे हुए हैं. पूछताछ में संतोष ने कथित तौर पर रिश्वत, फर्जी बिलों, बेनामी संपत्तियों और 125 करोड़ रुपये के टेंडर से जुड़े पूरे नेटवर्क की जानकारी दी है.

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Bihar News: टेंडर माफिया रिशु श्री के बेहद करीबी और उसकी कंपनियों में डमी डायरेक्टर के तौर पर काम करने वाले संतोष कुमार को स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) ने शुक्रवार को पटना के मीठापुर इलाके से गिरफ्तार कर लिया. जांच एजेंसी के मुताबिक संतोष पिछले करीब 15 वर्षों से रिशु श्री के वित्तीय और कारोबारी नेटवर्क का अहम हिस्सा था और उसकी काली कमाई से जुड़े कई काम संभालता था.

SVU की पूछताछ में संतोष कुमार ने कई अहम जानकारियां दी हैं, जिसके बाद जांच का दायरा और बढ़ सकता है. अब एजेंसी उसे रिमांड पर लेकर आगे पूछताछ करने की तैयारी कर रही है.

पूछताछ में क्या-क्या खुलासे हुए?

जांच के दौरान संतोष कुमार ने स्वीकार किया कि उसका मुख्य काम अधिकारियों तक रिश्वत पहुंचाना और रिशु श्री के लिए बेनामी संपत्तियां खरीदने की व्यवस्था करना था. उसने कथित तौर पर यह भी बताया कि रिशु श्री के नेटवर्क में पैसे का लेन-देन किस तरह किया जाता था.

फर्जी खर्च दिखाकर निकाला जाता था कैश

SVU के अनुसार रिशु श्री की कंपनी ‘मातृस्वा कंस्ट्रक्शन’ में कई बार फर्जी और बढ़ा-चढ़ाकर खर्च दिखाए जाते थे. इन खर्चों के आधार पर कंपनी के खातों से बड़ी मात्रा में नकदी निकाली जाती थी. जांच एजेंसी का दावा है कि यही नकदी आगे अधिकारियों और इंजीनियरों को रिश्वत देने में इस्तेमाल की जाती थी.

ईंधन के फर्जी बिलों से भी जुटाया जाता था पैसा

पूछताछ में यह भी सामने आया है कि नकदी की व्यवस्था करने के लिए वाहनों के ईंधन के फर्जी बिल तैयार किए जाते थे. इन बिलों के जरिए कंपनी के खर्च बढ़ाकर दिखाए जाते थे और बाद में रकम नकद निकाली जाती थी.

बेनामी संपत्तियों के पीछे संतोष की भूमिका

जांच में सामने आया है कि रिशु श्री के नाम से खरीदी गई कई बेनामी अचल संपत्तियों की खरीद-फरोख्त में संतोष कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका थी. एजेंसी का मानना है कि संपत्तियों की खरीद के लिए पूरे नेटवर्क की योजना वही तैयार करता था.

125 करोड़ के टेंडर का भी खुलासा

SVU की जांच में 125 करोड़ रुपये के एक बड़े टेंडर का मामला भी सामने आया है. आरोप है कि जल संसाधन विभाग में प्रभाव का इस्तेमाल कर सुपौल के बीरपुर स्थित फिजिकल मॉडलिंग सेंटर से जुड़े इस टेंडर को पहले अहमदाबाद की कंपनी ‘शेवरॉक्स’ को दिलाया गया. इसके बाद कथित तौर पर साजिश के तहत इस काम को सब-कॉन्ट्रैक्ट के जरिए रिशु श्री की कंपनी ‘मातृस्वा कंस्ट्रक्शन’ को सौंप दिया गया. संतोष कुमार इसी कंपनी में डमी डायरेक्टर के रूप में कार्यरत था.

2010 से शुरू हुआ था रिशु और संतोष का साथ

जांच एजेंसी के अनुसार संतोष कुमार और रिशु श्री का संबंध वर्ष 2010 से है. उस समय रिशु डस्टबिन सप्लाई का काम करता था. समय के साथ दोनों के बीच भरोसा बढ़ता गया और बाद में संतोष को रिशु की कई कथित शेल कंपनियों में डायरेक्टर बना दिया गया.

IAS संजीव हंस पर भी गंभीर आरोप

SVU एफआईआर संख्या 5/25 के तहत इस पूरे मामले की जांच कर रही है. जांच एजेंसी का दावा है कि इस कथित घोटाले के केंद्र में तत्कालीन जल संसाधन विभाग के सचिव रहे IAS अधिकारी संजीव हंस हैं.

कमीशन का पूरा हिसाब रखता था एक और सदस्य

जांच में पवन कुमार नाम के एक अन्य व्यक्ति की भूमिका भी सामने आई है. एजेंसी के अनुसार पवन अधिकारियों को दिए जाने वाले 2 प्रतिशत से 10 प्रतिशत तक के कथित कमीशन का पूरा रिकॉर्ड रखता था.

फोन से मिले गोपनीय दस्तावेज

SVU का कहना है कि मुख्य आरोपी रिशु श्री के मोबाइल फोन से कई गोपनीय सरकारी दस्तावेज बरामद हुए हैं. एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि ये दस्तावेज उसके पास कैसे पहुंचे.

महिला को चुप कराने के लिए 20 लाख देने का आरोप

जांच के दौरान एक और गंभीर आरोप सामने आया है. SVU के मुताबिक एक महिला को चुप रखने के लिए रिशु श्री की कंपनी से 20 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए थे. एजेंसी का दावा है कि यह भुगतान तत्कालीन IAS अधिकारी संजीव हंस के कहने पर किया गया था.

संतोष कुमार की गिरफ्तारी को इस पूरे मामले में बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है. जांच एजेंसी को उम्मीद है कि रिमांड के दौरान उससे और भी महत्वपूर्ण जानकारियां मिल सकती हैं, जिससे टेंडर, रिश्वत और बेनामी संपत्तियों से जुड़े कथित नेटवर्क की परतें खुल सकती हैं.

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अभिनंदन पांडेय पिछले दो वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की और दैनिक जागरण, भोपाल में काम किया. वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के हिस्सा हैं. राजनीति, खेल और किस्से-कहानियों में उनकी खास रुचि है. आसान भाषा में खबरों को लोगों तक पहुंचाना और ट्रेंडिंग मुद्दों को समझना उन्हें पसंद है. अभिनंदन ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से की. पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को सही तरीके से लोगों तक पहुंचाने की सोच ने उन्हें इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. दैनिक जागरण में रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने भोपाल में बॉलीवुड के कई बड़े कलाकारों और चर्चित हस्तियों के इंटरव्यू किए. यह अनुभव उनके करियर के लिए काफी अहम रहा. इसके बाद उन्होंने प्रभात खबर डिजिटल में इंटर्नशिप की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की वास्तविक दुनिया को करीब से समझा. बहुत कम समय में उन्होंने रियल टाइम न्यूज लिखना शुरू कर दिया. इस दौरान उन्होंने सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता भी बेहद जरूरी होती है. फिलहाल वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ काम कर रहे हैं. बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में कवर किया, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और वीडियो कंटेंट भी तैयार किए. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और भरोसेमंद खबर पहुंचे. पत्रकारिता में उनका लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और एक विश्वसनीय पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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